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At this very moment, a small spacecraft is drifting through the cold silence of interstellar space—over 24 billion kilometers away from Earth.
Launched in 1977, long before smartphones, the internet, or GPS, this machine is still alive, still functioning, and still sending signals back home.
This is the story of **Voyager**—the most distant human-made object in history.
In this cinematic three-part documentary series, we explore a mission that transformed our understanding of the universe forever.
**Part 1** reveals how a rare, once-in-a-lifetime planetary alignment led to the most ambitious journey in human history—and what Voyager discovered at Jupiter that shocked scientists around the world.
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### 🔍 In This Episode:
* The **175-Year Alignment** – A rare planetary positioning discovered by NASA engineer Gary Flandro
* The **Gravity Assist (Slingshot Effect)** – How Voyager gained speed using planetary gravity
* The **Nuclear Heart (RTG)** – How Plutonium-238 powers Voyager in deep space
* The **22-Hour Communication Delay** – The challenge of sending signals across billions of kilometers
* The **Golden Record** – A message from Earth carrying sounds, languages (including Hindi), and our location
* **Jupiter’s Discoveries** – Great Red Spot, volcanic Io, and Europa’s hidden ocean
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### 📚 Sources & Further Reading:
* The Voyager Interstellar Mission — R. L. Heacock (IEEE, 1980)
* Gravitational Assist — Gary Flandro (NASA JPL Archives)
* Volcanism on Io — B. A. Smith et al. (Science, 1979)
* Europa Ocean Evidence — NASA Data
* The Golden Record — Carl Sagan & NASA
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### ✦ Disclaimer ✦
This video is for educational purposes only.
All images and footage belong to their respective owners and are used under fair use for education, commentary, and research.
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At this very moment, a small spacecraft is drifting through the cold silence of interstellar space—over 24 billion kilometers away from Earth.
Launched in 1977, long before smartphones, the internet, or GPS, this machine is still alive, still functioning, and still sending signals back home.
This is the story of **Voyager**—the most distant human-made object in history.
In this cinematic three-part documentary series, we explore a mission that transformed our understanding of the universe forever.
**Part 1** reveals how a rare, once-in-a-lifetime planetary alignment led to the most ambitious journey in human history—and what Voyager discovered at Jupiter that shocked scientists around the world.
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### 🔍 In This Episode:
* The **175-Year Alignment** – A rare planetary positioning discovered by NASA engineer Gary Flandro
* The **Gravity Assist (Slingshot Effect)** – How Voyager gained speed using planetary gravity
* The **Nuclear Heart (RTG)** – How Plutonium-238 powers Voyager in deep space
