00:04वैशाक मास के दोरान पितर पृत्वी लोग पर अपने वन्शचों की निकट आते हैं।
00:55करना एक परंपरा बन गई है।
01:00धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे।
01:02पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण ही हुई है।
01:06तुकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेश नहीं है।
01:10यदि तुम वापस जाकर ग्रिहस्त जीवन के शुरवात करो, संतान उत्पर न करो तो हमें रहत मिल सकती है।
01:16साथी वैशा कमावस्य के दिन विधिविधान से पिंडदान जरूर करना।
01:20धर्मवर्ण ने उनके वचन सुन लिये और उनको वचन दिया कि उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा।
01:25ततपशा धर्मवर्ण अपने सांसारे के जीवन में लौट आए और वैशा कमावस्य पर विधिविधान से पिंडदान कर अपने पित्रों को
01:32मुक्ती दिलाए।
01:33वहीं गर्मी में भुने चने को पीस कर बनाये गया सत्तू भी शरीर को शीतलता देता है।
01:37इसले से दिन पित्रों की शांती के लिए सत्तू दान तो जरूर करें।
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