00:00मिडिलिस्ट की जग के बीच भारत के साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसने उर्जा बाजार में हलचल मचा दी है
00:05साथ साल बाद इरान का तेल भारत आने वाला था
00:08सब कुछ दै था
00:09टैंकर रास्ते में था
00:10लेकिन आखरी वक्त पर अचानक रुख बदल गया
00:13सवाल ये है आखरी पल में ऐसा क्या हुआ
00:16कि भारत आने वाला टैंकर भारत के बजाए चीन क्यों और मुड़ गया
00:20क्या ये सर्फ एक कारोबारी फैसला था
00:22या इसके पीछे चिपा है बड़ा जियो पॉलिटिकल दबाव
00:25पश्ची मेशिया में जारी भीशन युद के बीच उजा की लड़ाई अब और तेज हो चुकी है
00:30और इसी बीच एक ऐसा घटना करम सामने आया है जोसने भारत की उजा रणीती पर बड़े सवाल खड़े करती
00:36है
00:36एक तेल टैंकर पिंक्शून जो करीब 6 लाक बैरल इरानी कच्चा तेल लेकर गुजराद के वड़ी नगरवंदरगाह आने वाला था
00:45उसने आकरी वक्त में अपना रास्ता ही बदल लिया और अब वो चीन के डोगीं की ओर बढ़ रहा है
00:50तेजी से बढ़ रहा है
00:52अगर ये डील पूरी हो जाती है तो 2019 के बाद पहली बार भारत इरान से तेल खरीता है अगर
00:58ये डील पूरी हो जाती तो लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इसकी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है पेमेंट
01:05की समस्या
01:06दरसल एरान पर अमेरिकी प्रतिबंद अभी लागू है अलाकि एक सिमित सैंक्शन्स वेवियर 19 अप्रेल तक वैद दिया है लेकिन
01:13इसके बावजूद भुगतान के रास्ते बहद जटिल है
01:16सुत्र बताते हैं कि इरानी विक्रेता अब क्रेडिट पर तेल देने को तयार नहीं है वे तुरंत या कम समय
01:22में भुगतान चाहते हैं और यहीं भारत पुछड़ गया
01:25भारत ना तो स्विट सिस्टम के बाहर कोई मजबूत भुगतान चैनल तयार कर पाया और ना ही अमेरिका के प्रतिबंधों
01:31से बचने का ठोस रास्ता निकाल पाया
01:34नतीजा जो तेल भारत आने वाला था वो सीधे चीन चला गया
01:39यहां एक और बड़ा पहलू है
01:40मिडलिस में जंग के दोरान हॉर्मू स्ट्रेट पर भी नियंतरन और खत्रे की सिथी ज्यादा बनी हुई है जहां से
01:46दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है
01:49ऐसे में हर शिप्मेंट और भी ज्यादा सब्वेदेशील हो जाता है
01:53और चीन जो पहले से ही इरान का सबसे बड़ा तेल खरिदार है ऐसे मौके का फायदा उठा कर तेजी
01:59से सौधे कर रहा है
02:00अब बड़ा सवाल उठता है कि भारत की मल्टी अलाइन्मेंट और उर्जा सुरक्षा की रणीती सिर्फ भाशनों तक समित है
02:08क्योंकि हकीकत यह है कि जब मौका आया भारत भुटान में वस्था के कारण पीछे रह गया
02:13इसका सीधा असर होगा भारत को अब फिर महंगे अंतरास्टिय बाजार से तेल खरीदना पड़ेगा जिसका असर पेट्रॉल डीजल की
02:21कीमतों पर भी पड़ सकता है
02:22और सबसे एहम सस्ते विकल्प जैसे रूस और इरान धीरे-धीरे हाथ से निकल सकते है
02:27विशेशग्य साफ कहते हैं उजा सुरक्षा सिर्फ तेल खरीदने से नहीं आती बलकि उसके लिए पेमेंट, शिपिंग और इंशोरंस का
02:34मजबूत एकोसिस्टिम जरूरी होता है
02:36अगर ये नहीं बना तो हर बार भारत ऐसी ही मौके गवाता रहेगा
02:41तो कि भारत ने एक बड़ा रणितिक मौका खो दिया, क्या अमेरीकी दबाब के आगे उजा सुरक्षा कमजोर पड़ रही
02:47है या फिर ये सिर्फ एक औरस्थाई जटका है
02:50सवाल कहीं है लेकिन सच इतना है कि इस बार तेल नहीं मिला और मौका हाथ सेन कर गया
02:54इस कबर में इतना है अपडेट्स के लिए देखते रहें OneIndia हैंती
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