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  • 6 hours ago
यहां काम करने वाली महिलाएं कहती हैं, अब हमें किसी से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती. रितेश तंबोली की रिपोर्ट.

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00:15उनर्मंद हाथों से सिलाई मशीन चलाती ये महिलाएं कभी दूसरों से कर्ज लेकर अपने घर का खर्च चलाती थी
00:22लेकिन आज सेरी खेडी में चलाए जा रहे हैं राश्वे ग्रामीन आज़िविका मिशिन की बदौलत इनकी जिन्दगी बदल चुकी है
00:42सेरी खेडी के कैंपस में जहां सिलाई सेंटर सहीत कई यूनिट संचालित हो रहे हैं
00:47वहां की पूरी देखरी की जिम्मेदारी भी इन ही महिलाओं के कंदे पर है
00:51मॉनिटरिंग से लेकर सही मटरियल का चैन भी यही लोग करती हैं
01:06सिलाई सेंटर में जबजादा काम होता है तब और भी महिलाओं को काम पर पुला लिया जाता है
01:11यहां काम करने वाली ज़ादातर महिलाएं सिलाई कड़ाई के काम में माहिर हैं
01:15इनके बनाए कपरों की डिमान भी तेजी से बर रही है
01:39सो असाहेता समू से जुरिये महिलाएं अपने महिलाएं अपने महिलाएं अपनी तकदीर लिख रही है
01:44खुद को अपने पैरों पर खड़ा कर एक पत्नी, एक मा और सफल ग्रहिनी का रोल अदा कर रही है
01:50राइपूर्ते ETV भारत के लिए रितेश तमभूली की रिपोर्ट
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