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अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को अब एक महीने से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप लगातार NATO देशों से सहयोग मांगते रहे, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। हाल ही में नाटो देशों ने अमेरिकी फाइटर विमानों को अपने एयरस्पेस के उपयोग की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि ट्रंप ने नाटो देशों को “कायर” तक कह दिया। माना जा रहा है कि युद्ध के बाद अमेरिका अपने नाटो संबंधों की समीक्षा कर सकता है। इन तमाम चीजों को लेकर विदेशी मामलों के जानकार अभिषेक खरे ने जानकारी साझा की।
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00:02कल यूरो के देश इटली, फ्रांस, स्पेन वगेरा ने
00:09अमेरिकन जो युद्धक विमान हैं उनको अपने airspace का इस्थिमाल करने के लिए मना कर दि
00:15विशेश तोर पर इटली ने अपने airspace का इस्थिमाल करने से अमेरीकी विमानों को मना किया
00:25जिस तरह से ट्रंप ने बार बार डेक्लेर किया कि ग्रीन लेंड को वो कपजा लेंगे, फिर येरोपियन देशों के
00:30भारी उरोथ के बाद ही वो पीछे अटे, तो ये सब घटना करम ने भी येरोपियन देशों के दिमाग में
00:36ये चीज़ डाल दी है कि ट्रंप पर अमेरिका
00:38पर बहुत लंबे भरोसा नहीं कर सकते, उन्हें अपना डिफेंस अपने हाथों में लेना पड़ेगा और खुद ही इसकी कमान
00:45समालना पड़ेगे.
00:50नमस्कार दोस्तों आज बात करेंगे एक इंपोर्टन डेवलपमेंट पर और वो डेवलपमेंट यह है कि क्या नेटो टूट रहा है
00:57क्योंकि देखिए जो अब युद में परिस्तितियां बन रही हैं बार बार ट्रंप के बूलने पर भी नेटो देश सहयों
01:04के लिए नहीं
01:22जोटियो रिखिखिए जो गटना गरम है उसमें गल यरोप के देश इटली फ्रांस भागण ने
01:36अमेरिकन जो युद्धक विमान है उनको अपने airspace का इस्तमाल करने के लिए मना कर दी
01:42विशेश तोर पर इटली ने अपने airspace का इस्तमाल करने से अमेरिकी विमानों को मना किया
01:49तो यह बहुत बड़ा development है क्योंकि इटली एक बहुत महात्पून सहयोगी माना जाता है अमेरिका का और नेटो देश
01:55तो है इसके अलावा अगर हम बात करें तो लगातार जो युद्ध है यह भी बड़ा होता जा रहा है
02:02इसमें एक तरफ कभी बातचीत होती है कि बातचीत ज
02:17लेकिन पहले बात करते हैं कि क्या नेटो टूट रहा है तो सबसे पहला कारण तो यह है कि क्यों
02:24आखिर नेटो देश सहयोग नहीं दे रहे हैं अमेरिका को उस पर बात करते हैं तो उसके कुछ कारण है
02:30सबसे महात्पून और पहला कारण माना जा रहा है कि यह नेटो देश
02:47इसलिए वो इस युद्ध में सहयोग नहीं दे रहे हैं, किसी भी तरह से प्रतेक्षा प्रतेक्षा.
02:51दूसरी important चीज है कि इन देशों का कहना है कि इनके देश की जो जनता है वो इस युद्ध
02:58के खिलाफ है, वो इस युद्ध में सहयों को नहीं देना चाहते है।
03:02तीसरा कारण माना जा रहा है कि अल्रेडी युरोप में युक्रेण रिशिय युद्ध को लेकर उर्जा संकट पहले से था,
03:09अब वो संकट और बढ़ गया है तो वो से और बढ़ाना नहीं चाहते, और जंजट में पढ़ना नहीं चाहते,
03:13क्योंकि युरोप की उर्जा अवशक्ताओं की पूर्ती का एक बड़ा माध्यम मेडिल इस्ट है और हारमुज स्टेट से उनको सप्लाई
03:21आती है, तो वो भी अब और इस जंजट में पढ़ना नहीं चाहते है, चौथा इंपोर्टन कारण है, कि इन
03:29देशों का कहना है कि ने�
03:43इसको इसमें सहयोग नहीं देना चाहते है, इसके अलावा जो पिछले एक वर्ष में तर्म के राश्पती बनने के बाद
03:49परिस्टियां डेवलप हुई है, विशेश तोर पर जिस तरह से यूरोप के सांट ट्रंप ने टरिफ वार खेला, फिर उसके
03:56बाद ट्रेड वार किय
03:58उन्हें बहुत परिशान किया, उसके बाद फिर यूकरेन युद्व में कभी सहयोग दिया, कभी ऐसायोग दिया, बहुत सारी परस्तिती निर्मत
04:06हुई, यानि लास्ट में फिर यूरोपियन देशों को खुद अपने लेवल से यूकरेन युद्व में अभी फिलाल सहयो�
