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  • 11 hours ago
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00:00Rath ke bara baje ka wakt tha
00:04Kamalwari ke jangal kinaare rehene wali sunayna
00:07Apene ghar ke anndroonii kumre me
00:09Apene saamne
00:11Eek yagya kund chala kar bäthi hui thi
00:15Kund ke paas
00:16Tantra ki saamakri
00:18Narmund
00:19Aur ek rakt se bharah
00:21Ka tora rakhah hua tha
00:24Sunayna ne yagya kund ke saamne
00:26Kisiki tatswir rakhi thi
00:28Jis par mantra padekar
00:30Voh baar baar rakt ka
00:32Chhidkaav kar rahi thi
00:34Yeh sab karute hui
00:36Uske chahre par eek
00:38Ajeeb si muskahan thi
00:40Maano to
00:41Jiska usne bhoot samayi se antazaar kiya hai
00:44Aur ab
00:45Voh usse milnay waala hai
00:48Yagya kund me saamakri
00:50Đalte ndalte
00:51Usne ka tori me bharah hua rakt
00:54Ab yagya kund me chala diya
00:56Aur apni hathiri pa
00:58Jira laga kar
00:59Yagya kund ke saamne rakhi
01:02Taswir par
01:02Apanne rakt ki boondhe
01:04Tupkai
01:05Aur tbhi
01:07Voh baari hii bhyanak
01:09Aawaz me
01:10Hasne lagi
01:15Bus kuch dayer
01:18Aur bhai hai
01:22Buz ek bár
01:24Mẹ tujh tuk
01:25Pahati jau
01:25Uske baat
01:27तो तेरी उल्टी गिंती शिरू हो जाएगी
01:34एक, दो, तीन, चाल, पाँच, छे, साथ, आठ, नो
01:53इससे पहले की सुनैना आगे कुछ बोलती
01:57उसके दर्वाजे पर ठक ठक की आवाज होती है
02:02सुनैना, यग्यकुंड की आग बुझा कर
02:05हस्ती हुई दर्वाजा खोलने के लिए जाती है
02:09तो देखती है, कि दर्वाजे के बाहर
02:12जमिनदार के लोग खड़े है
02:15इतनी रात को तुम्हें परशान करने के लिए
02:17माफी चाहते हैं, लेकिन मालिक का हुकम है
02:20कि तुम्हें हवेली लेकर आए जाए
02:22जमिनदार बाबु तुम्हारा नृत्य देखना चाहते है
02:26सुनैना के नृत्य को तो हर कोई देखना चाहता है
02:29But you don't think that you will be the time more than that?
02:33The night of twelve,
02:35the way of hunting and hunting
02:37is the way to go.
02:39Look, your fault has been our fault.
02:42Our fault has been our fault.
02:46Your fault has been our fault.
02:47We will not have to go.
02:48You will just our fault.
02:49Our fault has been our fault.
02:51We will see our fault for being our fault.
02:54The fault is our fault.
02:56Your fault has been our fault.
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06:09I'll see you in the next one.
06:38But in the middle of the house, there was no one who was not.
06:44At the time of 12, he had a good friend of mine.
06:50He had a good friend of mine and had a good friend of mine.
06:52He had a good friend of mine and had a good friend of mine.
