00:03भारत को अक्सर ग्यान की भूमी कहा जाता है वेद उपनशद पुरान सब सार्जनिक रूप से पूछनी हैं लेकिन क्या
00:09आप जानते हैं इसी परंपरा में कुछ ग्रंथ ऐसे भी थे जिनका नाम लेना तक बरजित माना गया था इसलिए
00:14नहीं कि वो आधार्मिक थे बलकि इस
00:30श्यास्त्रों में ग्यान को तीन स्तरों में रखा गया है सामाने जन के लिए दिप्षित साधकों के लिए और केवल
00:37गूरू की अनुमती से तीसरे स्तर के ग्रंथ ही कहलाए निशिद्ध ग्रंथ इतिहास में कुछ टेणिया स्पष्ट रूप से मिलती
00:43हैं अर्थत्व वे�
00:57तंत्र योगनी तंत्र इनमें शक्ती चेतना और इंध्रियों पर सीधा कारे बताये गया है इसलिए इन्हें सारुजनिक नहीं किया गया
01:04उपनिश्टों के गुप्त अर्थ उपनिशत खुले थे लेकिन उनके अर्थ नहीं अर्थ केवल गुरू संकेत मौन या प्रतीक के मा�
01:13के कारण है पहला दुरुपयों कब है हर शक्ती जिमिदारी मांगती है बिना अनुशासन ग्यान एहंकार में बदल जाता है
01:19दूसरा मांसिक अस्थरता कुछ ग्रंथ सीधे शुनिता मृत्यों और आत्म विलय पर बात करते हैं हर मन इसे सहन नहीं
01:27कर सकता और तीसरा सामाजि
01:33पहले तोड़ सकते हैं निशिद ग्रंथ कभी नश्ट नहीं किये गए वो संरक्षित किये गए गुरु तै करता था शिशे
01:40की परिपकवता उसका उदेश और उसका एहंकार तभी ज्यान आगे बढ़ता था इसलिए कहा गया ग्यान दिया नहीं जाता योगिता
01:47से जाकता है
01:48आज ग्रंथ मिल जाते हैं PDF, अनुवाद, वीडियो, सब कुछ में लेकिन जो नहीं मिलता वो है दृष्टी और बिना
01:55दृष्टी ग्यान केवल सूचना है अनुभव नहीं इसलिए वास्तविक अर्थ आज भी सीमित है निशिद ग्रंथ डर के कारण नहीं
02:01चुपाए गए
02:02वो चुपाए गए बानव की सीमाओं को समझ कर भारती धर्म में ग्यान को कभी रूका नहीं बस इतना कहा
02:07गया पहले स्वयम को स्थर करो फिर सत्य को चुछो और जो ग्यान आपको मौन कर दे शायद वही कभी
02:13निशिद था तो दोस्तों आपको ये जानकारी कैसे लगी कॉ
02:17समय होते वीडियो को लाइक, शेर और चैनल को सब्सक्राइब सरूर करें
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