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उत्तराखंड के विकास को लेकर क्या बोले नरेंद्र सिंह नेगी? आजतक पर पूछे गए सवाल
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00:00देवभूमी उत्राखंड की मिट्टी की खुश्बू, पहाडों की पीड़ा और जन भावनाओं की सच्छी आवाज
00:05उत्राखंडी लोक संगीत के आप्रतीम हस्ताक्षर नरेंद्र सिंग नेगी जी के लिए
00:12जोरदार तालियां हो जाएं और इस सत्र को मैं ही राजीव ढॉन डियाल आगे बढ़ाऊंगा
00:38तुसर विक्सित उत्राखंड के इस कारिक्रम में आप आए हैं और उत्राखंड के लोग आपको बड़ा मानते हैं
00:43मतलब जब तक आपकी मुहद ना लगे उत्राखंड के लोग मानते नहीं कि क्या एक्शुली ऐसा है
00:48आपने जो कह दिया आख मुंदे उत्राखंड के लोग उस पर भरोसा कर लेते हैं
00:53लेकिन आप से मैं समझना चाहूंगा क्योंकि आपने उत्रप्रदेश से लेकर उत्राखंड के इस यात्रा को देखा है और लड़े
01:00और जूझे भी हैं आप
01:01कितना बदला है आपके नसर में उत्राखंड
01:06अब ये कहना तो बड़ा आसान नहीं है कि कितना बदला है
01:12लेकिन अब विकास तो एक सतत पर किरिया है और वो अभी उत्राखंड बहुत पुराना राज्य तो नहीं है
01:22लेकिन विकास की राह पर है हाँ लोगों की अपेक्षाएं बहुत थी क्योंकि ये राज्य हमको एक बहुत बड़े आंदोलन
01:34के बाद ही मिला है
01:35पड़े संगर्सों के बाद और सहादत के बाद ये राज मिला है तो अपेक्षाएं लोगों की बहुत जादा हैं कूट
01:44कूट कर भरी हैं
01:45तो संतुस्टी लोगों की इतनी आसानी से होती नहीं है कि राज बिक्सित हो गया ये बहुत बहतर काम कर
01:54रहा है
01:55लेकिन उनके अपेक्षाएं हैं कि हमारा राज ऐसा हो इसमें ये सब चीजें हो जो हमें उत्तर परदेश में नहीं
02:04मिला वो इस राज में मिले
02:06तो ऐसी अपेक्षाएं लोगों की हैं और मैं सोचता हूँ कि ऐसा नहीं है कि जितने भी सरकारें आई हैं
02:15यहां पर
02:16सबने कुछ न कुछ किया है लेकिन बहुत ऐसा उलेखनिया काम लोगों को नजर नहीं आता है कि कोई ऐसा
02:26चमतकार कर दिया हो
02:28और मैं सोचता हूँ कि धीरे धीरे जब लोगों को में जागरुकता बढ़ेगी मेरा यह मानना है कि जागरुकता बढ़ेगी
02:39तो विकास की परकिरिया में भी तीजी आएगी
02:44क्योंकि हम आधे अधूरे कामों से संतुस्थ होने की आदत है हम लोगों की लेकिन जब तक हम लोग सवाल
02:54नहीं करेंगे जब तक हम लोग किसी चीज़ को पर अपना विजन अपनी भात नहीं रखेंगे
03:01तब तक दूसरे पक्षकों जो काम करने वाले लोग हैं उनको भी बहुत ज़्यादा चिंताएं नहीं होती हैं तो उनकी
03:12चिंताओं को बढ़ाने के लिए जाहिर है कि हमें आगे बढ़कर जागरूख होकर उनसे काम करवाना पड़ेगा
03:22आप थोड़ी जागरूखता की कमी लगनी चाहिए हम लोग हमारा पहाड का लोगों माखास तोर से उतने जागरूखता नीचे जो