07:01उसने शम्शान घाट के बाहर दोनों कोनों पर अपने रक्ट से अविशेक किया और अंधर चली गई
07:09उसने वहाँ यग्यकुंड जलाया और मंत्र बुद्बुदाते हुए उत्रित आत्माओं का आवाहन करना शुरू किया
07:18उसने अपने जोले से एक छोटी मिट्टी की हांडी निकाली और उसे यग्यकुंड के पास रख दिया
07:26मंत्र बुद्बुदाते बुद्बुदाते अचानक उसे अपने काम में एक साथ अनेकों आत्माओं की सुस्फुसाहट सुनाई थी
07:35तभी देर ना करते हुए उसने अपने जोले से बली के लिए लाए हुई मुर्गी को निकाला जिसके मूँ और
07:44पंजो को उसने बांधा हुआ था
07:46बिना एक भी पल देरी किये उसकी आहुती देदी
07:51तभी यग्यकुंड से धड़कती हुई आपकी लपने अच्चानक तेज हो गई
07:56और वहाँ पर चलने वाली हवा ने भी अच्चानक से एक भयंकर तुफान का रूप ले लिया
08:04यग्यकुंड पास रखी वो हांटी जोर जोर से हिलने लगी
08:09जैसे तो मानों वहां की अत्रिप तादमाएं उसके अंदर समा रही हो
08:17लगभा कुछ देर तक इसी तरह वहां भयानक हल चल होती रही
08:22और कुछ देर बाद वो हांटी और वो तेज हवा बलकुल शान्थ हो गई
08:28उसी वक्त सुनैना ने एक काले कपड़े से हांटी को ढखकर एक रसी से बांदिया
08:36और उसे अपने जोले में रखकर वापस हवेली की तरह आ गई
08:41हवेली के पिछले दर्वाजे की चौखट पर उसने उस हांटी को गाड़ दिया
08:47और लगबाग ढ़ाई बचे वापस अपने कमरे में जाकर लेट गई
08:53आज से वो सब कुछ शुरू होगा जिसका मैंने इतने साल इंतुजार किया है
09:05सुनैना की आँखों से नीन तो मानो खायब हो चुकी थी
09:10अपने हाथ में जमिनदार की वही तस्वीर देखती हुई वो मुस्कुराए जा रही थी
09:16जमिनदार अपने कक्ष में अपनी पतनी के साथ सोया हुआ था
09:22तभी उसे लगा कि मानो उसके कान में आकर किसी ने कुछ फुस फुस आया
09:28उसे इसमें पैरों पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ
09:35किसी ने उसकी चादर को जोर से खीचा और तभी डर के मारे जमिनदार की आँख खुल गई
09:44जमिनदार ने इधर उधर देखा लेकिन सामने कोई दिखाई ही नहीं दिया
09:50तभी जमिनदार ने अपनी पतनी की तरफ देखा लेकिन पतनी का चेहरा देखकर जमिनदार की रूप काम गई
09:59उसके पद्मी का चहरा पूरी तरह गल चुगा था
10:04और उसके चहरे का मांस लटक कर मौम की तरह पिगल रहा था
10:10और उसकी आँखों की पुतलियां पूरी काली हो चुकी थी
10:16कमला के चहरे की वो भयानक मुस्कान देखकर
10:20जमिनदार खुद को समभाल नहीं पाया
10:23और जोर से चलाया तब ही अचानक कमला का वो भयानक चहरा
10:29जमिनदार के सामने से खायब हो गया
10:32और पती की चीक से खबरा कर कमला की आँख खुल गई
10:37क्या हुआ? क्या हुआ आपको? इस तरह चलाएं क्यों आप?
10:44कुछ नहीं बुरा सपना देख लिया था तो अंधेरे में ब्रहम हो गया
10:49तुम सोजा, सोजा
10:52जमिनदार का मन अब बेचैन हो चुका था
10:55जो भी उसने देखा
10:57उसके डर के मारे उसको अब नींद नहीं आ रही थी
11:01वो अपने बिस्तर पर बार बार करवटें बदल रहा था
11:06जमिनदार ने दिवार की तरफ अपना चहरा किया
11:11तब ही उसे लगा
