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  • 6 hours ago
क्या दुरुस्त है देवभूमि? 'विकसित उत्तराखंड' में आजतक के मंच पर चर्चा

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00:00आप सभी मायमानों का सबसे पहले तो शुक्रिया और स्वामी जी मैं सबसे पहले शुर्बात आपी से करना जाओंगा जैसे
00:07कि हमारे सत्र का नाम है दुरुस्त है देव भूमी
00:10धर्म के नजरिये से धर्म के दृष्टी से क्या सब आपको दुरुस्त दिखाई दे रहा है
00:30यह उत्त्राखंड की पवित्र भूमी, यह देवताओं की जाग्रत भूमी है, इस देव भूमी में जनस्रुती है, मान्यता है कि
00:48यहाँ देवता साक्षात निवास करते हैं,
00:53और उसकी अनुभूती अनेक महापुरसों ने सादकों ने की है, यहाँ भगवान बद्री नात हैं, भगवान केदार नात हैं, जागेश्वर
01:12महादेव हैं और मा भगवती नंदा देवी के रूपों में साक्षात यहाँ बिराजित है,
01:29हमारी वैसे तो पूरे देश में एक मांग रही है,
01:33कि भारत संस्कृतिक और धार्मिक भारत का महत्म है, आध्यात्विक महत्म है, तो भारत के अंदर तीर्थाटन और पर्येटन इसमें
01:49अंतर होना चाहिए,
01:52जो हमारे तीर्थ हैं, धाम हैं, उनकी पवित्रता बनी रहे, इसके लिए तीर्थाटन एक अलग विभाग होना चाहिए,
02:06और तीर्थों को पर्येटक इस्थल के रूप में विक्सित ना करके, तीर्थाटन के रूप में विक्सित करना चाहिए,
02:16क्योंकि ये बड़े दुरुलव इस्थल हैं, विस्व में ऐसी पोजेटिवटी, ऐसी पर्मानू,
02:25क्योंकि पूरा विस्व हिमाले की और आकरसित होता है, बड़े-बड़े योगी, उनको जो आत्म ग्यान हुआ है, वो हिमाले
02:35की ही इन गोद में वेटकर हुआ है,
02:40तो वो परवानू वहां बने रहें, वहां का वो सत्व गुण बना रहें, ये बहुत आवश्यक है और इस पर
02:52सरकारों को ध्यान देना चाहिए,
02:56सरकार भोतिक रूप से तो विकास कर रही है
03:00सभी इस्थानों का विकास कर रही है
03:05अभी केदारणात का बहुत अच्छा डेवलपमेंट है
03:09बद्रीनात में हो रहा है
03:11कुमाईयू की तरफ मानस खंड में अनेक मंदरों का सामरिक विकास हो रहा है
03:19बहुत आवश्यक है और बड़ी मात्रा में विश्व का आदमी भारत आता है
03:29तो जिस आध्यात्म और जिस गहराई की खोज के लिए वहे आता है
03:34तो इन इस्थानों पर वहे बना रहे केवल भोतिक आकरसन ना दीखे
03:40तो यह आवश्यक है कि हम इन इस्थानों की एक मर्यादा बनाएं
03:45एक आचार सहियता बनाएं
03:50यह आज की आवश्यकता जो मुझे लगती है
03:53आपने एक बड़ा गंभीर प्रशन उठाया और राधा कृष्ण थपलियाल जी मैं इस पर आपकी भी प्रतिक्रिया चाहूंगा कि
03:59परेटक स्थलों को परेटक स्थल कौन बना रहा है किया सरकारे बना रही है
04:03या वो लोग बना रहे हैं जो उनको परेटक स्थल समझ कर जा रहे है प्राया हा ऐसा देखने में
04:10आ रहा है लोगों ने लोग अलग अलग प्रवित्ती के है और लोगों के अलग अलग प्रवित्ती होती है
04:19पहले लोग जो है कि �ंवल धार्म की आत्रा के लिए यात्रा करते थे
04:23परंतों आज लोगों ने गूमने के लिए यात्रा का उद्ध बना देया
04:32वास्तव में कि जो उत्तरा खंड की धर्ति Verantwortिय जिसको देव अस्तुत रश्याम देशिदेवत आत्मा
04:38जो कवेकुल गुरु कालिल आश्य ने और ये परिकल्पना की थी
04:45अपने सब्दों में ये काता कि ये देव भूमी जो है उत्तरा खड़ जो है देव भूमी है
04:53और इसके स्तुती देवता तक करते हैं
04:57और देवता भी लाला ही तो होते हैं यहां जन्म लेने के लिए
05:00और हमारी ऐसी परंपरा थी कि ये राज सबतरो याता ये न याता पिता महा
05:05हमारी वो परंपरा है हमें उस मारक का अनुकरण करना चीए
05:11जिस पर हमारे पूरवज लोग और आज तक और चले हैं उसी का अनुकरण करना ही
05:18एक तरह से वास्तिव की तीर्थी आत्रा का महत्व प्रधिपादित तरशकता है
05:22तो जो आज की पीडिये है उन्होंने तीर्थ की मरियादा के अनुरूप आचरण करना छोड़ दिया
05:31तो क्या आज युवाओं को आप कहने कि बहाँ जाना नहीं चाहिए
05:33जाना चाहिए परन्त जाकर के तीर्थ की आचरण के अनुरूप अनुकरण करना चाहिए
05:39क्योंकि तीर्थ में किस तरह से रहना चाहिए किस तरह नहीं रहना चाहिए
05:45कम्या भी जागर करी दें कि क्या ऐसा नहीं कर रहे हैं वो क्या आपको लगता है कि जो तीर्थ
05:50सलों में नहीं हो रहा है
05:51बहुत सारी चीजे हैं लोग तीर्थ में इसलिए गाते हैं वहां जाकर के तीर्थ में सबसे पहले तो तीर्थ में
06:01सनान करें
06:01लोग तीर्थ में स्नान न करके
06:04होटल में स्नान करते हैं
06:06पहले मुझे लगबग
06:08बदर काश्रम में रहते हुए
06:1043 वर्स हुए है
06:11मैंने 43 वर्सों तक
06:13भगवान बदरी विशाल की शेवा की
06:15और अभी विगत नॉवम्बर में
06:18मैं वहाँ से शेवा निभर्त हुआ हूँ
06:19तो मैंने
06:21इतने लंबे
06:22शमया अंतराल को देखा है
06:25पहले कि
06:27पहले लोग जब आते थे
06:29तो लोगों में क्या धारणा होती थी
06:31अब वो सने सनी धारणा कैशे बतन गी