04:21को वो कपजा लेंगे फिर European देशों के भारी विरोथ के बाद ही वो पीछे अटे तो ये सब घटना
04:26क्रम ने भी European देशों के दिमाग में ये चीज़ डाल दी है कि
04:30अब इस पर अमेरिका पर बहुत लंबे भरुसा नहीं कर सकते उन्हें अपना डिफेंस अपने हातों में लेना पड़ेगा और
04:36खुद ही इसकी कमांद समाल ना पड़े तो ये सब घटनक्रम भी हो रहा है अब इस पर अमेरिकन परतिकरियह
04:43क्या है इस बातों को लेकर तो दे�
04:58नेटो अमेरिकी संबंध एक तरह से वन वे स्टीट है, अमेरिका हमेशा मदद के लिए आता है, जबकि ये देश
05:03जब जरूरत पढ़ती है, तो मदद नहीं करते हैं, और उनने ये भी बोला है, मार्को रूपियों ने, कि युद्ध
05:09खतम होने के बाद, हम अमेरिका और नेट
05:11संबंधों की समिक्षा करेंगे और देखेंगे आगे क्या करना है, यहां पर एक चीद ध्यान अवशक है, कि बाइडिन के
05:18समय में इस तरह का नेटो का, मतलब, वो हैं समिधान है, उसमें चेंज किया गया था, कि कि किसी
05:24भी देश की नेटो में निकलने के लिए लगबग ए
05:41अब हम देखते हैं कि वर्तमान इस्तिती क्या है युद्ध की, तो देखी युद्ध की वर्तमान इस्तिती अब काफी और
05:48भीशन होते जा रहे हैं, कल ही अमेरिका नय इरान के एक प्रमुख शहर इसफ़हन में 907 किलो का एक
05:57बंकर बस्टर बम गराया है, इसफ़हन सहर में
06:02इरान के रक्षा से जुड़े संस्थान इस्थित हैं
06:06इसके अलावा इरानी सेना रक्षा उद्द्योग और अत्याधिक जो संबर्देत इन्रिच यूरोनेम है
06:14वो भी स्वान के आसपास ही कहीं अंडरग्राउन रखा हुआ है
06:17इस बात की संबावना तो वहां बम गिराया है
06:19इसके अलावा अमेर्का ने इरान के हमादान प्रांक में इरानी सेन्न मुख्यले के हैटकॉर्टर पर भी हमला किया
06:28अब इस बात का जो जवाब है वो इरान लगातार दे रहा है
06:32इरान भी खाडी देशों पर हमले कर रहा है
06:35निरंतर वो नजनी मिसाइले ला रहा है हमले कर रहा है
06:38और उसने दंकी दी है कि वो आज रात को खाडी देशों में इस्थित जो प्रमुक अमेर की कंपनी है
06:44जिन में Microsoft है Google है Amazon है
06:48इसके अलावा NVIDIA है, DEL है, Intel है, IBM है, Boeing है, HP है, Cisco है, इन सभी पर हमले
06:57करेगा और उसने बोला है आठ बजे के आसपास एक किलोमेटर दूर रहें इसके करमचारी इन दफ्तरों से, तो युद्ध
07:03निरंतर बढ़ता जा रहा है, इसमें कन्फुजन भी बढ़ रही है, पजेश्
07:16इसराइल आवागे हमला नहीं करेंगे, हमारा युद्ध में जो नुकसान हुआ है, उसका हरजाना देंगे, इसके अलावा जो हारमुज स्टेट
07:25पर है, उस पर नियंतरन की भी बात इरान कर रहा है, तो बहुत सारे कन्फुजन हैं, बहुत सारे मांगे
07:31हैं, अब इसका क्य
07:32परिणाम हो सकता है, तो देखी, अब जिस तरह से इस्तिती बन गई है, उसमें, अब जो टकराओ जहां पहुँच
07:39रहा है, उससे पूरी दुनिया में तेल गैस संकट, आर्थिक संकट, शियर बजारों का गिरना, सप्लाई चैन, डिस्रप्शन, ये सब
07:48तो हो ही रहे हैं, �
07:49तो अब आवशक्ता इस बात की है, कि तुरित गती से कूट नितिक बारता हैं, जो कि एजेप्ट टर्की और
07:56कतर की मद्धस्ता में हो, वो चल रहे हैं, हाला कि कैसा कहा जा रहा है, कि ये बैक डोर
08:01चैनल से बारता हैं चल रहे हैं, हाला कि उसके कुछ भी परिड़ा में तक
08:19यहां काम कर सकता है, जिनमें रूस, चाइना, भारत जैसे देश हैं, इसके अलावा प्रमुक्संस थाएं, यूनो, यूरोपियन यूनियन का
08:27भी दवाव काम कर सकता है, लेकिन जिस तरह की इस्तिती बन गई है, अब आवशक्ता इस बात की है,
08:32कि तुरित गती से नेड़न
08:34लिया जाए, इरान अमेरिका के बीच में बातचीत कराई जाए, नहीं तो निश्यत तोर पर आने वाले समय में, ये
08:43युद्ध से पूरी दुनिया को परिशानी आ सकती है, और जिस तरह से अब नेटो ने अपना फर्म रखा हुआ
08:50है, नेड़ने के वो पाटिसिपेट नही
08:52करेंगे, तो इसी तरह से अब जरूवत है कि देश अमेरिका को हाट तरीके से समझाए, कि उनकी नीतियों के
08:58कारण पूरी दुनिया में संकटा रहा है, तो इसे जल्दी से जल्दी समाप्त किया जाए, धन्यवाद.
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