11:12कि दिवार के कोने में खड़े होकर
11:15कोई बड़ी ही तुक भरी आवाज में विलाप कर रहा है
11:21किसी के सिसकने और कराने की आवाज
11:24जमिनदार के कालों में पड़ रही थी
11:26जो अंधेरे में उस दिवार से चिपका हुआ
11:30साफ दिखाई दे रहा था
11:34धीरे धीरे करके वो काली पर चाई
11:36जमिनदार के पास आती जा रही थी
11:39और उसका चहरा अब और जादा भयानक होता जा रहा था
11:44उसके मूँ से टपकता वो लाल खून देखकर
11:48जमिनदार के खोश उड़ गए थे
11:51वो इस हद तक डर चुका था
11:53कि उसकी आवाज भी अब उसके गले में दपकर रह गए थी
11:57वो चाकर भी चिला नहीं पा रहा था
12:01तब ही धीरे धीरे आगे बढ़ता वो काला साया
12:05अच्छानक ही उसके सामने आकर खड़ा हो गया
12:10और अपनी गर्दन को मरोडने लगा
12:13जमिनदार ने हिम्मत करके कमला की तरफ देखा
12:18लेकिन अब फिर से वहाँ कमला नहीं थी
12:22कमला का चहरा उसी भयानक चहरे में बदल गया था
12:27जमिनदार अब और जादा बरदाश्ट नहीं कर सकता था
12:32वो सोर से चलाया लेकिन उसके गले से आवाज ही नहीं निकली
12:37तभी वो हरबड़ा कर उठा और देखा
12:41कि कमरे में ना तो कोई काला साया है
12:44और ना ही कमला का रूप बदला हुआ है
12:49ये ये सब क्या हो रहा है
12:51ऐसा लग रहा है जैसे कोई हत्रिप दात्मा हमारे पीछे पड़ गई है
12:56जमिनदार की नें दबोड चुकी थी
12:59उसने अपने बिस्तर पर बैठे हुए
13:02मंत्रों का उचारण करना शुरू किया
13:05धीरे धीरे कमरे का वातावरन कुछ शान्त हुआ
13:10लेकिन तभी जमिनदार को अपनी खिड़की से
13:14खट-खट की आवाज सुनाई दी
13:18जमिनदार का कमरा पहली मन्जल पर था
13:22इसलिए कोई चाहकर भी उसके खिड़की को बाहर से खट-कटा नहीं सकता था
13:28खिड़की पर एक बड़ी भयानक पर चाई साफ दिखाई दे रही थी
13:34डर से जमिनदार का पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था
13:39वो भस सब खट की रक्षा करने के लिए मंत्रों का उचारण किये जा रहा था
13:45लेकिन कोई न कोई हलचल जमिनदार को बार-बार विचलित कर रही थी
13:52आधी रात के पहर से सूरज उगने तक वो मंत्रों का उचारण करता रहा
13:58सुभे बोजन करने के लिए जब वो अपनी पतनी के साथ खाना खाने के लिए बैठे
14:05तो उनके सामने उनकी धाली में उनका कता हुआ सर था
14:10जो उसे देखकर भयानक तरह से मुस्कुरा रहा था
14:16तेरी मत अब तेरे सामने आगई है
14:19तड़प तड़प कर मरेगा तो
14:22और आध तजे बचाने वाला भी कोई नहीं होगा
14:30अपनी एकों के सामने ये सब देखकर
14:33जमीनदार ने खाने की ठाली को दूर फिंग दिया
14:37और बागलों की तरा चिलाता हुआ
14:40वहां से भागने लगा
14:43जमिन्दार की ऐसी हालत देखकर सुनैना के चहरे पर एक अलग ही मुस्कान आ चुकी थी
14:51जमिन्दार भागता हुआ अपने कक्ष में गया
14:54जहां सामने ही एक बड़ा आइना लगा हुआ था
14:57लेकिन जैसे ही उसने आइने में खुद को देखा
15:01तो उसके पीछे नजाने कितनी अत्रिप दात्माए देरा जमाकर खड़ी हुई थी
15:09दर के मारे जमिन्दार का पूरा शरीर खाँ अपने लगा था
15:14उसने अपने खक्ष के शिशे को तोड़ डाला