06:34मैंने अभी कुछ देर पहले
06:35यहाँ पर सुना था
06:36आज लोग जो है
06:39मंदिर में जाते तो हैं
06:41मंदिर में प्रडाम भी करना चाहते हैं
06:44प्रडाम करने से पहले
06:45लोग डील बनाते
06:49लोगों का ध्यान उसमें भगवार का धर्शन हुआ
06:51नहीं हुआ
06:52इसके प्रती लोग गंभीर नहीं है
06:56लोगों का यह है कि
06:57वहाँ जाकर फोटो कीचते
07:00और फोटो कीचना
07:03लोगों का जो है
07:04एक उद्दी से है या फैशन हो गया
07:09तो
07:11हेमन जी
07:12अगर आपको नही पीडी से शिखायत है
07:14तो नही पीडी को भी आप लोगों से शिखायत है
07:25अब वो फोन एक ही है
07:27लेकिन आप लोग उसके दूसरे दृष्टी से देखते हैं
07:29और आपने जो हाल में जो स्टेटमेंट दिया था
07:32उससे तो आप पर भी आरोप लगा रहा है
07:34कि आप समाज को बाटने का प्रियास करें
07:36कि ये सिर्फ हिंदू आए और बागी दूसरे नाए
07:40नहीं देखिए जो है हमारे धाम है उतराखन के
07:44ये भारत की आत्मा है और ये हमारे प्राचिनतम धाम है
07:48यहाँ पर जो देश दुनिया से जो सनातन धर्म को लोग मानने वाले हैं
07:52वो लोग यहाँ पर एक आस्ता का केंदरे ये कोई नई विवस्ता नहीं है
07:56कि हमने विवस्ता लागो किये ये अनादी काल से जो है आदी संकरा चारजी ने ये विवस्ता बनाई थी
08:01और किसी भी धर्म में चाहे हम मक्का की बात करते हैं ये वेटकन की बात करते हैं
08:14उनको बनाए रखने किलिए उसका सनक्षण की बात करते हैं, तो सिम्ण कलिकER नहीं मैं समर्याद की साधु इस।
08:21इंट्रम की इस्थीwalk भी हिंदु और श्वामी जी नहीं भी बूला है।
08:32स्लस्क्रिण निलिंगर न समय और इन देखरे हैं ऩो हे विजड़ें सोब न पर डिरन करें आधन
08:43या कई � 소리 कींस वापन की荸ं को अवशन सहीज़ करें देखो से अला
08:49आगलता है घ्रागन का यह अले आत्म कुछी से नहीं कि मेला स्वेटён आंगा की
08:54बहुत चर्चा का विशे भी रहा अभी जिस तरह से लोग तीर्थाटन और परियटन देखिए दोनों सर्किट बहुत अलग अलग
09:01है जहां परियटन है वो मनुरंजन के लिए और तीर्थाटन जो है वो सांती के लिए है वो अध्यात्मी के
09:07लिए है वो भगवान के प्रति उ
09:22किदारनाजी और विशेश रूप से किदारनाजी और वदिनाजी क्योंकि वदिनाथ किदारनाथ मंदिर समिती अध्यक्स का दाइद तो मेरे पास है
09:29और मैं वहाँ पर देख रहा हूं जिस परकार की वह आ रही हैं लेकिन उसको लेकर समय की मांग
09:33भी और वहां के स्तानी हमार
09:34तीर्थ पुरुईते हैं जो देश बर से आने वाले जो सनातन धर्म के अनुवाई हैं उन सब की ये मांग
09:38भी थी कि यहां की पौराणिक्ता इसकी पवित्रता और इसकी जो पहचान है उसको बनाई रखने के लिए हमें उसका
09:43सन्रक्षन करना चाहिए
09:47जैजी क्या आप लोग नई पीड़ी को समझ नहीं पा रहे हैं क्या नई पीड़ी जो फोन के साथ जाना
09:53चाहती है उसमें अपति कि अगर वो जाकर वीडियो बना भी लेते हैं तो उसमें धर्म कोहानी कैसे हो रही
10:00है
10:01फोन और नई पीड़ी से तो कोई समस्या ही नहीं है मेरे खाल से मैं इस फोन तो शायद आज
10:06हमारे पास भी उतना ही होता है जितना नई पीड़ी के पास होता है लेकिन अभी एक बहुत महामनलिश्व जी
10:14ने आदरनी है हमारे बहुत सुन्दर बात कई एक तो जब हम तीर्
10:30पॉइंट is fun, enjoyment और जब आप तिर्थातन के लिए जा रहे हैं तो spirituality में और आजकल आप अगर
10:36लिखें quantum mechanics, epigenetics जो spirituality को आजकर कह रहा है कि हम mysticism को science के language में decode
10:44कर रहे हैं वो भी कहता है कि no practice will yield कोई भी आपको लाब तब तक नहीं होगा
10:50जब तक आपका उसमे intent डिफाइन नहीं
10:53अगर आप एक धार्मिक अध्यात्मिक स्थल पे जा रहे हैं आप जाए आपने रील बनाई पंडी जी ने आपके हाथ
10:59से फोन थोड़ी छीना बना के आप लॉट आए वो सिर्फ ये बात इसलिए कह रहे हैं कि आप जिस
11:05स्थान पर जा रहे हैं उसका पूरा लाब आपको कैसे
11:09एक जो ये धर्मस्थान जो होते हैं ये एनरजी सेंटर होते हैं जब आप इंटेंशन से इसकी एनरजी के संग
11:17अलाइन करेंगे तो आपको एमोशनली, मेंटली, फिजिकली और स्पिरिच्वल अलाइनमेंट से आपको फायदा होगा आपकी चेतना जागरित होगी वहां ज
11:37कीजिए जब आप तीर्थ के लिए जा रहे हैं तो उस पावरफुल एनरजी का लाव लीजिए जो वहां पर है
11:44इस ओनली अबाउट दी इंटेंशन विद विच अगर आप तरीका भी बता दें तरीका ये होता है कि मनुष्य की
11:50ना हम लोग आजकल बहाशा कही जाते हैं एन
12:07अगर आपकी चेतना कहा है आपकी कॉंशियसनेस कहा है अगर आपकी कॉंशियस फोकस्ड है आप वहां पर जाकर कि अबगर
12:15वहां पर हम लोगों नहीं कहा कि वहां के कुछ क्रिया कलाप होते हैं वो क्या होते हैं वो स्टेप
12:20बाइ स्टेप आपको अलाइन कर रहे होते हैं �
12:22जब आप उन्हें full awareness से step by step follow करते हैं, वहाँ focus होते हैं, आपको पूरा लाब होगा,
12:28इसमें कोई rocket science नहीं है.