03:32की धीरे धीरे आली और पहले से तो काफी परिवर्तन चे इन बात नीचे की जागरूख बिलकुली उने जन
03:43आपकी गेतों में देखिये तो वो पीडा आपको लगता की थोड़े कम हुई है हाँ हुई है कुछ वह सिक्षा
03:49की वजए से भी सिक्षा आप ज़ नई बेटी बारी आने चान तो सिक्षित भी आने चान आलां क्यूंकि भी
03:58मेथो कांग्शा बहुत चन है ना और एक समस्य �
04:03आज कल पहाडों मा या भी वेगी कि लोग पहाडों मा रेण चनन के ले की उख सुभिधाओं को अभावच
04:12और नई बेटी बहारी जू पड़ी लिकी छन वो सुभिधाओं का वीच मा रेण चनन
04:21तो जब दूसरा मुल्क बटी न एक अनन बेटी बहारी तो निश्चित रूप से हूँ थे लगदो कि एक सुभधाओं
04:28को अभावच विशेश कर एक तो बच्चों का वास्ता टेक्निकल सिक्षा की कमी में पहाडों की बात कनू चो और
04:37दूसरा स्वास्ते की स्वास्ते की बह
04:50यह मां कोई द्वीरा है निश्च और यह भी सईच की सरकार भी अपना स्थर से कनी ची लेकिन वो
04:59पहाडों मां डॉक्टर नी भेश सकनी ची यह की सरकार की मजबूरी ची किले की लोग पहाडों मां रहनी चनन
05:07एक तके की हमरा जो विधायक चन वो खुद पहाडों मां ने �
05:13चन चना चाहिए और यह हमर दुरुभागया चाहिए कि पहाडी राजया हम यह को बोल दा पहाडी राजय का विधायक
05:21गैर से जानू थे आना का नी करदन कि सा वो ठंडू चो हमुक नि जान चाना खासतर पोडी और
05:29मसूरी का विधायक अधाए
05:37तो हमारे पहाड के जो विधायक है वो खुद पहाडों में नहीं रहना चाहते हैं मैंने यह महसूस किया और
05:44देखा भी है सुरू में वहां से चुनाव लड़ते हैं उसके बादो मैदानी चेतर में अपनी जगे बना लेते हैं
05:51और यह अक्सर होता है हो रहा है मैं देखता �
05:55हुआ इस बात को मैसूस विकर रहा हुँ और हमारे पहाड के बिधायक जहां गैर सेंड में कभी अगर कैबनिट
06:04बैठक रखते हैं या कभी कोई सासर गैर सेंड में अगर रखते हैं तो वहां भी जाने को यह लोग
06:12तयार नहीं होते हैं तो यह हमारा दुर भाग्या है
06:14कि पहाड के जन परतनिदी पहाड़ों में उम्मीद है बसे इस पर वो निसंदेख कारे करेंगे
06:20सर यह जो तकलीफ आपको होती है अपने इर्दगेट समस्याओं को देखते हैं
06:25यह सामजिक मुद्दों को आप उठा रहे हैं अब आपका एक गीत एक किताब के समान होता है
06:30तो कब से आपको यह दर्द देख कर दर्द होना शुरू हुआ और कब से आपने इसको लिखना शुरू किया
06:42मैं काफी वर्स हम लोग उत्तर प्रदेश में रहें और उत्तर प्रदेश में हमने और मैं सरकारी नौकरी में भी
06:53रहा
06:53सन 72 से मैं सरकारी नौकरी में रहा और मैंने जो महसूस किया कि पहाडों की उपेक्षा तो हुई है
07:04तो उसी से लोगों के अंदर एक अलग राज्य की मांग
07:10जो उनके मन में लगा कि अगर हमारा अपना एक अलग राज्य होगा
07:15तो साइद ये जो उपेक्षाएं हम जेहलते हैं ये नहीं होंगी
07:19ऐसी अपेक्षाएं लोगों ने की है और उसका प्रतिफल आपने देखा