* The **22-Hour Communication Delay** – The challenge of sending signals across billions of kilometers
* The **Golden Record** – A message from Earth carrying sounds, languages (including Hindi), and our location
* **Jupiter’s Discoveries** – Great Red Spot, volcanic Io, and Europa’s hidden ocean
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### 📚 Sources & Further Reading:
* The Voyager Interstellar Mission — R. L. Heacock (IEEE, 1980)
* Gravitational Assist — Gary Flandro (NASA JPL Archives)
* Volcanism on Io — B. A. Smith et al. (Science, 1979)
* Europa Ocean Evidence — NASA Data
* The Golden Record — Carl Sagan & NASA
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### ✦ Disclaimer ✦
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TechTranscript
00:00अभी इस वक जब तुम ये वीडियो देख रहे हो ना, तो एक छोटा सा स्पेस्क्राफ्ट है जो हमारी धर्ती
00:05से 24 अरब किलोमीटर से भी जादा दूर अकेला भागा जा रहा है
00:09और सबसे पागल कर देने वाली बात ये है कि ये स्पेस्क्राफ्ट आज से 47 साल पहले 1977 में लॉंच
00:16किया गया था
00:16जब ना कोई स्मार्टफोन था, ना इंटरनेट था, ना जीपिएस था और ना ही कोई ऐसी टेकनॉलोजी थी जो आज
00:22हम डेली यूज़ करते हैं
00:24और फिर भी ये मशीन आज तक जिन्दा है और प्रत्वी पर सिगनल भेज रही है, जो कि लिटरली किसी
00:29चमतकार से कम नहीं है
00:31इसका नाम है वॉयजर और ये इनसानों की बनाई हुई सबसे दूर पहुचने वाली चीज है
00:35अब वॉयजर की कहानी इतनी लंबी, इतनी डीप और इतनी माइंड ब्लोइंग है
00:40कि मैंने डिसाइट किया है कि इसे एक वीडियो में नहीं बलकि तीन पार्ट्स की सीरीज में कवर करूँगा
00:45ताकि हर चीज डीटेल में और आराम से समझा सके
00:48ये है पार्ट वन, जिसमें हम जानेंगे कि ये मिशन शुरू कैसे हुआ
00:52इसके पीछे कौन सा ऐसा मौका था जो 175 साल में एक बार आता है
00:56और जुपिटर पर वॉयजर ने ऐसा क्या देखा कि पूरी दुन्या के साइंटिस्ट के होश उडगए
01:03तो कहानी शुरू होती है 1960 की दशक से
01:06उस टाइम नासा में एक बहुत ही ब्रिलियंट एजीनियर काम करते थे
01:09जिनका नाम था Gary Flandro
01:11अब Gary ऐसे इंसान थे जिनने ग्रहों की चाल को स्टड़ी करने में बहुत मज़ा आता था
01:15ये बंदा दिन रात कैलकुलेशन करता है था कि कौन सा ग्रह कब कहा होगा
01:20कितनी स्पीड से घूम रहा है और कितने साल बाद किस पुजिशन में आएगा
01:24अब एक दिन Gary कैलकुलेशन कर रहे थे और अचानक उन्हें एक ऐसी चीज पता चली
01:28जिसने लिटरली पूरी स्पेस साइन्स की दिशा बदल दी
01:31उन्होंने डिसकवर किया कि 1977 के आस पास हमारे सोलर सिस्टम के चार सबसे बढ़े ग्रह है
01:37यानि जोपिटर, सैटन, यूरेनस और नेप्ट्यून एक बहुत ही खास पुजिशन में आने वाले हैं
01:42अब तुम पूछोगे कि भई, पुजिशन में आने से क्या फर्क पड़ता है
01:45तो सुनो, यही तो सबसे इंट्रेस्टिंग पार्ट है
01:47देखो, नॉर्मली अगर तुम्हें एक स्पेस क्राफ्ट भेज कर इन चारों ग्रहों को एक एक करके विजिट करना होना
01:53तो तुम्हें हर ग्रहे के लिए अलग-अलग मिशन भीजना पड़ेगा
01:55जिसमें दशकों का टाइम और अरबो डॉलर्स खर्च होंगे
01:59मगर 1977 में यह चारों ग्रहे ऐसे अलाइन हो रहे थे
02:03कि सिर्फ एक स्पेसक्राफ्ट को लाँच करके चारों ग्रहों के पास से
02:06एक के बाद एक गुजारा जा सकता था
02:08इसे ऐसे समझो जैसे तुम्हें चार दोस्तों के घर जाना है
02:11और नॉर्मिली वो चारों अलग-अलग दिशाओं में रहते हैं
02:14तो तुम्हें चार अलग ट्रिप्स लेनी पड़ेंगी