12:30Take complete benefit of your awareness, take complete benefit of that energy center.
12:36It is as simple as that.
12:39It's as simple as that.
12:40Swamiji, आप क्या सुझाव देना चाहेंगे कि जब तीठा तीठा टन करने के लिए आएंगे, तीर्थिक में जाएं, तो क्या
12:47विवहार होना चाहिए, क्या क्या साथ में होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए, वो भी ज़्यादा इंपॉर्टन में.
12:55मैंने पहले ही कहा कि हिमाले और गंगा ये विश्व के लिए दुरुलब है, चोकि ब्रह्मांड की जो ब्रह्मांड ये
13:08उर्जा है, उसका केंद्र भूत हिमाले है, और ऐसे में जब हम पर्यटन की भावना से जाएंगे, तो हमारी भावना
13:21आलग होती है.
13:23पिछले दिनों जयन समाज का जो पवित्र जहर खंड में परवत है, वहां की सरकार ने उसको पर्यटन की स्तल
13:33गोसित किया, लेकिन जयन समाज ने स्वीकार नहीं किया, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ, क्योंकि पर्यटन फिर वहां के उर्जा,
13:43वहां की वातावरान, �
13:45मां के पर्मानू चेंज होते हैं, सब प्रकार का खाना, पीना, सब प्रकार की आजादी हो जाती है, हमारा बहुत
13:54बड़ी मात्रा में युवाओं का आकरसन हमारे धार में किस्थल की और बढ़ा है, ये बहुत अच्छी बात है, मैं
14:01स्वागत करता हूँ, और जो युवा है
14:05वास्तब में धर्म और आध्यात्म में उसकी गहराई में जाना भी चाहता है, आउशकता है हम लोगों की कि हम
14:14उनको सही मारदर्सन, सही दिसादर्सन और सही रास्ता बता सकें, तो ये जो हमारे इस्थान है, ये केवल कोई मंदिर
14:30का एक इस्ट्रेक्चर बना दिया ऐसा न
14:36बद्रीनात उसी इस्थान पर क्यों है, आखिर 17 वर्स की आयू में केरल से और आधी संक्राचार केवल उनको एक
14:48बोध था, कि जहां पर अलकनंदा और सरस्वती का संगम है, वहां नारायन ने तप किया, उस भूवी में तप
14:57किया है, तो भगवान नारायन की तपश्या का �
15:01तेज वहां विद्देमान है, तो वह तेज वहां बना रहे है, तो जैसे रील से हमें आपती नहीं है, रील
15:10बनाएं, फोटू कीचे, यह तो एक स्मर्ती है, लेकिन ऐसे इस्थानों पर जाकर उचलना, कूदना, हला मचाना जोर-जोर से,
15:20धनी परदूसन करना है, जोंकि य
15:31ध्यान करना चाहिए, आप ध्यान मुद्रा में अपना वीडियो बनाएं, कोई आपती नहीं है, लेकिन वहां जाकर, चुकि आज दुनिया
15:41में कहीं ना कहीं थोड़े दिन में बात चलेगी, कि बड़ी मात्रास में इस वाईयो मंडल में ध्वनी प्रदूसन होता
15:49जा रहा ह
15:50जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन इसके परणाम सामने आएंगे मनुश्य के, तो इन इस्थानों की जो अलोकिकता
16:00है, जो पवित्रता है, उसके लिए एक आचारे सहींता बननी चाहिए, जिस परकार से हमारे सिक्ष समाज ने अपने गुरदवारों
16:09की बनाई है
16:11इसलाम ने मक्का मदीना की बनाई है, हमें आपति नहीं है, उन्होंने कहा कि गैर मुसलीम यहां नहीं आ सकता,
16:17हमें आपति नहीं है
16:20होना भी चाहिए इसी प्रकार से देव भूमी उत्राखंड इसको देव भूमी कहा है और यहां प्रतक्ष छे महीने तक
16:30भगवान बदरीनात की पूजा अर्चना देवता करते हैं
16:35छे महीने देवताओं को अधिकार दिया है तो इसलिए जो यह हमारा पवित्र सनातन धर्म है उत्राखंड में सनातन धर्म
16:46उसकी मर्यादा उसकी परंप्राओं का ही अधिकतर पालन होना चाहिए
16:51राधा कृष्ण थपनियाल जी क्या आधुनिक परियाटन से तीर्थ स्थलों की पवित्रता प्रभावित हो रही है तो कैसे ऐसा है
17:01आज का जो
17:07आधुनिक लोग जब जाते है न उसके कारण बहुत सारी चीजा है वो अपनी तरह से कड़े लग जाते तो
17:18उसके कारण
17:22कदाचित धामों की जो मर्यादा है उबादी तो होती है परंत उसके लिए लोगों को सचिस्ट होना चीए कि दाम
17:31में गए हैं तो धाम की मर्यादा को बनाए रखने के लिए उन्हें प्रयास करना चीए और मेरी युवाँ से
17:38प्रार्तना है निवेधन भी है कि यह दि जाते
17:44करें धाम की मरियादा को
17:46बनाये रखना है
17:48और आप उतना इतने बहुत
17:50दूर से आते हैं लोग
17:51और वहां जाकर के
17:53अगर वहां की जो मरियादा है उसका ही
17:56पालन नहीं करेंगे उसका
17:58उसकी जो वास्तिविक उरजा प्राप्त करना
18:00आपका लख्ष होना चीए
18:02उस उर्जा को प्राप्त नहीं करते हैं,
18:05तो आपका जाना नजाना मेरी दिष्ट में और ठीक नहीं है,
18:11क्योंकि आपको वास्ते हैं कि लाब मिलेगा ही नहीं,
18:16और यदि आपको लाब चाहिए तो तीर्थ के अनुकूल आचरन करना चाहिए,
18:22और वहाँ जाकर के आनन्द की अनुभूती भी आपको तब प्राप्त होगी,
18:26क्योंकि हिमालय में आनन्द का ही शिरूत है,
18:29और वहाँ आनन्द जो है अपने रहे के अंतर से ही प्रकड़ हो शकता है.