07:33लेकिन दुरुभाग्या मैं ये कहूंगा कि जो हमारे जन प्रतिनी दी हैं
07:40और उनमें अधिकांस तो मैं ये कहूंगा कि यहाँ पे आम आदमी की इस्तिती कमोवेस वैसी ही है
07:49जैसे उत्तरप्रदेश में थी
07:53कुछ लोगों ने तरक्की जरूर की है उनमें सबसे पहले तो नेताओं के नाम आते हैं
08:01उसके बाद फिर अधिकारी लोग जो नहीं चाहते हैं कि ये पहाडों की तरफ आएं
08:06ज्यादा पहाडों क्योंकि वहाँ मुश्किले हैं और ये नहीं चाहते कि जो चाहे पिछली सरकारे नहीं हों चाहे बर्तमान सरकार
08:16रही हों
08:16ये खुद नहीं चाहते कि राजधानी देरदून से हटके हमारे जो गहर सेन में जाए
08:23और गेर सेंड विक्या सेंड ये एक ऐसी राजधानी थी जो उत्राखनांदूलन से पहले तै कर दी गई थी
08:32कि राजधानी अगर पहाड का भी राज्य मिला हमको तो ये राजधानी यहां होगी
08:36होगी लेकिन दुरुभाग्य है कि ना लोग चाते हैं ना राजनेतिक दल चाते हैं ना अधिकारी चाते हैं कि इन
08:45सुविधाओं को छोड़के हम उपहाडों में जाएं जहां कि अभाव हैं और निश्चित रूप से वहां पर वो बात नहीं
08:53मिलती है जो आपने इस प्लाट्
09:07अधिकारी नौकरी आपके चल रही थी तो फिर गाना लिखना गाना गाना यह यातर कैसे शुरू है आपके अच्छा खासा
09:13सरकारी नौकरी मिलने के वाँ तो लोग मतब शौकिया करते हैं वागी छोड़ते हैं लेकिन आपने लिए मैं तबले का
09:23विद्यारती रहा हूं सु
09:34हैं कि पॉट किया कि तबले में आगे बढ़ने के लिए कोई उस्ताद गुरू चाहिए पहड़ों में गुरू नहीं थे
09:40तो मुझे लगा मैं इसमें बहुत आगे नहीं जा पाऊंगो ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाऊंगा और घर से निकलने की
09:48मेरी आर्थिक इस्थित्
09:52तो उसमें फिर ये हुआ कि मुझे अपनी दिशा बदलनी पड़ी फिर मुझे लगा कि मुझे अब दूसरे तबला के
10:05साथ दूसरी दिशा में जाना चाहिए और मैं फिर लोक संगीत और लोक गीतों का मैं अध्यन मैंने किया पुराने
10:13लोगोंने जो गीत रचे थे
10:15मैं वही जानना चाहरा हूँ कि सर हम तो आपको सुनते हैं आप उस समय किसको सुन रहे थे और
10:19आपका पसंदीदा गीत कौन सा था अगर आप गुन गुना भी दें उस गीत को क्योंकि ये भी बड़ा अलग
10:25एक्सपिरेंस होगा लोगों के लिए क्योंकि आपकी गीत आपने स�
10:40हम सुनते थे वो जीत सिंग नेगी जी थे चंदर सिंग राही जी हमसे पहले थे और भी लोग थे
10:48कुछ उसमें आकाजबानी के एक वो थे सोहनलाल मैं उनका नाम भूल रहा हूँ वो भी गाते थे बहुत से
11:00लोग थे हमसे पुराने लेकिन वो रहते लखनों में थे इसलि�
11:10और उदर मोन उपरेटी विजन ललसा कुमाओं में ये थे गिर्दा ये इन लोगों को सुनते थे और उससे पहले
11:22साधन नहीं थे अपने गीतों को पब्लिक तक पहुंचानी था लेकिन उसमें हमारे जो समाज है गड़वाली समाज कुमावनी समाज
11:33तो हमारे यहां बद्�
