00:00ये कहानी एक बड़े शहर की चमचमाती इमारतों के दर्मियान बसी है, जहां हर कोई अपनी दोड में लगा रहता
00:06है।
00:07रिया नामी एक लड़की थी, उम्रा 28 साल, वो एक मल्टी नैशनल कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर थी।
00:13उसकी जिन्दगी मुकंबल तौर पर स्क्रीन, मीटिंग्स, डेडलाइन्स और कॉफी के कपों में सिम्टी हुई थी।
00:18सुबह साथ बजे उठना, जिम, ओफिस, लेट नाइट काम, वीकेंट पर भी इमेल चेक करना, यही उसका मामूल था।
00:25एक दिन ऑफिस में नया इंटर्न आया, आरव। लड़का थोड़ा मुक्तलिफ था, मों हमेशा हस्ता रहता, छोटी-छोटी बातों पर
00:33खुश हो जाता, और सबसे अजीब बात ये थी कि वो कभी भी फोन पर जादा वक्त नहीं गुजारता था।
00:56तुम इतना पुरसुकून कैसे रहते हो, इतना काम, इतना प्रेशर, रिया ने पूछा।
01:25वो अब हर शाम साथ पजे के बाद फोन साइलेंट कर देती, वीकेंड पर कभी कभार पार्क चली जाती, बगएर
01:32किसी प्लान के।
01:33एक बार तो वो और आरफ साथ में साइकल चलाने गए, हवा के जोके, पसीना, हसी, बहुत दिनों बाद उसे
01:39लगा कि वो जिन्दा है, सिर्फ काम नहीं कर रही।
01:42एक शाम रिया ने अपने बॉस से कहा, सर, मुझे लगता है हमें टीम को बैलन्स लाइफ के लिए कुछ
01:47जगह देनी चाहिए, ज्यादा प्रोडक्टिविटी तभी आएगी जब लोग ठके नहीं होंगे।
01:52बॉस ने पहले तो हैरान हुआ, लेकिन रिया के पिछले तीन महीनों के रिजल्ट्स देखकर मान गया।
02:22आप अपनी जिन्दिगी खुद चुन सकें, नकि सिर्फ दौडते रहें।
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