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Vaishakh Amavasya Katha 2026: 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को सतुवाई अमावस्या है. वैशाख अमावस्‍या को सतुआ अमावस्‍या या सतुवाई अमावस्‍या कहते हैं क्‍योंकि इस दिन सत्तू दान करने, सत्तू का सेवन करने का बड़ा महत्‍व है. साथ ही इस दिन दान-पुण्य और पितृ तर्पण करते हैं. भगवान विष्‍णु की पूजा करते हैं, इस दिन पूजा में सतुवाई अमावस्‍या की कथा जरूर पढ़नी चाहिए.Vaishakh Amavasya Katha 2026: Vaishakh Amavasya Ki Katha, Kahani Kya Hai ?#amavasya #amavasyakabhai #amavasya2026 #अमावस्याकबहै #amavasyavidhi #amavasyaupay #amavasyakeupay

~HT.504~PR.111~

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Transcript
00:04वैशाक मास के दोरान पितर पृत्वी लोग पर अपने वन्शचों की निकट आते हैं।
00:55करना एक परंपरा बन गई है।
01:00धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे।
01:02पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण ही हुई है।
01:06तुकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेश नहीं है।
01:10यदि तुम वापस जाकर ग्रिहस्त जीवन के शुरवात करो, संतान उत्पर न करो तो हमें रहत मिल सकती है।
01:16साथी वैशा कमावस्य के दिन विधिविधान से पिंडदान जरूर करना।
01:20धर्मवर्ण ने उनके वचन सुन लिये और उनको वचन दिया कि उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा।
01:25ततपशा धर्मवर्ण अपने सांसारे के जीवन में लौट आए और वैशा कमावस्य पर विधिविधान से पिंडदान कर अपने पित्रों को
01:32मुक्ती दिलाए।
01:33वहीं गर्मी में भुने चने को पीस कर बनाये गया सत्तू भी शरीर को शीतलता देता है।
01:37इसले से दिन पित्रों की शांती के लिए सत्तू दान तो जरूर करें।
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