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  • 16 hours ago
पिछले कई महीनों से जैसलमेर जिले की राजनीति के केंद्र में आया ओरण जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने का मुद्दा अब लगभग सरकार की चौखट पर पहुंच चुका है। ओरण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से जैसलमेर जिले के तनोटराय मंदिर से निकाली जा रही पदयात्रा शनिवार को किशनगढ़ से करीब 30 किलोमीटर दूर तक पहुंच गई और आगामी दो-तीन दिनों में अंतिम पड़ाव स्थल राजधानी जयपुर पहुंच जाएगी। जहां टीम ओरण के सदस्यों की ओर से धरना दिया जाना है। दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से गत दिनों मोकला गांव के समीप डूंगरपीर की ओरण में 4940 बीघा जमीन को ओरण के तौर पर दर्ज करवाने का निर्णय लिया गया। एक तरफ जिले के दोनों विधायकों जैसलमेर के छोटूसिंह भाटी और पोकरण के महंत प्रतापपुरी की तरफ से दर्ज करवाई गई ओरण पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और जमीनों को ओरण-गोचर आदि में दर्ज करवाने की उम्मीद जताई जा रही है, दूसरी ओर पदयात्रा पर निकले टीम ओरण के सदस्य इसे आधी-अधूरी स्वीकृति करार दे रहे हैं। उनका साफ कहना है कि, सरकार की तरफ से जिला प्रशासन की ओर से तैयार की गई फाइलों में कांट-छांट की जा रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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