02:16मगर अचानक एक दन तुम्हें पता चले कि अगले हफ़ते
02:19वो चारों एक ही रोड पर एक लाइन में आ रहे हैं
02:22तो तुम एक ही ट्रिप में चारों से मिल सकते हो
02:24बस ठीक ऐसा ही ग्रहों के साथ हो रहा था
02:26और सबसे माइन ब्लोइंग बात ये है
02:28कि ये alignment हर 175 साल में एक बार होता है
02:31मतलब अगर 1977 में इस मौके को पकड़ नहीं पाते न
02:35तो अगला chance आता 252 में
02:37यानि हमारे और तुमारे जीते जी ये मौका दुबारा आने वाला ही नहीं था
02:41तो जब Gary ने ये बात NASA को बताई तो सब ने सोचा
02:44कि भई ये तो one in a lifetime opportunity है
02:46इसे गवाना बिलकुल अफोर्ड नहीं कर सकते
02:48मगर यहाँ पर एक बहुत बड़ा प्रॉबलम था
02:51ये ग्रहे प्रित्वी से इतने दूर है कि
02:53अगर सीधे रॉकेट मारकर स्पेसक्राफ्ट भेजो ना
02:55तो इतना फ्यूल ही नहीं है दुनिया में
02:57जो इसे वहाँ तक ले जा सके
02:58जुपिटर ही प्रित्वी से 62 करोड किलो मीटर दूर है
03:02और नेप्ट्यून तो 4.5 अरब किलो मीटर दूर है
03:05इतनी दूरी तै करने के लिए सिर्फ फ्यूल के भरो से जाना
03:08प्रैक्टिकली इंपॉसिबल था
03:09तो फिर सॉल्यूशन क्या निकला
03:11सॉल्यूशन निकला एक बहुती शानदार साइन्टिफिक ट्रिक से
03:14जिसे ग्राविटी असिस्ट या स्लिंग शॉट इफेक्ट कहते है
03:16और इसे समझना बहुत ही आसान है
03:18देखो हर ग्रह के पास ग्राविटी होती है
03:21यानि अपनी तरफ खीचने की ताकत
03:23जितना बड़ा ग्रह उतनी ज्यादा ग्राविटी
03:25अब जब कोई स्पेसक्राव्ट किसी बड़े ग्रह के पास से गुजरता है न
03:29तो उस ग्रह की ग्राविटी उस स्पेसक्राव्ट को अपनी तरफ खीचती है
03:33अब अगर स्पेसक्राव्ट बिलकुल सही एंगल और सही स्पीड से आ रहा हो
03:37तो वो ग्रह की gravity में फसता नहीं है बलकि उसके चारो तरफ एक curve लेता है और gravity की
03:43energy को चुरा कर और भी ज्यादा तेजी से आगे निकल जाता है बिना एक boonth fuel जला है
03:48इसे simple example से समझो जैसे cricket में एक fast baller ने 1500 km पर आर की speed से gain
03:54फेकी और batsman ने उसी gain की speed को use करके bat के touch से उसे 200 km पर आर
04:00की speed से boundary पार मार दिया
04:01gain की अपनी speed प्लस bat का force दोनों मिल कर gain को और ज्यादा तेज कर देते हैं
04:08बिल्कुल ऐसे ही gravity assist में ग्रह की gravity spacecraft को extra speed boost दे देती है और voyager ने
04:15इसी trick को एक नहीं बलकि कई बार use किया
04:18पहले Jupiter की gravity से speed ली फिर Saturn से और ऐसे करते करते ये इतनी तेजी पकड़ गया कि
04:24अब सूरज की gravity भी इसे वापस नहीं खीच सकती
04:27ये free में speed पाने का ऐसा जुगार था जिसने पूरे mission को possible बनाया
04:32अब NASA ने decide कि एक नहीं बलकि दो spacecraft बनाएंगे ताकि अगर एक fail भी हो जाए तो दूसरा
04:39तो काम करे
04:40इन दोनों का नाम रखा गया Voyager 1 और Voyager 2 और यहाँ एक मज़ेदार बात ये है कि Voyager
04:462 को पहले launch किया गया 20 अगस्त 1977 को
04:50और Voyager 1 को बाद में launch किया गया 5 सितंबर 1977 को
04:54अब तुम सोच रहे होगे कि भाई अगर Voyager 2 पहले launch हुआ तो उसका नाम 1 क्यों नहीं रखा
05:00तो इसकी वज़े बहुत सिंपल है कि Voyager 1 का रास्ता shorter और faster था
05:05इसलिए बाद में launch होने के बावजूद वो पहले जुपिटर तक पहुँच गया और इसलिए इसे नमबर 1 का tag
05:10मिल गया
05:11दोनों का mission भी अलग-अलग था
05:13Voyager 1 को सिर्फ जुपिटर और सैटर्न की डीटेल स्टडी करनी थी और फिर सीधे सोलार सिस्टम से बाहर निकल
