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  • 34 minutes ago

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00:00नाद ब्रम्ह जिससे के सारी सुरुष्टी चलायमान है इसी नाद ब्रम्ह की साधी का परम शद्धेय दिवंगत श्रीमती जूचना जी
00:15दर्डा के संगीत के प्रती असीम प्रेम को देखते हुए उनके जीवन साथी आदरनिय दादा दादा याने के लोकमत क्रूप
00:27के अध्
00:29सुर्जोचना पुरसकार की सापना 2014 में की तब से लेकर आज तक अनेक युवा प्रतीभाओं को ये अवार्ड मिल चुका
00:40है
00:40कहते हैं ना के साहित्य संगीत कला विहीन साहित्य संगीत कला विहीन साक्षात पशू पुछ विशान हीन
00:52तो वाकई वो लोग बहुत ही भागिवान है जिनोंने किसी भी कला को अपनाया है विजय बाबु खुद एक बहुत
01:01बड़े कला प्रेमी है
01:03ना सिर्फ वो ही लेकिन समस्त दरड़ा परिवार आदर्णिया राजिंद्र वाबु जी आशा जी देवेंदर दरड़ा जी रिशी जी और
01:12पूर्वा सब लोग बहुत ही संगीत के प्रेमी है
01:17सूर्जुचना की परिकल्पना आज एक ऐसे मकाम पर पहुँची है
01:22ये सपना इस तरह से साकार हुआ है कि हर कलाकार इस संस्ता से जुड़ना चाहता है
01:31संगीत के पुरसकार तो अनेको हैं लेकिन सूर्जुचना अलग कैसे हैं
01:37इसके अंतरगत हर साल दो प्रतिभाशाली कलाकारों को अवार्ड दिया जाता है
01:43उसके बाद उनको रंगमंच दिया जाता है
01:47नॉर्मली आपने देखा होगा कि जब अवार्ड फंक्शन खतम हो जाता है
01:51तो संस्था और पुरसकार विजेता का संबंध भी वहीं तक सीमित होता है
01:58ट्रोफी या अवार्ड जो है वो उनके घर की शोभा बन जाती है
02:02लेकिन ऐसा सूर्जुचना के साथ नहीं है
02:06सूर्जुचना पुरसकार का हर विजेता हमेशा इस संस्था से जुड़ा रहा है
02:12पूरे भारत में लोकमत द्वारा उनके कारेक्रम आयुज़त किये जाते हैं
02:17and in today's world, media is so important as all of you know
02:22तो सूर्जुचना संस्थान इन सब कलाकारों को मदद करती है
02:27to get them a good coverage on media
02:29and on platforms like Instagram, Facebook, etc.
02:34And now I must say, I must confess as a jury member
02:39that it is very very difficult to choose from the vast ocean of talent across India
02:46East, West, North, South
02:50हर जगा से हम को हजारों एंट्रीज आती है
02:54कई प्रतिभावान कलाकार अपनी कुरूती रेकॉर्ड करके हमें भेजते है
03:00और यह हमारा सवभाग्य है
03:02के हमें इन सब को सुनने का मौका मिलता है
03:05जिसके लिए वेरी ग्रेटफुल टु दरड़ा परिवार
03:10for putting their faith in us
03:14The whole jury, Shri Shashivyaz जी, I don't know if he's here
03:18Shri Rupkumar Rathur Ji, Gauri Yadwadkar Ji, Shri Anu Malik Ji also is not here
03:25and myself
03:26we take pride in being the jury of this great award
03:31and I will conclude with a couplet
03:36के हुजू में बुलबुल हुआ चमन में
03:40हुजू में बुलबुल हुआ चमन में
03:43किया जो गुलने जमाल पैदा
03:46जब कली एक फूल बन जाती है
03:50तो भावरे अपने आप मंडराने लगते हैं
03:53उनको इन्विटेशन नहीं देना पड़ता है
03:55तो हुजू में बुलबुल हुआ चमन में किया जो गुलने जमाल पैदा
04:02और कमी नहीं खदरदा की अकबर करे तो कोई कमाल पैदा
04:08और ऐसे ही कमाल करने वाले अनेक कलाकारों ने
04:13इस टोफी को आज तक जीता है
04:15आप सब का साथ हमें हमेशा ऐसे ही मिलता रहे
04:20इसी उम्मीद के साथ आप सब का बहुत बहुत धनिवाद जै माहराश्ट जै हिंद
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