11:37बद्हें बोलते हैं बेड़ा बेड़नी बोलते हैं तो वो जगे जगे जाके साधी चयां में गीत गाते थे और नाच
11:47भी करते थे तो उनको देखा देखी सुनके हमारे यह नहीं धुली होते हैं धोल बजाने आजी
11:56बोलते हैं इनको तो उनके गीत उनके पवाना उनके जागर गीत वगरा ये सब थे इसके साथ ही जो हमारे
12:04गाउं में एक बड़े अच्छी परंपरा थी कि ये बसंद पंचमी से लेके और बैसाकी तक गीत लगते हैं आज
12:15वो किवल बैसाकी में ही लगते हैं गीत उन्हें थ�
12:21तो ये गीत में बच्पन से सुनता आ रहा हूं ये धुने मेरे दिमाग में रची वसी हुई है और
12:29जब मैं आज की उसमें जब भी में कोई नया गीत लिखा हुआ गीत कंपोस करता हूं तो कहीं ने
12:37कहीं उन धुनों के बीच में में एक रास्ता में मिलता है अगर तो पंक्
12:53आज का थड़े चौफला तो वो थड़े चौफला गीत होते थे
13:07फूलो कभीलास रहीमासी को फूला फूलो कभीलास रहीमासी को फूला
13:22फूलो कभीलास के डांडा फूला लू
13:30फूलो कभीलास के देवा चाडा लू
13:38फूलो कभीलास रे मासे को फूला
13:46फूलो कभीलास
13:50यह ऐसे गीत थे तो मैंने अपने लड़का जब मेरा हुआ तो उसका नाम भी मैंने कविलास रख दिया कविलास
13:59का अपब्रहंस है
14:01संग करनाई कर देट छही जाएक टॉतरा दोने
14:14हमारा देटकी अज़्मार ने अज़ कंपा फिरी और जो बीन गाया अपने घर में भी नहीं गाया
14:20लेकिन वो आपको श्रह देते हैं कि आपसे सीरियसली नहीं लेता इस मामले में
14:26जो बात उन्होंने कही मैंने सुना लेकिन वो गलत बोलते हैं
14:30वो जब ये कॉमर्सलाइज हुआ लोग संगीत का
14:34वो तो तब से मुझे से पुराने हैं थे वो अब तो खैर रहे निविचारे स्वर्गवासी हो गए
14:40तो वो जब कैसेट्स का अस्तायम आया उस समय फिर ये कॉमर्सलाइज हो गया हमारा
14:50लोग संगीत क्योंकि लोग संगीत गाने के पैसे मिलने लगे तो फिर हर आदमी जो है हर कलाकार जो है
14:57गीद गाके जो थोड़े बहुत कंपनियों के पैसे मिलते थे वो उसमें जब गाना गाते हैं या गाना रचा जाता
15:05है तो उसमें ये प्रात्मित है ये सोच होती है कि �
15:08वो पॉपुलर गाना बने अदम एक मास का गाना बने लेकिन आप ने ऐसे विश्यों का भी चैन किया जो
15:12बड़े जटिल और मुश्किल थे लेकिन वो मास के बन गए यह समस्या अब हुई सोचल मेडिया में क्योंकि इसमें
15:19माप दंड यह है कि जिसके जितने विवर्स होंगे
15:24लाइक होंगे उसको उतने पैसे मिलेंगे तो उसके बाद फिर जो हमारे नए उसके बच्चे हैं आज के बच्चे हैं
15:36जो गा रहे हैं आ रहे हैं अच्छे कंटों के साथ हैं इसमें कोई शक नहीं है लेकिन उनका सारा
15:43फोकस जो है वो विवर्स बढ़ाने पे है तो उसमें
15:48जो content है वो हलके पड़ जा रहे है
15:50quality content नहीं दे रहे हैं
15:51quality content यह दिक्कतें हैं
15:54अभी
15:54सर आप से भेतरिन तो कोई institution हुई नहीं सकता
15:58जो उनको सिखा सकता कि आपकी