15:18और उन कांस के टुकडों से खुद पर वार करने लगा
15:23कमला दोड़ती हुई कमरे में आई और जमिन्दार की हालत देखकर खबरा गई
15:29उसने जमिन्दार के हाथ से कांच का टुकडा चीना
15:33और उसे शांत करके बिस्तर पर बैठाया
15:37हमें कल रात से ही आपकी हालत ठीक नहीं लग रही है
15:41हम तांतरिक बाबा को बुलाते हैं
15:44कुछ ना कुछ जरूर घटा है आपके साथ
15:47तभी कल रात से आपका व्यवहार इतना अजीब हो गया है
15:52मेरी मौत मेरे सामने आ गई है कमला
15:54मैं बहुत जल्द मरने वाला हूँ
15:56कोई मुझे बचानी सकता
15:58तुमने नहीं लेकिन मैंने देखा
16:00कितनी सारी हत्री प्तात्मा है मेरे साथ
16:03और हरू वो सब मुझे ले जाने के लिए आई है
16:08जमिनदार को देखकर
16:10कमला की आँखों में आँसु आ गए थे
16:12और वहां समेना के हाथों में एक तस्वीर थी
16:17जिसे देखकर उसकी आँखे भर आई थी
16:20तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो
16:24तुम्हारा बचला मैं लेकर रहूंगी
16:26अभी तो बस चुरुआत है
16:29इसे अपनी आँखों के सामने तडपते हुए देखूंगी मैं
16:33और जब तक ये तडप तडप कर
16:35मेरे सामने अपना दम नहीं तोड़ देगा
16:38तब तक सुकून नहीं मिलेगा मुझे
16:42अपने किये की जज़ा भुकते का अब
16:44हर बीटे दिन के साथ
16:47अब जमिनदार की हालत
16:49खराब होती जा रही थी
16:51अपने पास भटकती हर आत्मा को
16:54जमिनदार अपने सामने देख रहा था
16:57वो अपने आखे बंद करके
16:59अपने कक्ष के कोने में दुबक कर
17:02बैठ गया था
17:04उसके चहरे का मांस खायब हो गया था
17:07और उसकी हड़ियां भी
17:09अपसाफ उभर कर दिखने लगी थी
17:12आँखों के नीचे
17:14काले गड़े हो चुके थे
17:16और अपने बालों को
17:18नोचते हुए
17:19वो हर समय कुछ न कुछ बरबडाता रहता था
17:24मैंने तुमारा क्या बिगाड़ा है
17:26मेरा पीछा छोड़ दो तुम
17:29मैं मरना नहीं चाता
17:31कमला मुझे बचा लो
17:32ये सब मुझे अपने साथ ले जाएंगे
17:35कमला
17:36कमला ये मार डालेंगे मुझे
17:38ये मुझे मार डालेंगे
17:42उसकी ऐसी हालत और आखों का डर
17:45कमला को और ड़रा रहा था
17:47जमिनदार की बातें सुनकर
17:49कमला की भी आत्मा काँप रही थी
17:53कमला समझ चुकी थी
17:55कि उसके पती के साथ कुछ जरूर खटा है
17:59इसलिए कमला ने देर न करते हुए
18:02एक तांत्रिक बाबा को हवेली में बुलाया
18:07बाबा जी अचानक से न जाने इन्हें क्या हो गया है
18:11कुछ दिनों पहले ये बिलकुल ठीक थे
18:14लेकिन पिछले एक हफते से
18:17इनका बरताव कुछ अजीब सा हो गया है
18:19कह रहे हैं कि कोई इन्हें मारना चाहता है
18:23कही सारी अत्रिक तात्माएं इनके पीछे पड़ गई है
18:27अब तो आप ही इसका कोई निवारन कीजिए बाबा जी
18:32जमिनदार बाबु का कथन बिलकुल उचित है
18:34खर में अत्रिक तात्माव का भास हमें भी हो रहा है
18:37हम प्रांगण में एक सुरक्षा घेरा बनाएंगे
18:40और आपको इस घेरे के भितर जमिनदार बाबु को लेकर आना होगा
18:45तभी हम आगे कुछ कर पाएंगे
18:46Baba Ji نے Hveli के प्रांगण में एक सुरक्षा घेरा बनाया