05:19जाना था
05:19जबकि Voyager 2 को जुपिटर, सैटर्न, यूरिनिस और नेप्टिून चारों ग्रहों को विजट करना था
05:25यानि Voyager 2 का सफर ज्यादा लंबा और ज्यादा रिस्की था
05:29अब इन दोनों spacecraft की बनावट की बात करें तो ये जानकर हैरानी होगी कि Voyager एक छोटी सी कार
05:35जितना बड़ा है
05:36बस 825 किलोग्राम वजन, इतने छोटे से डिब्बे ने इतना बड़ा सफर तैय किया ये सोचकरी दिमाग घूम जाता है
05:43अब इसे बनाने वाले इंजिनियर्स के सामने कई बड़े चैलेंजिस थे
05:47मगर सबसे बड़ा चैलेंज था पावर का
05:49देखो, स्पेस में तो कोई बिजली का सॉकेट नहीं है
05:52ना कि प्लग लगाओ और चार्ज कर लो
05:54तो फिर वाईजर को पावर कहां से मिलेगी
05:56अब पहला उप्षिन था सोलर पैनल्स
05:58मगर वो यहां काम नहीं कर सकते थे
06:00क्यों? क्योंकि जैसे जैसे तुम सूरज से दूर जाते हो
06:03सनलाइट कमजोर होती जाती है
06:05प्रिथवी पर जितनी सनलाइट आती है
06:07जुपिटर तक पहुँचते पहुँचते वो 25 गुना कम हो जाती है
06:10और सैटन पर तो 90 गुना कम हो जाती है
06:13इतनी कम लाइट में solar panels literally बेकार हो जाते हैं
06:16तो NASA ने एक बहुत ही अलग technology यूज़ की जिसका नाम है RTG
06:20यानी Radio Isotope Thermoelectric Generator
06:24अब ये नाम सुनकर डरने की जर्रत नहीं है
06:26ये समझने में बहुत ही आसान है
06:28Basically इसके अंदर plutonium 238 नाम का एक radioactive material भरा होता है
06:33अब radioactive material क्या करता है
06:35ये अपने आप धीरे धीरे तूटता रहता है
06:38और तूटने की process में गर्मी पैदा करता है
06:40बिल्कुल ऐसे जैसे सर्दियों में
06:42जब तुम अपने हाथों को जोर से रगड़ते हो
06:44तो गर्मी पैदा होती है ना
06:46ठीक वैसे ही
06:47plutonium के अंदर के atoms तूटते रहते हैं
06:49और लगातार गर्मी देते रहते हैं
06:51अब RTG इस गर्मी को electricity में बदल देता है
06:54ये process सालों तक चलती रहती है बिना रुके
06:57मगर एक problem ये है कि time के साथ plutonium कम होता जाता है
07:01और power भी घटती जाती है
07:03जब Voyager launch हुआ
07:05तब इसकी power 470 watts थी
07:07जो की सोचो बस 4-5 bulb जलाने जितनी power
07:10और आज 2026 में ये घटकर सिर्फ 250 watts लह गई है
07:14तो NASA के engineers क्या कर रहे हैं
07:17कि एक-एक करके Voyager के instruments बंद करते जा रहे हैं
07:20ताकि बची हुई power से कम से कम communication system तो चलता रहे
07:23और Voyager हमें data भेजता रहे
07:25scientists का अनुमान है कि
07:272028 से 2030 के बीच कहीं
07:30Voyager का last signal आएगा
07:31और उसके बाद ये हमेशा के लिए
07:33खामोश हो जाएगा
07:34अब एक और बड़ा challenge था communication का
07:37मतलब इतनी दूर से Voyager हमें signal कैसे भेजेगा
07:40तो Voyager के पास एक 3.7 मीटर चोड़ा
07:43बड़ा सा dish antenna लगा हुआ है
07:55इतनी कमजोर पावर का signal
07:57अरबो किलोमेटर ट्रावल करके
07:59पृत्वी तक पहुँचता है
08:00और इसे पकड़ने के लिए
08:01NASA ने पृत्वी पर 3 जगों पर
08:04बड़े बड़े 70 मीटर चोड़े
08:06antenna dish लगाए हुए हैं
08:07जिन्हें Deep Space Network कहते हैं
08:09ये इतने sensitive हैं
08:11कि एक बहुत ही कमजोर signal को भी
08:13catch कर लेते हैं
08:14और सबसे crazy बात ये है
08:16कि आज Voyager इतनी दूर है
08:18कि उसका signal light speed से चलने के
08:20बावजूद पृत्वी तक पहुँचने में
08:2222 घंटे से ज़्यादा लगते हैं
08:24मतलब अगर अभी Voyager ने एक message भेजा
08:26तो वो हमें कल मिलेगा
