00:00अब फिल्मों और वेब सीरीज का भी हिस्सा बन चुकी है।
00:03P.K. जैसी फिल्मों में इसे दिखाया गया।
00:06लेकिन असली डर वो नहीं है जो स्क्रीन पर दिखता है।
00:10बलकि वो है जो आप राद के अंधेरे में इन सीडियों पर अकेले महसूस करते हैं।
00:16तो चलिए, स्वागत है आपका राद की खामोशी की एक और भयाव कहानी में अग्रसेन की बावली का इतिहास बिलकुल
00:24साफ नहीं है।
00:26कहा जाता है कि इसे राजा अग्रसेन ने बनवाया था, जो एक महान वैश्य राजा माने जाते हैं।
00:32कुछ इतिहास कारों का मानना है कि मौजूदा सन्रचना को तुर्की सुल्तानों ने चौदवी सदी में दोबारा बनवाया।
00:40ये बावली लगभग 60 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी है और इसमें करीब 108 सीड़िया है, जो नीचे पानी
00:49तक जाती थी।
00:50पुराने जमाने में दिल्ली में पानी की भारी समस्या रहती थी। बावलिया न सिर्फ पानी संग्रह करने का साधन थी।
00:59बलकी लोगों के मिलने जुलने, धार्मिक अनुष्ठानों और विश्राम का भी केंद्र होती थी।
01:06अग्रसेन की बावली भी कभी जीवन से भरी रहती थी। लोग यहां पूजा करते, पानी भरते और बच्चे खेलते। लेकिन
01:15वक्त के साथ ये बावली विरान हो गई। पानी सूख गया और इसकी दीवारों पर अंधकार और रहस्य की परते
01:24जम गई।
01:25आज ये जगे ASI, Archaeological Survey of the Earth,
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