15:59जो creative प्रक्रिया थी वो क्या थी
16:01मतलब आप जब गाना रचते थे
16:03पहले लिखते थे या पहले धुन बनाते थे
16:05आपकी प्रक्रिया क्या होती थी या format
16:07क्या होता था अगर आप बताना चाहें
16:08डॉंडियाल जी हमारे जमाने में
16:12ये नहीं था
16:13कि ये social media नहीं था
16:15उसमें ये कोई वंदन नहीं था
16:17कि विवर्स बढ़ेंगे तो पैसे मिलेंगे
16:19हमारे उसमें पैसे नहीं थे
16:22हमारे जमाने में जब हमने
16:24सुरुआत किया था
16:25इसलिए हमारी रचनाएं जो हैं
16:27सैट सॉंग जादा हैं
16:29क्योंकि मैंने पहाड में
16:31मा बहनों को बहुत तकलीफों में
16:34देखा है अपने परिवार
16:35अपने परिवार में भी
16:37मैंने अपनी मा और बहनों को
16:39बहुत कठिन जीवन जीते वे
16:41देखा है और
16:43जंगलों का जीवन और
16:45खेतों का जीवन पहाड का जीवन
16:47तो फिर मैंने
16:49सबसे ज़्यादा सैट सॉंग लिखे हैं
16:52अज कोई भी बच्चाई सेड सॉंग लिखने को तैयार नहीं है।
16:56सैड सॉंग धीरे-धीरे-धीरे खतम होते जारहे हैं,
16:59जो सबसे बहतरी गीत होते थे पाडों के.
17:03तो वो जीज धीरे-धीरे खतम हो रही हैं।
17:06आज मैं देख रहा हूँ, आप भी देखते होंगे, योट्यूब वगरे में सैड सॉंग नहीं आते हैं, कि वल्वेस नाचने
17:13वाले गाने ज्यादा आते हैं, क्या उनको लगता है कि जब हम परफॉर्म करने के लिए जाएंगे तो लोगों को
17:17ऐसे डांसिंग सॉंग चाहिए,
17:18लगता है कि सैड सॉंग में उनको वीवर्स नहीं मिलेंगे, आप जाधा तर वीवर्स नाचने वाले गानों में जादा मिलते
17:26हैं, तो विसलिए वो सैड सॉंग उन्हों ने छोड़ दी हैं गाना, और फिर वो नाचने वाले डीजे सॉंग वगरे
17:33ये करते हैं, लेकिन हमार
17:48अज्छे एक शिकाइट आप से बे लूगों क्योंकि आपकी जो राजनी टेक वियंग थे जो पहले खुब
17:52आते थे आज कल क्या आपकी कलंब भी लिखने से हिच केचा रही है या फिर आपको लग रहा है
17:58कि सब ठीक है तो मुझे लिखने
17:59किया रशक्ता ही नहीं है? नई, ऐसे नहीं है, और जो मैंने आज गाया है, सोसल मेडिया में भी गाया
18:07है, लेकिन वो लोगों तक पहुच नहीं रहा है।
18:10आगर आप यहाँ सुना दें, क्या दें?
18:12मुझे याद नहीं है.
18:15मैंने, अब यह आंधूलन जो यह होते रहते हैं,
18:18इन में मैं अपनी बात रखता हूँ अपने पेज पे,
18:22सोचल मेडिया में.
18:24लेकिन उसे वो बहुत ज़्यादा वो यह वाइरल नहीं होते हैं.
18:28वो होते हैं, ज़्यादातर यह जैसे मैंने कहा कि नासने वाले की.
18:33आपका भी आजकल ध्यान श्रिंगार रस पर जादा है?
18:36श्रिंगार रस इसलिए कि क्योंकि आपको पता होना चाहिए,
18:40कि जब हम एक गाना बनाते हैं, उसे लिखते हैं,
18:44कंपोज करते हैं, उसको रिकॉर्ड करते हैं इस्टूडियो में जाके,
18:49फिर सुटिंग के लिए टीम को बाहर बेशते हैं,
18:52तो करीबन तीन-चार लाख रुपे लग जाता है.