18:36हेमन जी, नए नियम लेकर आने से क्या सारी चीजें मर्यादित हो जाएंगी?
18:45नहीं, देखी आप यात्राएं तो लंबे समय से इन धामों पर जो है कि जब से सनातन धर्म पूरे दुनिया
18:52के अंदर है,
18:55लाखों करोणों तीर्थियाति यहां पर आते रहे हैं और लगातार संक्या में देखिया आप तीर्थियातियों की संक्या में लगातार बड़ोतरी
19:02हो रही है।
19:24लगबग साड़े दस लाख लोगों ने जो है कि यात्रा के लिए अपना पंजिगर्ण कराया है और लगातार संक्या वहां
19:30बढ़ रही है लेकिन उस ब्यवस्ता को बनाने के लिए वहां पर जो संक्या की संक्या की भड़ोतरी होने के
19:37कारण क्योंकि हमारे पास वहां सीमित
19:39चेत्रे और मंदिर में जो मंदिर परिशर है या दोनों दहां में माजबाज बदर नाजी के दार नाजी वहां पर
19:45संक्या की उसको देखते हुए मैं समझता हूं कि कुछ हर मंदिर की परंपरा और संविधान में भी विवस्ता है
19:50कि वहां पर आचार संहिता है उस आचार सं
20:06सब के लिए बहुत आवश्यक है लेकिन उस मोबाइल के कारण इतनी सारी व्योहारिक दिक्कते वहाँ पर हो रही है
20:11जब मोबाइल लेकर वहाँ पर मंदिर प्रांगण में गर्भ ग्रह और मंदिर परिशर के आसपास आते हैं तो आप देखते
20:17हैं लाखों की संक्या में वहा�
20:32आते हैं ब्लॉगर आते हैं और विवर्स आते हैं वहाँ पर अपने विवर करने के लिए लेकिन उस मंदिर परिशेत्र
20:37के आसपास में वो व्यवस्ता बनाए रखे क्योंकि उसके कारण जो सामान ने तीर थियात्री उनको बहुत दिक्कतों को सामन
20:42करना पड़ता है व्यव
21:02आज उत्राखंड राजी के अंदर में तो आपके मंचे की माद्यम से अपने देश की यह सेश्वी प्रधान मंतरी आदरी
21:07है नरेंदर मोधी जी ने जिस परकार से इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया आज चार धाम की ओल वेदर सड़के हैं
21:12आज एर कनेक्टिविट ही है ल
21:28जिसी के सकंड प्रयाग रेल मार गए उसके द्वारा भी संख्या बढ़ेगी लेकिन किसी भी धार्मिक स्थल की मैं समझता
21:33हूं कि जो हां की मरियाद है उसको पालन तो सबको करना ही चाहिए जैरी क्या धार्मिक स्थलों पर शांदार
21:40इंफ्रास्ट्रक्चर क्या पिसका सम
21:56मंदिर थे वो ध्वस्त हो गए लेकिन अगर आप महाराष्ट से नीचे शिवाजी ने जाने नहीं दिया जो आक्रमनकारी थे
22:03आप दक्षन के मंदिर देखिए क्या भवयता है मंदिरों की अगर हमारी सिविलाइजेशन का गौरव और उसकी रिचनेस दिखती है
22:12परंपरा�
22:25है सनातन धर्म जो है वो यही मानता है कि स्रिष्टी में जो सब कुछ है वो उस परमचेतना उस
22:31परमेश्वर का उस इश्वर का रचा हुआ है तो हमारी जो लाइन आती है तेरा तुझको अरपन अगर हम अपने
22:37जीवन में भव्यता से और अपने जीवन में हम एश्वर से स
22:41समरिधी से with abundance जीते हैं तो हम उसका सब से पहले जो दशांच है वो उस ईश्वर के निमित
22:48अर्पित करते हैं मंदिर वो केंद्र हैं जहां यह अर्पित किया जाता है और वो भव्यता उस इष्ट के प्रतीबी
22:54है और वो भव्यता वहाँ पर जो श्रद्धालू आ रहे हैं उन
23:07develop कर रही है उस infrastructure को ना वहाँ गर्ब गरह में बैठा हुआ इस्ट प्रयोग कर रहा है वहाँ
23:13पर जो भी
23:14infrastructure अब infrastructure भी plus system भी अगर जो आपने नियम की बार की what is
23:19नियम जब हम नियमों को एक साथ लेकर आते हैं तो उसे system कहा जाता है जब अगर
23:23वहाँ पर कोई चीज अनुचित हो जाए तो हम वहाँ पर जितने भी जो
23:28responsible लोग है उनको कहते हैं इन्होंने system नहीं बनाया था इनकी क्या
23:31जिम्मेदारी थी और जब वो बनाते हैं तो उसे question भी किया जाता है तो वहाँ पर जो लोग आ
23:36रहे हैं अगर
23:53जिनके लिए परिश्रम या उतना समय संभव नहीं था वो नहीं जा पाते थे आज
23:58accessibility बड़ी है आज वहाँ पर जो टर्न लोग आ रहे हैं वो बहुत जादा है तो वहाँ पर उसी
24:04प्रकार की सुविधाएं उसी प्रकार का
24:07इंफ्रस्ट्रक्चर उसी प्रकार की नियम बनने इसी लिए हमने जब विकास की बात करते हैं तो विकास इस
24:13situation which is better than the previous one तो अगर परिस्तिती बदल रही है तो उसके अनुरूप सुविधाएं उसके अनुरूप
24:20वहां का
24:21पर उसके अनुरूप वहां के नियमावली बदलनी पड़ेगी यह किसी की विम और फैंसी नहीं है इस रिक्वाइर्मेंट जो हमारी
24:30आज की जो आवश्रक्ता है उसके अनुरूप यह तो जरूरत है आप से अवश्रक्ता बोने सौमी जी मैं इस पर
24:35आपकी भी प्रतिक्रि
