00:07यहां कोई बच्चा पास जाता है, तो मामबाप उसे तुरंत खींच कर वापस ले आते हैं।
00:13कुछ साधों का कहना है कि यहां पर तांत्रिक अनुष्ठान भी हुए थे।
00:18शायद उसी के कारण यहां आत्माओं का बसेरा और गहरा हो गया।
00:23दोस्तों, ये थी कहानी अग्रसिन की बावली की, दिल्ली के दिल में छिपी वो जगे, जहां की खामुशी शब्दों से
00:32ज्यादा बोलती है।
00:33कभी ये जीवन देने वाली बावली थी।
01:04आज इसे लोग मौद की बावली कहते हैं।
01:06खामुशी में अग्रसिन की बावली आपको भी अपनी और बुला ले।
01:10रात की खामुशी के इस सफर में साथ दीन के लिए धन्यवाद।
01:15अगली कहानी में फिर मिलेंगे।
01:17खामुशी के लिए ले ये दीन के लिए रावली के लिए के लिए जावली के लिए अग्रसिन के लिए धन्यवाद।
01:23You
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