00:03नमस्कार दोस्तों ये तो हम सब जानते हैं कि रावण ने सीता का अपारण किया था लेकिन क्या आप जानते
00:08हैं कि अपारण से ठीक पहले रावण ने सीता की एक गुप्त परिक्षाली थी एक ऐसी परिक्षा जिसका सच आज
00:14भी कई लोगों को नहीं पता तो चलिए जानते ह
00:17सीता का पारंड करने से पहले रावन ने सिर्फ बल का प्रयोग नहीं किया बलकि उसने एक गहरी चाल चली
00:23जो सीता की स्वभाव साहस और धार्मिक्ता की जाच करने के लिए थी रावन को पता था कि सीता साधारन
00:29इस्तों नहीं दिववे गुणों से युक्त हैं उन्हें अं�
00:46ब्रिद्व स्वर वाले भिक्षुक का आगमन होता है
00:49पर वो कोई साधारण भिक्षुक नहीं था
00:52वो स्वयम रावन था
00:53रावन ने अपना रूप, स्वर, चाल, धाल
00:55सब कुछ बदल लिया था
00:57उसने भिक्षा मांगी
00:58पर ये भिक्षा एक परिक्षा थी
00:59रावन भिक्षा मांगते हुए सीता की और बढ़ा
01:02जैसे ही वो दहलीज से बाहर खड़ा रहा
01:04सीता ने कहा आरे आप यहां क्यों खड़े हैं
01:07मैं दान दूँगी आप आगे आए
01:09रावन बोला देवी आप शास्त्र जानती होंगी
01:12भिक्षुक कभी भी ग्रे की सीमा रेखा पार नहीं करता
01:16ये सुनकर सीता सुयम दहलीज पार करके बाहर आई
01:19रावन यही देखना चाहता था कि क्या सीता परिस्थितियों में मर्यादा छोड़ देंगी
01:23पर सीता ने दहलीज सिर्फ इसलिए पार की
01:26क्योंकि भिक्षा देना धर्म माला जाता है
01:28ये रावन की पहली परिक्षा थी और सीता सफल हुई
01:32रावन ने भिक्षुक के रूप में राम और लक्षमन की शक्तियों पर व्यंग कसना शुरू किया
01:37उसने पूछा कि क्या आपके पती आपको अकीला छोड़ कर जाते हैं
01:41क्या वो आपकी रक्षा कर पाएंगे
01:42ये पूर्ण रूप से एक जाल था
01:45रावन जानना चाहता था कि क्या सीता भै या संदेह में आकर राम की निंदा करेंगी
01:50पर सीता द्रड स्वर में बूली
01:52मेरे स्वामी भगवान विश्नु के अंश है
01:54उनकी शक्ती का आप मान मत करो
01:56रावन को तर मिल चुका था
01:57सीता अपने धर्म और निष्ठा से डिगने वाली नहीं थी
02:00अब रावन ने अंतिम और सबसे गहरी परिक्षा ली
02:03उसने अपना अस्थी रूप तो नहीं दिखाया
02:06लेकिन उसने अपने भीतर की मायवी शक्ती
02:08हल्की सी प्रकट की
02:09ये एक अगनी चिंगारी जैसी चमक थी
02:12जिससे साधारन मनुश्य डड़ जाए
02:14लेकिन सीता तनिक भी नहीं डरी
02:16उन्होंने शांतिस्वर में कहा कि
02:18आरे आपका ये रूप भिक्षुक के लिए उचित नहीं
02:21रावन समझ गया था
02:22सीता देवियों के समान तेजवाली है
02:25उन्हें भैभीत करना असंभव है
02:27रावन की तीनों परिक्षाएं असफल रही
02:29सीता ना डरी ना टूटी ना विचलित होई
02:31इसके बाद रावन ने सोचा
02:33अगर ये इस रूप में भी इतनी डिड़ है
02:36तो इनका अपारण करना आसान नहीं होगा
02:38इसलिए उसने अपने मायवी रथ और बल का प्रयोग करने का निड़े लिया
02:42और फिर वही हुआ
02:43रावन ने असली रूप धारण किया
02:45दसो सिरो वाला दानव सामने था
02:47सीता का तेश देखते हुए भी वो उन्हें उठा कर रत में लेकर उड़ गया
02:51पर सीता अंतिम शड़ तक शान्त रही
02:54उन्होंने धर्ती को प्रणाम कियो और केवल एक वाक के कहा
02:57हे राम हे लक्षमन मेरी रक्षा कीजे
03:00और इस तरह रावन की तीनों परिक्षाएं सीता की पवित्रता और दिविता के सामने नाकाम हो गए
03:05इसी के साथ इस वीडियो में ता ही
03:07अगर आप कोई जानकारी पसंदाई हो तो कॉमेंट में जरूर बताएं
03:10मिलते हैं अगली वीडियो में तब तक के लिए नमस्कार
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