24:50का वदब शेरों में और उस जगह में दिखे मेरा मानना है जैसे भगवान के दारनात हैं बदरी नात हैं
24:57और भी उत्राखंड में बड़े प्रमुक इस्तल हैं जहां निर्मान होने हैं तो कम से कम जो मंदिर का प्रवंद
25:08तंत्र हैं उजारी लोग हैं या बाकी विवस्था
25:13वो तो मंदिर के पास रहें बाकी मंदिर से कम से कम एक या डेड़ किलोमीटर दूर जो भी यात्री
25:23निवास है बजार है कुछ भी है वो मंदिर से एक या डेड़ किलोमीटर दूर होना चाहिए
25:30किदारणाजी में भी जितना हो गया है उतना रहे बाकी थोड़ा नीचे आकर बनना चाहिए और जो हैलिपेड है वो
25:38भी कब से कम एक किलोमीटर एक डेड़ किलोमीटर पैदल जाए आदमी भगवान का नाम लेते लेते जाए ऐसा होना
25:47चाहिए और हमारे ही देश में जब ह
25:59तो वहाँ अगर कोई घर भी बनाता है तो वहाँ की संस्कृती के अनुरूप उनको अपने घर का डिजाइन देना
26:07होगा
26:08तो इसी प्रकार से हमारे उत्त्राखंड का भी धार्मिक स्तलों पर विशेश कर
26:15कि वहाँ उत्त्राखंड की संस्क्रति दिखाई दे
26:23यह जो एक आधुनिक चलन चल गया है
26:27स्वीधाएं हों मैं उसका समर्थन करता हूं
26:31लेकिन उसके साथ-साथ हमारी संस्कृति, हमारी परंप्राएं उस भवन के डिजाइन में दिखाई देनी चाहिए
26:39और मंदिर कम से कम एक किलोमीटर या आधा किलोमीटर से जब यात्री आ रहा है तो पूरा मंदिर उसको
26:49दिखाई देना चाहिए
26:50दीरे-दीरे होगा क्या पहले भी केदारनाथ थे वो चारों तरब से ऐसे घर गए थे कि जब अंदर पहुंच
26:58जाते थे तब लगता था केदारनाथ
27:01नहीं तो तीस-चालिस साल पहले दूर से किदारनाथ का सिखर दीखता था तो लोगों को लगता था कि महादेव
27:10बैठे वो भावना थी तो बहुत जादा अगर हम यह कर देंगे और ठीक है मंदिर से परियापत रोजगार निकलता
27:25है भारत में केंदर सरकार राज्य सरकार �
27:29जितना रोजगार देती हैं उससे कम से कम दस गुना जादा हमारे धार्मिक इस्थल भारत के अंदर लोगों को रोजगार
27:38दे रहे हैं लिकिन मंदिर की सम्रद्धी या मंदिर का महत तो इसी से नहीं आखना चाहिए कि मंदिर ने
27:49साल भर में क्या दिया
27:50वहां होना चीए कि मंदिर ने साल भर में क्या क्या किया चिके साल ले चले वहां के आसपास के
27:59मंदिर उस मंदिर से उनकी जोत जले गुरुकुल खड़े हो
28:05हमारे यां गुरुकुलों की कमी है
28:06तो ये सारा जो धन
28:08सरकार में जाता है
28:10तो मंदिर
28:12जितने भी हमारे धार्मिक इस थलों पर
28:14इस परकार की भक्तों की
28:16सरद्धा का धन है
28:18वो सनातन हिंदू धर्म
28:20के ही उपयोग
28:22में आना चाहिए
28:23वो सरकारी खजाने में नहीं जाना चाहिए, विवस्था बेसक सरकार करें, लेकिन उसका उपयोग, जो कि जो सरधालू ने धन
28:32दिया है, वो सनातन धर्म के लिए ही दिया है, तो उसका उपयोग भी उसी में होना चाहिए.
28:41अब यू तो प्रशने बहुत सरे, लेकिन मैं भी इस पर थोड़ा सा ध्यान के इंजरत करना चाहूंगा, कि जो
28:45शधालू महाँ पर जा रहे हैं, क्या मंदिर जाना ही आवशक होता है, मदब दूर ट्रावल करके जाते हैं, दिक्कते
28:51होते हैं, क्योंकि लोगों की ये शिकायत
28:53होती है, क्या हम दर्शन नहीं कर पाते हैं, अगर कर पाते हैं, तो मुश्किल से एक मिनट उसके बाद
28:57उनको आगे बढ़ा दिया जब ये की परिशानी है, कि भी वहाँ पर बहुत ज्यादा होती है, देखिए, जो माई
29:05जून का समय होता है, क्योंकि प्रत्यक दिन 30-35 जार
29:09आजमी आता है, और स्थान कम है, और सुवे से साम तक लोग लाई में लगे हैं, तो जो साम
29:16को आएगा, उसको ततकाल तो दर्शन नहीं हो पाएंगे, उसके लिए उस दर्शनार्थी को प्रतिक्षा तो करनी ही पड़ेगी, परंतो
29:25यदि वदरिकास्टब में गये हैं, या
29:38हमारी हाँ शास्त की परंपरा है, मर्यादा भी है, कि लोग शिखर धर्शन करके भी वापस आ सकते हैं, अगर
29:46कदाजीत किसी का स्वास्ति कराब हो गया, कोई वहार रहने में दिक्कत महसूस करता हो, किसी को सांस की प्रोबलम
29:55हो गई, अधवा बहुत सारी चीजें हैं, जि
30:08तो संबव क्योंकि जब बहुत ज़्यादा यात्रों की शक्या होगी, तो उन लोगों को भी धृशन करने हैं, उनका ध्यान
30:15रखते हुए और सबको धर्शन पंक्ति में ही लगाए जाता है, और दर्शन पंक्ति से लोगों को धर्शन भी करने
30:22चैंए, मेरा तो आग्रा भी
30:23है अनुने निवेदन भी है कि लोग आएं दर्शन पंक्ति में ही लगें और बड़ी शाली तरह से दर्शन करेंगे
30:32तो आपको अबस्य लाव होगा है
30:34हम आदमी आता है वो दर्शनों में लगता है लेकिन हीमन जी एक ऐसी विवस्ता भी है जिसमें विए पी