08:28और अगर हमने reply किया
08:29तो वो Voyager को परसो मिलेगा
08:31एक simple सी बातचीत में दो दिन लग जाते हैं
08:34अब spacecraft के साथ एक और amazing चीज लगाई गई थी
08:36जो इसे सिर्फ एक machine से कहीं ज़्यादा खास बनाती है
08:39दोनों Voyager के साथ
08:41एक एक golden record जोड़ा गया है
08:43ये एक 12 inch की gold plated copper disc है
08:46जिसमें पृत्वी और इंसानों के बारे में जानकारी स्टोर की गई है
08:49इसमें 1500 तस्वीरे हैं
08:5155 भाशाओं में greetings हैं
08:53जिसमें हिंदी में भी नमस्ते कहा गया है
08:54इसमें nature की आवाजे हैं
08:56जैसे हवा, बारिश, गरज, समंदर की लहरें, चिडियों की चहचाहट
09:01इसमें अलग-अलग cultures का music है
09:03और सबसे smart बात ये है कि इस disc के cover पर diagrams engrave किये गए हैं
09:08जो बताते हैं कि इसे कैसे play करना है
09:10इसका मकसद ये है कि अगर ब्रह्मान में कभी किसी दूसरी सभ्यता को ये spacecraft मिल जाए
09:15तो उन्हें पता चल सके कि ये कहां से आया है और इसे किसने भेजा है
09:19अब ये बहुत दूर की सोच है
09:21मगर सोचो तो सही कि उन scientists ने कितनी बड़ी सोच रखी थी
09:25कि एक message तयार किया जो शायद लाखों साल बात किसी को मिले
09:28इस golden record के बारे में detail में हम part 2 में बात करेंगे
09:32अब आती है इस पूरी कहानी की सबसे exciting बात
09:36Voyager का सफर और उसकी discoveries
09:38तो Voyager 1 मार्च 1979 में Jupiter के पास पहुचा
09:42अब Jupiter हमारे solar system का सबसे बड़ा ग्रह है
09:45कितना बड़ा इसका अंदाजा ऐसे लगा हो
09:48कि अगर Jupiter खोखला होता न
09:49तो उसके अंदर 1300 प्रिथवियां समा जाती
09:521300
09:53मतलब प्रिथवी Jupiter के सामने ऐसी है
09:56जैसे एक football के सामने एक छोटी सी कंचे की गोली
09:59अब Jupiter को पहले भी telescope से देखा गया था
10:02मगर Voyager ने जब Jupiter की close-up तस्वीरे भेजी
10:05तो जो दिखा वो किसी ने सोचा भी नहीं था
10:07सबसे पहले Jupiter का Great Red Spot
10:09ये एक विशाल काय तूफान है जो Jupiter की surface पर दिखता है
10:13अब ये तूफान कितना बड़ा है
10:15इसका अंदाजा ऐसे लगाओ कि इसके अंदर
10:17दो पूरी पृतविया आराम से फिट हो जाएं
10:19और सबसे हैरान कर देने वाली बात ये है
10:22कि ये तूफान कम से कम
10:23साड़े 300 सालों से लगा तार
10:26बिना रुके चल रहा है
10:27मतलब जब भारत में मुगल काल चल रहा था
10:29तब भी ये तूफान चल रहा था
10:45मतलब इसके पास पृतवी जैसी
10:46solid surface है ही नहीं
10:48ये पूरा का पूरा gas से बना हुआ है
10:50और इसलिए यहां के तूफान को रोकने के लिए
10:53कोई जमीन ही नहीं है
10:54Voyager ने इस तूफान की इतनी डीटेल
10:56तस्वीरे भेजी कि पहली बार
10:58scientists ने इसके अंदर के बादलों की
11:00अलग-अलग layers और wind patterns को
11:03clearly study किया
11:03मगर Jupiter पर सबसे ज्यादा shocking discovery
11:06ग्रह पर नहीं बलकि उसके चांदों पर होई
11:09अब Jupiter के 95 से ज्यादा चांद है
11:11और Voyager ने इन में से कई चांदों की
11:14close-up photos भेजी
11:15जिन्होंने scientists का दिमाग हिला दिया
11:17सबसे पहले बात करते हैं
11:19IO की
11:19IO जुपिटर का एक चांद है
11:21और जब Voyager ने IO की तस्वीरे भीजी
11:24तो scientists ने कुछ ऐसा देखा
11:25जो पहले कभी किसी ने कहीं नहीं देखा था
11:27इस चांद पर active ज्वाला मुखी है
11:30जो real time में फट रहे हैं
11:32ये पहली बार था कि प्रित्वी के अलावा
11:34किसी और जगह पर active volcano discover हुए