18:52और वहाँ यज्यकुंड बनाकर पूजा की सामगरी रखकर बैठ गए
18:59कमला कुछ लोगों के साथ जमिनदार को वहाँ लेकर आई
19:03लेकिन सामने यज्यकुंड को देखकर जमिनदार जोर जोर से चिलाने लगा
19:13तू इसे कभी नहीं बढ़ा पाएगा तांत्रेक
19:17इसने जो पाप किया है उसकी सजा ये बुकतेगा
19:22और अगर तू भीट में आया तो तेरे लिए भी ठीक रही होगा
19:28बाबा जी अपने दिव्य द्रिष्टी से जमिनदार के पीछे पड़ी सभी अत्रिपत आत्माओं को देख रहे थे
19:35एक बार को तो इतनी आत्माओं को देख कर बाबा जी भी भाई से काप उठे
19:41पर वो अपने कर्जब्य से पीछे नहीं हट सकते थे
19:46उन्होंने अपनी हतेली पर अपने कमंडल से जल लिया और जमिनदार के उपर छिड़कने लगे
19:54लेकिन तभी वो आत्माओं और आकरामक हो गई
19:58पूरे हवेली की दिवारें धर से चीक उठी
20:04यग्यकुंड में जल रही आग की लप्टें खुद बखुद बुजने लगी
20:08हवेली के प्रांगन में आती सूरज की रोश्नी को भी मानो बादल ने ठक दिया
20:15बाबा जी बार बार यग्यकुंड में अगनी प्रज्वलित करने का प्रयास कर रहे थे
20:21लेकिन लाग कोशिश करने के बाद भी अगनी जल ही नहीं पा रही थी
20:27जमिदार का चहरा अब धीरे धीरे बदलने लगा
20:30उनका जो चहरा किसी हड्डियों के ढाचे जैसा लग रहा था
20:35अब धीरे धीरे उनके शरीर की एक एक नस उभर कर दिखाई देने लगी
20:42उनकी आँखों की पुदलियां पलट कर बेलकुल सफेद हो चुकी थी
20:47और वो सभी को देखते हुए बड़े ही भयानक तरीके से मुस्कुरा रहा था
20:54कहा था ना तुझे कि नहीं पचा पाएगा इसे
20:58लेकिन तूने हमारी बात नहीं सुनी
21:01बोला था कि इसे बचाने की कोशिश करेगा तो तू भी मारा जाएगा
21:07इस सम्मिंदार का अंत होना तो निश्चित है
21:10लेकिन उससे पहले अब तेरा अंत होगा
21:16बाबा जी खुद को बचाने के लिए डरते हुए मंत्रों का उचारन करने की कोशिश कर रहे थे
21:22लेकिन अपनी लड़कडाती आवाज में वो कोई भी मंत्र उचारित करे नहीं पा रहे थे
21:30तभी हवेली के प्रांगण में गहरा अंधेरा चाने लगा
21:34जैसे तो हवेली के हर एक कोने में उन अत्रिपतात माओं ने अपना डेरा बना लिया हो
21:42वहाँ एक तेज हवा चली और बाबा जी जो सरक्षा घेरा बना कर उसके भीतर बैठे थे वो भी अब
21:52तूट गया
21:53तभी हवेली की छट पर लगा जूमर अचानक तूट कर बाबा जी के ऊपर आगिरा
22:00और मौके पर ही उनकी मौत हो गई
22:04उन्हें देखकर जमिंदार अनेकों भयानक आवाजों में जोर-जोर से हसने लगा
22:14काता काता इसे के मताबीत में अब मारा गया ना
22:25आखिर कौन हो तुम मेरे पती ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा
22:30क्यों उनके जीवन के पीछे पड़ गए हूँ
22:34मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती हूँ
22:37मेरे पती के जीवन को बक्ष दो
22:40इसके जीवन का अंत तो पहले ही निश्चित किया जा चुका है
22:45इसे कोई नहीं बचा सकता और हाँ यह जो भी इसके साथ हो रहा है
22:52इसकी वज़ा से ही हो रहा है
22:54अब अगर कोई भी से बचाने के लिए पीछ में आया