30:40को कहीं पर
30:40इन में नहीं लगना पड़ता है उसके लिए सीधा डिरेक्ट एंट्री है देखिए मैं आपके चैनल के माध्यम से देश
30:48बरसे आने वाले स्रदालों इस बार वहां पर पहुंचेंगे बहुत सारी बेवस्ता हैं समय के साथ साथ जैसे मैं कह
30:53रहा हूं कि संख्या लगातार ब
31:10हम जो आने वाले स्रदालों हैं जो हमारे तीर्थ यात्री हैं उन्हीं की व्यवस्ताओं पर खर्च किया जाता है और
31:15हमारे साथ संस्कृत विद्याले वहाँ पर चलते हैं और लगबग 27 हमारी धरमशला हैं स्री बद्री कीदार मंदिर समीती की
31:21जो यात्रा रूप पर है उ
31:26सारा हम जो है कि मंदिर की व्यवस्ताओं में जो है उनको लगाते हैं और जहां तक आपने ये व्याइबी
31:31वाली बात किये लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारी प्रात्मिक्ता उस पंक्ती में खड़ा हुआ वो स्रदालू है
31:37और इस बार हमने हमारे वहां के हक अक
31:50पुगदारी हैं तीर्थ पुरोईथ हैं मंदिर की करमचारी अधिगारी गणे जिला प्रसासने सब के साथ सामंजा से बिठाने की बाद
31:56में इस बार हमने कुछ वहां पर एक सोपी बनाई है कि किस तरह से दर्सनों की विवस्ता रहेगी क्योंकि
32:03वो जो गर्व ग्रह हमें �
32:05एक दिन में लगबग बदिनाजी के अंदर तो 25-30,000 में जून में जो रहता है तीर्थ यात्रियों को
32:10दर्सन कराने पड़ते हैं वही बदिनाज में और केदारनाथ में लगबग लगबग यह संख्या रहती है और उसमें देश बर
32:16से आने वाले कुछ वी आईपी भी रहत
32:30दूंगे और बहगवान केदारनाजी को क्योंकि बंद न जीमें बें दो यह विवस्ता नहीं है वहाँ пар बाहर से हमारे
32:35दstell को दर सं रह ब्स देंगे डिन के टाइम पर वहांपर पूजा के लिए जो है की समय जब
32:43हमारे तीर थीयात्रि आते हैं तो वह पर अंदर पूझा क
32:45लेकर वो विवस्ता कहीं नहीं हो रहता है तो वो सारी पूजाएं हमने रात को कर दीएंगी रात 11 बजे
32:50से लेकर और सुबरे 4 बजे तक यह वी आएपी दर्शन तो होंगे लेकिन समय बदल गया वी आएपी दर्शनों
32:55के लिए हमने एक विवस्ता है उसकी एसोपी है देश�
33:18इस आएपी दर्शन के संदर मेरा सवाल है कि ऐसा क्यूं है इश्वर सब के लिए एक है उसको दर्शनों
33:23का भी वैसा ही हाक है तो वी आएपी के लिए अलग क्यों कि वो जादे धनवान है जसलिए मुझे
33:28नहीं पता कि मुझे सारे वी आईपी के पास कितना धने इसकी तो �
33:34लेकिन मैं क्योंकि थोड़ा सा प्रशासन में भी रही हूँ,
33:39तो मुझे लगता है कि ये एक बहुत टाइट रोप होता है
33:42किसी भी management committee के लिए, बहुत ही तलवार की धार है.
33:48अब जब कोई, I don't know, VIP में अगर हम किसी government
33:52या कोई भी political leader आ रहा है,
33:54तो government की तरफ से उसका भी एक security protocol है, ठीक है?
34:01अब अगर वहाँ पर वो line में है, वो security protocol से लोगों को समस्या आ रही है,
34:05तब भी सवाल होते हैं, अब अगर वहाँ पर कोई security issue आ जाता है,
34:10तब भी लोगों को समस्या होती है,
34:12तो अगर मेरा व्यक्तिगत opinion माना जाए,
34:15मैं इसमें बहुत जादा management की या government की तरफ से नहीं बोलूँगी,
34:20इसमें दो चीज़ें आती हैं, कि एक जो व्यक्तिग जा रहा है,
34:24वो वी आईपी की तरह जा रहा है, या वो समाने व्यक्ति की तरह जा रहा है,
34:27बिना इनफॉर्म किये, वो उसकी अपनी भी एक अपनी चेश्टा होती है,
34:32कि वो कैसे जा रहा है, और अगर वो वहाँ पर अपने बारे में इनफॉर्म करके जा रहा है,
34:37तो इस तरीके का सिस्टम की वो फटा-फट आए और फटा-फट करके चला जाए,
34:41जिससे सिक्योरिटी इशूज और लोगों को जो दर्शन सामाने लोग जो शद्धालों है,
34:46वो जो दर्शन कर रहे हैं, उनके दर्शनों में भी बाधाना है,
34:49क्योंकि ये मेरे साथ एक अनुभव हो चुका है,
34:52हमबई में सिद्धी विनायक में,
34:53कि अगर कोई थे विशिष्ट थे, लेकिन उनने का नहीं मैं लाइन में ही रहूंगा,
34:58मैं नहीं जाओंगा विआईपी दर्शन के लिए, मैं रहूंगा,
35:01और उनका खड़ा होना हमारी लिए थोड़ा ज्यादा समस्या बन की,
35:05बशर्टे की वो शुरू में जल्दी से जाकर के दर्शन करके निकल जाते,
35:08क्योंकि उनका जिन लोगों के पास उनका सिक्योरिटी प्रोटोकॉल मेंटेन करनी की जो जिम्मेदारी थी,
35:14उन लोगों ने जादा अव्यवस्था वहां बना दी थी,
35:17बशर्टे वो खड़े तो रहे लाइन में,
35:19लेकिन उस से हमें जादा समस्या हुई,
