00:00एक अगनी वो होती है जिसके फेरे लेकर विवाह वेदी पर एक रिष्टे की शुरुवात होती है
00:10पर शीमत भगवत गीता में श्री कृष्ण ने बार-बार एक दूसरी अगनी की बात करी है
00:17पर कृष्ण कहते हैं ज्ञान से बढ़कर शुद्ध करने वाली अगनी दूसरी नहीं होती है ज्ञानत अप्सा ते रिष्टों में
00:29ज्ञान की एहमियत क्या है
00:33एक दूसरे को जानना मानिताओं में छगियों में आदतों में फस करना रह जाना
00:41आप जिसको अपना साथी कहते हो उसके साथ पहले से एक तैशुदा जिन्दगी न जीना
00:51मित्रता का व्यवहार करना और मित्र एक दूसरे से बस उमीदें और अपेक्षाईं नहीं करते
00:59दिली नस्दी की आत्मियता का रिष्टा रखते हैं
01:04वो यह नहीं कहते कि हमारा तुम्हारा एक संबंध है और इस संबंध में इतना इतना इतना तुम्हें करना है
01:11तुम्हें ऐसे रहना है यह तुम्हारे करतवे हैं और इतना मुझे करना है ऐसे मुझे रहना है यह मेरे करतवे
01:19हैं
01:19ये मित्रता की निशानी नहीं होती है, ये मान्यता की निशानी होती है, रिष्टा मान्यता पर नहीं मित्रता पर बने
Comments