11:37IO पर इतने सारे ज्वाला मुखी है
11:39कि इसकी पूरी surface लगातार बदलती रहती है
11:42लावा बहार आता है
11:43ठंडा होता है
11:44और फिर नया लावा बहार आता है
11:46ये चांद लिटरली अंदर से बाहर हो रहा है
11:49अब ये ज्वाला मुखी इतने active क्यों है
11:51इसकी वजह बहुत ही interesting है
11:53जुपिटर इतना बड़ा ग्रह है
11:55कि इसकी gravity बहुत ज्यादा strong है
11:57ये gravity IO को लगातार खीचती और निचोडती रहती है
12:00बिल्कुल ऐसे जैसे तुम एक रबर की गेंद को बार बार दबाओ
12:03तो वो गर्म हो जाती है
12:05ठीक वैसे ही जुपिटर की gravity IO को अंदर से गर्म कर रही है
12:09और यही गर्मी ज्वाला मुखी बनकर बाहर निकलती है
12:11इस प्रसेस को science में tidal heating कहते हैं
12:14अब आयो से भी ज्यादा exciting discovery हुई यूरोपा नाम के चांद पर
12:18यूरोपा जुपिटर का एक और चांद है
12:20और इसकी सर्फिस पूरी बर्फ से धकी हुई है
12:23मगर जब वाइजर ने यूरोपा की तस्वीरे भेजी
12:25तो scientist ने देखा कि इस बर्फ पर बड़ी बड़ी धरा रहे हैं
12:29और ऐसे patterns दिख रहे हैं जो बता रहे हैं
12:32कि इस बर्फ के नीचे liquid पानी के एक तूरा समुदर छुपा हुआ है
12:35अब ये बात सुनकर तम सोचोगे कि पानी तो जम जाएगा इतनी ठंड में
12:39वगर यहां भी वही tidal heating काम कर रही है
12:42जुपिटर की gravity यूरोपा के अंदर भी गर्मी पैदा कर रही है
12:45जिसकी वज़े से बर्फ के नीचे पानी liquid form में बना हुआ है
12:49और अब यहां पर सबसे बड़ा सवाल आता है कि जहां liquid पानी है वहां life हो सकती है
12:53यही वो बात है जिसने पूरी दुनिया के scientist को पागल कर दिया
12:57आज 2026 में भी यूरोपा को पूरे sonar system में alien life ढूंडने के लिए number one candidate माना जाता
13:04है
13:04नासा ने तो हाल ही में यूरोपा क्लिपर नाम का एक dedicated mission भी launch किया है
13:08सिर्फ यूरोपा को study करने के लिए
13:10और ये सब शुरू हुआ कहां से?
13:12Voyager के उन तस्वीरों से
13:14अगर Voyager ने वो photos नहीं भेजी होती
13:16तो शायद आज भी हमें पता नहीं होता कि Jupiter के एक छोटे से चांद पर एक छुपा हुआ समुद्र
13:21है
13:21जहां शायद कोई जीव तहर रहा हो
13:23अब Voyager ने Jupiter के पास एक और amazing discovery की
13:27Voyager ने पहली बार discover किया कि Jupiter के भी rings है
13:30अब हम सब जानते हैं कि Saturn के rings हैं
13:33मगर Jupiter के भी rings हैं ये किसी को नहीं पता था
13:36ये rings बहुत ही पतले और dark हैं
13:38इसलिए प्रित्वी से टेलेस्कोप से दिखते नहीं थे
13:40मगर Voyager ने इतने करीब से फोटो ली कि ये clearly दिख गए
13:44ये एक ऐसी discovery थी जिसने बता दिया कि
13:46space में हमें अभी कितना कुछ जानना बाकी है
13:49हम सोचते हैं कि हमें सब पता है
13:51मगर असलियत ये है कि हमें अभी बहुत कुछ पता ही नहीं है
13:54Jupiter के बाद Voyager ने Jupiter की gravity का
13:57एक जबरदस्ट sling shot लिया
13:58और Saturn की तरफ निकल गया
14:00और भी ज्यादा speed के साथ और भी ज्यादा दूर
14:03मगर Saturn पर क्या हुआ
14:05Uranus और Neptune पर Voyager ने क्या देखा
14:07और वो पल कैसा था जब Voyager ने
14:09solar system की boundary को पार किया
14:11वो सब हम cover करेंगे part 2 में
14:13तो part 2 मिस मत करना क्योंकि उसमें
14:15और भी ज्यादा mind-blowing discoveries है
14:17और एक ऐसी photo की कहानी है
14:19जिसने पूरी इंसानियत का नजरिया बदल दिया
14:21Stay curious और मिलते हैं part 2 में
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