35:20तो ये स्थान मेरे जो मैं प्राक्टिकल ग्राउंड पर मैं देखती हूँ,
35:24कि या तो इस तरीके के लोगों का कुछ टाइम अलग हो,
35:40जहाँ पर प्रोटोकॉल्स भी मेंटेन करने हैं,
35:42और सामाने लोगों को भी समस्या ना हो,
35:45स्वामी जी इसी सवाल को आपके पास लाते हुए,
35:48कि ये समस्या हम जब गुरुदवारों में जाते हैं,
35:50तो वहां तो नहीं दिखाए देती,
35:51समस्या हैं, जैसे कि उजिक्र करें,
35:54निसंदे होती होंगे परिशानिया व्यवस्ता में,
35:57लेकि गुरुदवारों में तो जाते हैं,
35:58वहां तो किसी तरह का, मतलब इस तरह की चीज़े नहीं दिखते हैं,
36:13हाँ पर होता है, आप प्रियोरिटी लाइन से जाते हैं,
36:21आप जितने भी बड़े गुरुदवारे आप देखेंगे,
36:24जितने भी बड़े गुरुदवारे आप चाहें,
36:27आप जितने भी बड़े गुरुदवारे आप चाहें,
36:28हरमंदर साहब है, रकाब गंज है, शीश गंज है,
36:31आप जितने भी गुर्द्वारों में जाएंगे, उनके जो परिसर हैं, अगर आप हमारे परम परागत पौरानिक वैदिक, ने वैदिक मंदिरों
36:39से अगर उनके परिसर देखें, तो हमारे परिसर, हमारे गर्ब्रह बहुत छोटे हैं, बहुत जो एंशियन टाइम से हैं, और
36:59
36:59पर सुगमता जादा है, रोक करके लाइन में खड़े करके सुगमता है, तो कर दीजे, और अगर आप फट आईए,
37:05करके निकल जाएए, बाकी लोग आराम से करें, तो उसमें देख लिजे, ये मेरा व्यक्तिकत मत है, अब स्वामी जी
37:11आपका मत क्या है इस पर, दिखिए हम
37:13उत्राखंड में रहते हैं, और पूरे विश्व के साथ जुड़े है, जिस समय यात्रा सीजन चलता है, तो हम लोगों
37:26के उपर भी एक परिसर रहता है, पूरे विश्व से आने वालों का, कि महराजी हम आ रहे हैं, या
37:32हमारे कोई आ रहे हैं, जरा वी आईपी दरसन करा दी
37:38नहीं मिलना है, यह बहुत बड़ी सबस्या हम लोगों, तो हमारे सनातन हिंदु धर्म में थोड़ा ये व्याईपी कल्चर आ
37:48गया है, अन्य स्थानों पर नहीं है, कभी-कभी अमरसर भी हम जाते हैं, बंगला साहिब भी जाते हैं, दरवार
37:58साहिब में, वहां विवस्ता है
38:00लेकिन एक अलग रास्ते से हमको अंदर एक अलग लाइन रहती है, उसके बाद फिर लाइन से ही जाते हैं
38:08हम लोग भी, वहां विवस्ता है, और जैसा बहन जी ने बताया कि वह इस्थान बड़े-बड़े हैं, तो थोड़ा
38:17हमारे सनातन हिंदु समाज को ये व्याईपी कल
38:23इस से क्योंकि आप जब मंदिर गए हैं, हमारे अनेक महापुरसों ने ये बात कही है, आपने भगवान का दर्सन
38:33किया, ये महत्तु का नहीं है, आप देखते रहिए, भगवान ने आपको देखा या नहीं देखा, उनकी दरष्टी आप पर
38:43पड़ी या नहीं पड़ी, महत
38:45तो इस बात का है, और जब आप बद्री नात पहुँचे हैं, तो भगवान हैं, लेकिन वो पूरा का पूरा
38:55छेतर ही भगवान का स्वरुप है, जब आप के दार नात पहुचे हैं, तो वो पूरा का पूरा छेतर ही
39:02के दार नात है, आप कहीं भी बैठकर भगवान का इस्म
39:15ये हमारे समाज में भी आना चाहिए
39:17क्योंकि जब हम
39:20एक VIP की भावा से जारहे हैं
39:23तब हमारी भावना में कहीँ न कहीँ
39:25सरद्धा का जो परणाम है वो परिवाफ है वो कम हो जाता है
39:30और कहीँ न कहीँ न कहीँ एहिंकार मै वो बढ़ जाता है
39:34तो उस इस्थान पर जाकर हमको जो उस इस्थान से जो हमारी बैटरी चार्ज होनी चाहिए
39:44तो हम तो वहाँ और उल्टा और दूसरा संसार में हमारे सास्त्र कहते हैं
39:53कि अन्य छेत्रे करतम पापम तीर्थक छेत्रे विनश्यति
39:59संसार में विचरन करते करते जाने अन जाने जो पाप होते हैं
40:04वो तीर्थ में जाकर वो सब समापत हो जाते हैं
40:08किन्तो तीर्थक छेत्रे करतम पापम
40:10अगर तीर्थक छेत्र में आप से पाप हुआ है
40:15मन से हुआ हो कैसे ही हुआ हो
40:17तो फिर उसकी कोई गती नहीं है
40:20उसका कोई प्राश्चित नहीं है
40:22उसका कोई अंत नहीं है
40:24लंबे काल तक जीव को वो पाप भुगतना पड़ता है
40:29जेलना पड़ता है
40:30स्वामी जी चुकि समय की कम्यें
40:31मैं फिर भी आप से एक चीज समझना चाहूंगा
40:35कि जब लक्षय शान्ती है
40:37शुकून के प्राप्ती है
40:39तो हम लोग यतनी भागदौर क्यों कर रहे है
40:41कोई नौ करें कर रहा है
40:41कोई दूसरी चीज़न 형कर रहे है
40:43तो बिना यह सब भागदौर की
40:46भी तो शान्ती प्राप्त हो जाती
40:47तो आदमी, थोड़ा सा बताएं, करें क्या व्यक्ति
40:50दिखिए, मनुष्य की एक आवशक्ता है
40:58हमारे हां ब्रह्मचर्ये, गरस्त, वानप्रस्त और सन्यास
41:04सीखना, अर्जन करना और फिर धीरे धीरे छोड़ना