22:58तो उसका हाल भी वही होगा जो इस्तांत्रिक का हुआ है
23:04जमिंदार का रूप और किसी खौंखार पिशाच के जैसे हो गया था
23:08पात्माओं का प्रकोब देखकर हवेली के सभी लोग और नौकर
23:14अपनी चान बचाने के लिए वहां से भाग गए
23:19अकेली कमला ही थी जो अपने पती की ऐसी हालत देख रही पा रही थी
23:24और उन्हें देख देखकर बस विलाब किये जा रही थी
23:29और अवेली के कोने के कमरे में खड़ी हुई सुनैना के चेहरे पर एक अलग ही मुसकान थी
23:36अब तेरा आखरी समय है जमिंदार
23:40तांत्रिक तो मर गया अब तेरी बारी है जब तुझे बचाने वाला ही खुद को नहीं बचा पाया
23:49तो तू कैसे बच पाएगा
23:51सुनैना में कमरा बंद किया और कमरे के बीचों बीच एक चार लौ का दीब चलाया
23:58उसके भीतर उसने अपने रक्त और ताले दिल का छिड़काव किया
24:04उसने वहाँ जमिंदार की तस्वीर रखकर एक पूझा करनी आरंब की
24:10वो जैसे जैसे अंदर मंत्रों का उचारन करती जा रही थी
24:15वैसे वैसे जमिंदार बाहर तडपता जा रहा था
24:20उसके शरीर का एक एक अंग अपने आप मुड रहा था
24:24और उसकी अड्डियों के टोटने की आवाज पूरे हवेली में साफ सुनाएगे रही थी
24:31उसके दर्थ की चीखों से गमला का दिल बैठा जा रहा था
24:36और हवेली की एक दिवार दहल उठी थी
24:39उसकी तडपती हुई चीखों की आवाज सुनकर सुनेना के दिल को बहुत सुकून मिल रहा था
24:47अंगिनत पत्रित दादमाओं ने जमिंदार को जकड़ा हुआ था
24:52कमला का रो रोकर बुरा हाल हो चुका था
24:56तभी जमिंदार ने बड़े ही भयानाक आवाज में कमला से कहा
25:02अपनी आखों के आसों पोचों कमला और इसे आखरी बार अच्चे से देख लो
25:09क्योंकि इसके बाद ये अपनी अंतिम सांस लेगा
25:25उन अत्रित तात्माओं ने जमिंदार के शरीर को कस कर जखड़ा
25:30और जमिंदार ने अपने ही हातों से अपने ही करदन को मरोर डाला
25:36और उसी वक्त निढाल होकर जमेन पर गिर पड़ा
25:42सुनैना के सामने जल रहे दीपक की लौ भी बुच गई
25:46और सामने रखी समिंदार के तस्वीर खुद बखुद जल कर राख हो गई
25:52तभी सुनैना के आखों में भी आँसु आ गए
25:58और वो अपना जोला उठा कर हवेली से प्रस्थान कर सीधी अपने घर पर जा पहुँची
26:05वो अपने कमरे में बैठी एक तस्वीर को देखते हुए आसु बहा रही थी
26:21सुनैना अपने हाथों में जिस तस्वीर को पकड़ कर रो रही थी
26:25वो तस्वीर और किसी की नहीं बलकि उसकी मा की ही थी
26:29जो सालों पहले उसी काओं की नचनिया थी
26:34सुनैना की मा मायावती जमिंदार के हवेली में ही रहती थी
26:40मायावती तुमसे अच्छा नित्य तो कोई नचनिया करी नहीं सकती
26:44हमारे हवेली में इतनी नचनिया हमारे समख शाकर अपना नित्य बेश करती है
26:51परन तो हमारे दिल को कोई मुह पाता है तो वो केवल तुम्हारा नित्य है
26:58زمیندار مایا وطی کو ایک الگ ہی نظر سے دیکھتا تھا
27:02مایا وطی بلا کی خوبصورت تھی
27:06اسی لیے زمیندار کا دل اس پر محط تھا
27:09زمیندار نے مایا وطی کو رہنے کے لیے ایک جگہ دی تھی
27:14جہاں چھپ چھپ کر وہ اس سے ملنے جایا کرتا تھا
27:19اور دونوں کے بیچ ایک پریم کا سمند بن گیا تھا
