00:00हॉर्मूज स्ट्रेट को लेकर दुनिया को जिस राहत की उम्मीद थी, वो एक बार फिर तूटती नजर आ रही है।
00:06तेल संकट कम होगा और तनाव घटेगा, ऐसी जो चर्चा चल रही थी, वो अब कमजोर पड़ गई है।
00:12कारण है अमेरिका और इरान के बीच हुई लंबी शान्ती वारता, जो पाकिस्तान के इसलामाबाद में करीब 21 घंटे चली,
00:20लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी।
00:23इस असफल बादचीत के बाद ये सवाल फिर से उठने लगा है कि क्या यूएस इरान टकराव एक बार फिर
00:29तेज होने वाला है।
00:30इस पूरे घटना क्रम में सबसे बड़ा मोड तबाया जब डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने सख्त रुख के संकेद दोबारा देना
00:37शुरू कर दिये।
00:38बादचीत के बीच ही उन्होंने टैरिफ नीती को लेकर चेतावनी दीखी और अब वारता फेल होने के बाद माना जा
00:44रहा है कि उनका टैरिफ प्लैन फिर से सक्रीय हो सकता है।
00:47उनका कहना है कि जो देश इरान को हतियार देंगे उन पर अमेरिका भारी टैरिफ लगाएगा।
00:53ट्रम्प ने साफ कहा है कि ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता
00:59है और इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
01:02इस बयान के बाद अंतराश्ट्रिय व्यापार और राजनीती दोनों में हलचल बढ़ गई है।
01:32अगर चीन इरान को किसी भी तरह का हत्यार सपोर्ट देता है तो उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते
01:38हैं।
01:39ये चेतावनी सीधे तोर पर चीन की आर्थिक और उर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकती है।
01:44असल में पूरा मामला सिर्फ हत्यारों तक सीमित नहीं है।
01:47इरान और अमेरिका के बीच तनाव का सबसे बड़ा केंदर हॉर्मू स्ट्रेट है।
01:52जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार गुजरता है।
01:57तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थ व्यवस्था पर पड़ता है।
02:00यही कारण है कि हर देश इस्थिती पर नजर बनाय हुए है।
02:04रिपोर्ट्स के अनुसार चीन इरान का बड़ा तेल खरीददार है।
02:07और अगर स्ट्रेट बंद या बाधित होता है तो चीन की उर्जा आपूर्ती पर सीधा आसर पड़ सकता है।
02:13इसी वजह से अमेरिका इस पूरे समिकरण में चीन की भूमिका को बेहत गंभीरता से देख रहा है।
02:19डॉनल्ड ट्रम पहले भी कई बार चीन की व्यापार नीती पर सवाल उठा चुके हैं।
02:23चाहे विनिजुएला का मामला हो या वैश्विक तेल बाजार का, हर बार उनका रुख चीन के खिलाफ कड़ा रहा है।
02:30अब इरान संकट ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
02:33दूसरी तरफ इरान अपनी स्थिती को रणनीतिक रूप से मजबूत मानता है।
02:37हॉर्मोस स्ट्रेट को वो अपने लिए एक एहम ताकत के रूप में देखता है।
02:41इसी कारण वो इस क्षेतर में किसी भी भारी दबाव को स्वीकार करने के लिए तयार नहीं है।
02:46इसी बीच ये भी सामने आया है कि संयुक्त राष्टर के प्रतिबंधों और अमेरिका के सेकंडरी सैंक्षन की वजह से
02:53खुला हथियार व्यापार पहले के तुलना में काफी सीमित हो गया है।
02:57हाला कि कई रिपोर्ट्स में ये दावा किया जाता है कि अप्रत्यक्ष रूप से हथियारों की सप्लाई अब भी जारी
03:02रहती है।
03:03कुल मिलाकर स्थिती फिर उसी मोड पर पहुँच गई है जहां कूटनीती और दबाव दोनों साथ साथ चल रहे हैं।
03:10एक तरफ बाचीत की कोशिशे हैं तो दूसरी तरफ टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकी।
03:15अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये तनाव बाचीत से हल होगा या फिर एक नए आर्थिक और
03:20राजनीतिक टकराव की शुरुवात होगी।
03:22फिलहाल दुनिया की नजरें हॉर्मूस स्रेट और अमेरिका, इरान, चीन के इस जटिल समीकरन पर टिकी हुई हैं जहां हर
03:29कदम वैश्विक हालात बदल सकता है।
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