41:10और अंत में परमात्मा में लीन होना
41:12यह पूरा एक बना है, कि पहले आप उपर जाएं, फिर अंत में जाएं
41:18और यह जो कहा है, हमारे हां कमाने के लिए, धन कमाने के लिए
41:26कोई मनाई नहीं है, आपने जो विद्या सीखी है, उस विद्या के द्वारा
41:31धन अरजन करिये, लेकिन उसके साथ एक सब्द जुड़ा, धरम पूर्वक, धरम पूर्वक धन अरजन करें और उसको परमार्थ में
41:43लगाएं, तो कमाने की मनाई नहीं है, जो जितना कमाएगा परमार्थ उतना ही करेगा, एक लंबा विश्य हो जाएगा, बिल्कु
41:53बिल्
41:55धर्म पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो धर्म चूड़ जाएगा, जब धर्म पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो फिर ये
42:00धन चूड़ जाता है, यदि धर्म पर ध्यान रखते हुए धन का अरजन करेंगे, हमारे यहाँ धनात धर्म ततस सुकम,
42:09एक शूत्र है, तो धन से
42:12धर्म का अरजन करना चीए
42:15और यदि हम
42:16धर्म पूरवक धन का अरजन करेंगे
42:18तो कभी हमारा पतन नहीं होगा
42:20और हम धर्म के मारक पर ही अग्रिशर होंगे
42:25अब जूंकि समय बड़ा कम है
42:26हेमन जी आपकी भी प्रतिक्रिया इस पर ले
42:28अब बिल्कुल ठीक बात है
42:30और मैं आज तक के माध्यम से
42:33जरूर एक कहना चाहूंगा इस कारकरम का
42:35नाम भी है कि दुरस्त
42:37उत्राखंड तो
42:38आने वाले जो देश बर से यात्री हैं
42:40वो सभाएं पूरी सरकार और बदरिकेदार
42:43मंदिर समिती और हमारी जितनी भी टीम है
42:45वो सभी देश दुनिया से आने वाले
42:47तीर थियात्रियों के लिए सारी व्योस्ताओं को दुरस्त किया गया
42:51लोगों को ये बताते जाएं कि हर साल के नियम
42:53सक्त से सक्तों नहीं करते चले जाएंगे आप
42:55नए नियम सक्त नहीं कर रहे हैं देखिए समय के साथ आप देख रहे हैं कि संख्या लगातार तीर थियात्रों
42:59की बढ़ रही है और जिस तरह से उच्छी हमाले छेत्रों में हमारे तीर तस्तान है यहाँ पर सीमी तस्तान
43:05है उन व्यवस्ताओं को करने के लिए इसलिए हमने �
43:07जो ये टोकन सिस्टम है जो ओन-Line and Registration सिस्टम है यह सुरक्सा और सेफ्टी की द्रेस्टी से इसलिए
43:12यह वेवस्ताइं की गई हैं कि इस समको पता लगता रहता है कि किस रूट पर कितने यात्री यहां पर
43:16जारे हैं इस दाम पर कितने लोगों का रेस्टेशन है तो संक्
43:32सुरक्षित और सुलब दर्सना मन को उपलब करा है
43:37जादा ध्यान
43:38जादा महत्वपूर्ट जीवन में
43:39क्या है धन या धर्म
43:42बैलेंस
43:43सबसे इंपोर्टन्ट है जो हमें
43:45हमारा धर्म भी समझाता है वो है बैलेंस
43:47एक श्लोक आता है धर्मस से
43:49मुलह अर्थ एक आपको व्यक्ति है जिसके पास
43:52consistent insecurity है financial security नहीं है
43:55घर की कुछ चीजों की insecurity है आप उस
43:57consistent insecurity के बीच में उसे बोलिए कि वो बैट कर ध्यान करें
44:01आप focus नहीं कर पाएंगे जो चीज आपको
44:04bother कर रही है वो consistently आपके
44:06दिमाग में घुमेंगी तो हमारे
44:08शास्त्रों ने यह बताया है कि सबसे
44:10पहले जिसे हमने का ना कि अर्थ
44:12जो है अर्थ धर्म का मोक्ष
44:14तो अगर आपको
44:16धर्म का अनुसरन करने के लिए
44:18भी कुछ चीजें सुन्योजित करनी पड़ेंगी
44:21हमारी वेवस्ता आप देखे समाज के और सादूसंतों की
44:24एक सादूसंत है जो समाज के कॉंट्रिबूशन पर वो अर्थ का अर्जन करने के लिए नहीं जा रहा है
44:29वो अपने स्थान पर बैठ रहा है तो आप उसे अपने कमाई हुए अर्थ का एक हिस्सा देते हैं
44:46इसलिए यह जो बैलन्स है कि कंसिस्टेंटली आप सिव एक ही डारेक्शन में यह बैलन्स आपको साइकोलीजी भी सिखाती है
44:52यह बैलन्स आपको स्पिरिच्वालिटी और धर्म भी सिखाता है कि हर चीज के लिए समय निकालिये
44:59यह भी कहा जाते है शरीर माध्यम खलू धर्म साधनम, अगर फिजिकली फिट नहीं है, गुटनों में दर्द है, तो
45:05अभी ध्यान में नहीं बैठ पाएंगे, तो सभी चीजों की जरुरत होती है, यह बैलेंस की, अगर आपने कम्प्लीटली धर्म
45:12को परस्यू करना है, तो आ
45:27सच बता हूं, आपके आंत्रिक चेतना से ही आपको मिलता है, क्या बात है, आप सभी महमानों का एक बार
45:33फिर से शुक्रिया, आप इस मंच पर आए, इस मंच के आपने शुबह बढ़ाएं, मैं एक बार पजाता हूं, जोर्दार
45:37तालियां हो जाएं मारे साधी, महमानों के �
45:38जोरी बहुत शुक्रिया, ताइक झाए मच मुझ धन्याया.
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