27:24زمیندار بابو آپ کتنے سمیں سے کہہ رہے ہیں
27:27کہ آپ مجھ سے ویباہ کریں گے
27:30پرانتو اب تو بہت سمیں بیٹ گیا
27:33بتائیے نا آپ کب مجھے سب کے سمکش
27:36اپنی پتنی کے روپ میں سویکار کریں گے
27:40ارے تم تو ابھی بھی میری پتنی ہو مایا وطی
27:43لیکن تم چنتہ مت کرو
27:44تمہیں میں جلد ہی اپنی دلہنیاں بناوں گا
27:47تم بس مجھ پر بھروسہ رکھو
27:51زمیندار مایا وطی سے جھوٹے وعدے کرتا رہا
27:54اور اسے اپنے پریم کے جال میں فسا کر رکھا
27:57تب ہی ایک رات
27:59زمیندار پھر سے مایا وطی کے پاس
28:02اس سے ملنے گیا
28:04تو دیکھا
28:05کہ مایا وطی کے چہرے پر
28:07ایک الگ ہی چندہ ہے
28:09کیا ہوا مایا وطی
28:11تم اتنی چندت کیوں ہو
28:13زمیندار بابو
28:15اب ہمارے ویباہ کا سمیں آ گیا ہے
28:17میں گرب سے ہوں
28:19اب آپ مجھ سے ویباہ کر لیجے
28:21ورنہ میری بہت بدنامی ہوگی
28:25کیا
28:26تم گرب سے ہو
28:27ایسا کیسے ہو سکتا ہے
28:29نہیں نہیں ایسا نہیں ہو سکتا
28:31تم اپنی آوکات بھول رہی ہو مایا وطی
28:34کہ تم صرف ایک راستوں پر نرد دکھانے والی نچنیا ہو
28:38تم کبھی بھی میری پتنی نہیں بن سکتی
28:40میرے پیروں کی دھول کے برابر بھی نہیں ہو تم
28:43اور تم کہہ رہی ہو
28:45کہ تمہارے پیٹ میں میری سنتان ہے
28:46نہیں
28:47یہ کبھی میری ہو ہی نہیں سکتی
28:50بدنام کرنا چاہتی ہو مجھے
28:52اور چاہتی ہو کہ تمہیں میری دولت مل جائے
28:55لیکن میں ایسا کبھی نہیں ہونے دوں گا
28:58کیا
29:00اس کا مطلب
29:01آپ نے مجھے کیول اپنے مدورنجن کا ایک سامان سمجھا
29:06اور میں نہ سمجھ
29:08اسے آپ کا پریم سمجھتی رہی
29:12آپ نے مجھے ٹھکرایا ہی نہیں ہے زمیدار بابو
29:17بلکہ میرے چرتر پر بھی داک لگایا ہے
29:21آپ نے مجھے کسی لائک نہیں چھوڑا
29:24میں آپ کا سچ
29:25سب کے سامنے لا کر رہوں گی
29:29اپنی زندگی اس طرح برباد نہیں ہونے دوں گی میں
29:33تم میرا کچھ نہیں بگاڑ پاؤگی
29:35اور اگر تم نے یہ کوشش بھی کینا
29:37تو انجام تمہارے لئے اچھا نہیں ہوگا
29:40آج کے آج یہ گاؤں چھوڑ کر چلی جاؤ
29:42ورنہ نہ تو میں تمہیں چھوڑوں گا
29:45اور نہ ہی تمہارے پیٹ میں پل رہے تمہارے بچے کو
29:48مار کر کسی جنگل میں فکوا دوں گا نا
29:50تو کبھی کسی کو تمہارا شب تک نہیں ملے گا
29:53جنگلی جانور نوچ کر ختم کر دیں گے تمہیں
29:56اپنی اور اپنی سنتان کی جان بچانا چاہتی ہو
29:59تو اس گاؤں سے اتنی دور چلی جاؤ
30:02کہ کبھی ٹھونڈنے پر بھی نہ دکھائی تو ورنہ
30:05زمیندار کی باتوں سے مہیا وطی ساپ سمجھ گئی تھی
30:09کہ اگر وہ یہاں سے نہیں گئی
30:11تو زمیندار سچ موچ اسے اور اس کی ہونے والی سنتان کو
30:16دنیا میں آنے سے پہلے ہی ختم کر دے گا
30:20اسی لئے وہ اپنا سارا سامان
30:23اور جو گہنے اسے زمیندار نے بھیٹ سوروب دیئے تھے
30:26انہیں لے کر راتوں رات وہاں سے بہت دور ایک گاؤں
30:31کملواری کے جنگل کنارے میں آ کر بس گئی
30:34اس کے پاس زمیندار کا دیا ہوا کچھ دھن تھا
30:37جس سے اس نے ایک گھر بنوایا
