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जंग के 38वें दिन, ट्रंप और नेतन्याहू की बड़ी गलती सामने आई है। ईरान ने एक अमेरिकी सांसद को समर्थन दिया, जिससे अमेरिकी और इजरायली नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है। युद्ध ने मध्य पूर्व की राजनीति और तेल बाजार को भी प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से ट्रंप-नेतन्याहू दोनों की रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं। हाल के हमले और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं ने तनाव को और बढ़ा दिया है। वीडियो में जानिए क्या गलती हुई, ईरान का कदम क्यों महत्वपूर्ण है, और इस युद्ध का भविष्य क्या दिखा रहा है।

On the 38th day of the Iran-US-Israel war, a major blunder by Trump and Netanyahu has come to light. Iran surprised the world by openly backing a US lawmaker, creating tensions within American and Israeli leadership. Experts say this move could challenge the strategies of both Trump and Netanyahu. The conflict continues to impact Middle East politics and global oil markets. This video explains the mistake, why Iran’s support is significant, and what it could mean for the ongoing war. Stay updated on the latest developments and political shifts in the region.

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Transcript
00:09क्या इरान से जंग लड़ रहे अमेरिका और इसराइल ने युद्ध के 38 दिन अपनी सबसे बड़ी गलती कर दी
00:16है?
00:16तहरान की शरीफ University of Technology पर हुए इस हमले ने पूरे विश्व को चौका दिया है.
00:22अमेरिका और इसराइल की सेनाओं ने इस प्रमुक शेक्षनिक संस्थान को निशाना बनाया, जिसके परिणाम स्वरूप University की एक इमारत
00:30को नुकसान पहुँचा.
00:31University प्रशासन ने भी हमले की पुष्टी की है और कहा कि परिसर के कुछ हिस्सों में क्षती हुई है,
00:37लेकिन शुरुवाती रिपोर्टों में किसी के मारे जाने की खबर नहीं मिली.
00:40इरान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे शिक्षा और विज्ञान के खिलाफ हमला बताया.
00:47इरानी अधिकारियों ने कहा कि बमों से इमारतों को नुकसान हो सकता है, लेकिन देश के ग्यान और विज्ञानिक शमता
00:53को कोई समाप नहीं कर सकता.
00:551966 में स्थापित शरीफ उनिवर्सिटी इरान की प्रमुख विज्ञान और इंजिनियरिंग संस्थाओं में से एक है और यहां से कई
01:02चात्रों ने विज्ञान और तकनीक के शेत्र में देश और दुनिया में अपना नाम बनाया है.
01:07इस हमले पर अमरीकी डेमोक्राटिक सांसद यासमीन अनसारी ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सवाल उठाया कि एक बड़े शेहर में
01:14स्थित शिक्षा संस्थान को क्यों निशाना बनाया गया.
01:17अनसारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शरीफ यूनिवरसिटी इरान की MIT जैसी है और यहां से पढ़े कई इंजीनियर
01:24सिलिकॉन वैली में बड़ी टेक कंपनिया खड़ी कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि एक करोड की आबाधी वाले शेहर में
01:30यूनिवरसिटी पर हमला करन
01:32गंभीर सवाल खड़े करता है. इरानी मीडिया ने भी दावा किया कि अमेरिका-इसराइल हमले में विश्व विद्याले को टार्गेट
01:39किया गया. विश्व विद्याले परिसर में हुए नुकसान के विडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिन में इमारतों को हुए
01:45प्
02:02प्रगती के लिए खत्रा पैता करता है. वैक्षविक समुधाय में भी इस हमले पर चिंताव्यक्त की जा रही है. कही
02:08देशों ने शेक्षणिक संस्थानों को युद्ध से अलग रखने की आवशक्ता पर जोर दिया है. शरीफ युनिवरसिटी की प्रतिष्ठा और
02:15इसकी �
02:15वैज्ञानिक शम्ता इसे सिर्फ इरान ही नहीं बलकि अंतरराश्ट्रियस तर पर महत्वपूर्ण बनाती है. इस हमले ने एक बार फिर
02:23सवाल उठाया है कि युद्ध की रणनीती में शिक्षा और शोध संस्थानों को लक्षित करना कितना सही है. ये हमला
02:30शिक्षा और व
02:45इसरायल की ये कारवाई शायद उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक गलती बन सकती है क्योंकि इसने वैश्विक्स तर पर न केवल
02:52इरान की बलकि पूरी शैक्षनिक दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
03:15झाल
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