30:40اور اسی گھر میں اپنی بیٹی سنینہ کو جنم دیا
30:44لیکن جو زمیندار نے اس کے ساتھ کیا
30:47اس کے کارن وہ سماج میں کبھی کسی سے نظریں نہیں ملا پائی
30:52اور نہ ہی اسے کسی نے اپنایا
30:56مایوٹی کے من میں زمیندار کے پرتی آکروش تھا
30:59بچپن سے ہی اس نے اپنی بیٹی کو اس کے ساتھ
31:03گھٹت زمیندار کے سندھرب میں کچھ بتایا
31:06تاکہ ایک سمیہ ایسا ضرور آئے
31:09جب اس کی بیٹی اس کے ساتھ کی ایک بدلہ
31:12زمیندار سے ضرور لے
31:14دھیرے دھیرے سنینہ پڑی ہوئی
31:16اور اس کے من میں زمیندار کے لیے وہ آکروش
31:21اور بڑھتا گیا
31:23تم چنتہ مت کرو ما
31:25اس زمیندار سے تمہیں بدلہ لے کر رہوں گی
31:29اس نے تمہیں اپنے پیروں کی دھول سمجھا تھا نا
31:32اسی دھول میں ملا کر رکھتوں گی میں اسے
31:35ایسا حال کروں گی اس کا
31:37کہ کوئی بھی اسے بچا نہیں پائے گا
31:40کچھ سمائے بعد
31:41مایہ وطی یہ دنیا چھوڑ کر چلی گئی
31:44اور سنینہ نے
31:46زمیندار کا انت کرنے کے لیے
31:48تندر کا سہارہ لیا
31:50تاکہ وہ زمیندار کو
31:52تڑپا تڑپا کر
31:53اپنی آنکھوں کے سامنے مرتا ہوا دیکھ سکے
31:57میں جانتی ہوں
31:59کہ اب مجھے کوئی نہیں بچا سکتا
32:02وہ آتمای
32:03اب مجھے بھی اپنے ساتھ لے کر جائیں گی
32:06لیکن میں سنتوشت ہوں
32:08کہ میں نے تمہارا بدلہ لیا ما
32:11اب میں سکون سے مر پاؤں گی
32:14اچانک
32:15سنینہ کی آواز لڑکھڑانے لگی
32:18اس نے اپنے ہاتھوں میں
32:19جو اپنی ماں کی تصویر پکڑی ہوئی تھی
32:22وہ بھی اس کے ہاتھوں سے چھوٹ کر
32:25نیچے گر پڑی
32:26وہ اتریپت آتمای
32:28سنینہ پر ہاوی ہو گئی
32:30اور اس کا شریر
32:32بری طرح سے تڑپنے لگا
32:34اس کی آنکھیں پلٹ کر
32:36اوپر کو ہو گئی
32:38وہ اپنے ہی شریر کو
32:40توڑنے مڑوڑنے لگی
32:41اور اس کے ناک اور کان سے
32:44خون بہنے لگا
32:46اور کچھ ہی دیر میں
32:48اس نے اپنا دم توڑ دیا
32:51سنینہ نے
32:52اپنی ماں کا بدلہ لینے کے لیے
32:54تنتر کا سہارا لیا تھا
32:56اور تنتر
32:58کبھی کسی کا سگا نہیں ہوتا
33:01جو بھی تنتر سادھنا کر کے
33:03کسی کی مردیو کا آواہن کرتا ہے
33:06تو وہ اتریپت آتمایں
33:08اسے بھی ہمیشہ کے لیے
33:10اپنے ساتھ لے جاتی ہے
33:12سنینہ
33:13یہ سب پہلے سے ہی جانتی تھی
33:16اس لیے سمیندار کی مردیو کے بعد
33:18وہ اپنے انتیم سمائے کے لیے
33:21اپنے گھر واپس آئی تھی
33:23کہتے ہیں
33:24آج بھی اس گھر میں
33:25سنینہ کی آتما
33:27بھٹکتی ہے
33:28اور آز پاس رہنے والے لوگوں کو
33:30آج بھی رات کے سمائے
33:33اس گھر سے گاین اور نرتی کرتی ہوئی
33:36سنینہ کے گھنگروں کی آواز
33:38ساپ سنائی دیتی ہے
33:42دوستوں
33:42اگر یہ کہانی آپ کو پسند آئی ہو
33:44تو ہمیں سبسکرائب کریں
33:45اور آپ کے پاس بھی ہے
33:47کوئی ایسی ہی ڈراؤنی کہانی
33:48تو ہمیں ای میل کریں
33:49ہم آپ کی کہانی پر
33:50بھی ویڈیو بنانے کی کوشش
33:51ضرور کریں گے
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