18:56अब तीन-चार लाख रुपे में आप या तो सहट सौंग आके उसको बंद कर दीजिए,
19:02यव ऐसे गाने लिख के आप बंद कर दीजिए,
19:05या फिर आप कुछ ऐसा गाना लिखें, ऐसे कुछ सिंगारिक गाना लिखें,
19:10जिसमें कुछ तो विवर्स मिलें, कुछ तो पैसा आए,
19:13आप कब से विवर्स के बारे में सोचल लगें, आप तो जो लिखें, वो तो विवर्स लेखें, आप पुछे काई
19:19हैं, जैसे,
19:27तुम जन सेवक राजा वे ग्यां लोक तंत्रमां,
19:42तुम जन सेवक राजा वे ग्यां लोक तंत्रमां,
19:51हम प्रजा का प्रजा ही रह ग्यां लोक तंत्रमां,
19:56ये तब लिखा था, जब ये बातें आई थी,
20:01कि कुछ नेताओं ने अपने अपने आद्मियों को इसमें भड़ दिया है,
20:07नौकरियों में डाल दिया है, नौकरियों में भड़ दिया है,
20:10अब ये पिसले उसमें लगा, फिर विरोजगारों का जो आंदुलन हुआ था,
20:13उसमें भी उसमें मैंने लिखे थे ये गाने लेकिन ये उस धंक से निवे जो कैसिट के जमाने में होता
20:20था
20:21कैसिट के जमाने में घर घर में कैसिट प्लियर होते थे
20:24सुनने वालों की सोच भी बदल गई है
20:26सोच भी बदली है फिर बहुत सारी बाते हैं बहुत सारे फैक्टर हैं ऐसा नहीं है बहुत सारे फैक्टर हैं
20:34हमने जब भी हम मैंने अभी चंदर सिंग गड़वाली पर गाना लिखा है तो उसको कोई सुनने को राजी नहीं
20:41है यह अपने हिरोज को लोग सुनने को राजी नह
21:01अब वो असल में मेरी साथ दिक्कत यह है कि मैं भूल जाता हूं मेरे मेरे मेरे लगभग चार सो
21:10से उपर गाने हो गए अब सब गानों को इस उमर तक याद रखना बड़ा मुश्किल है इसलिए में जब
21:16भी मन चुबे गाता हूं मेरे पाएक चोटी डाइरी होती है उसे दे�
21:21एकली तो फिर नियाद आने लग जाते हैं गहा लेकिन मैं एक गीत आपको यह सुना देता
21:26हूं आज इसकल जो यह नएane ही गीत है लेकिन आप मेरे मैं कभी बार कोशिव करता हूं
21:33लेकिन मैं पहाड से हट के हट नहीं पाता हूं ये मेरी कमजोरी है इसलिए मेरे हर गीत में आपको
21:41ये तो लोग गीत जैसा लगेगा या आपको लगेगा कि ये पहाड से चिपका हुआ गीत है
22:29लेकिन पाता है
22:34पूल फ्योंली बोलू के बुरास बोलू
22:41फूल फ्योंली बोलू के बुरास बोलू
22:47फूल सबी स्वान चन ये बगवानम खिल्या
22:55फूल सबी स्वान चन ये बगवानम खिल्या
23:03छो में घंग तोल मां त्वे जनू कोहोलो कोहोलो
23:14गुराल बोलू के बुलाब बोलू
23:20गुराल बोलू के बुलाब बोलू
23:26बोल तूई बोल अबत्वे को क्या बोलू
23:33क्या जी बोलू
23:36फूल फ्योली बोलू
23:38के बुरांस बोलू
23:42क्या बता है एक बाद फिर से जोड़ार तालिया होनी चाहिए
23:47अच्छा सर आप लंबे समय से उत्राखंड के लोगों को
23:52मतलब जागरुख भी कर रहे हैं अपने गीतों के जरिये
23:55मनुरंजीत भी कर रहे हैं लेकिन क्या कभी किसी मोड पर आपको ऐसा लगा
23:59कि आपकी अभी व्यक्ति की आजादी को दबाया जा रहा है
24:03कभी मैसूस किया आपने
24:05नहीं मेरे साथ तो यही रहा क्योंकि मैं
24:10नौकरी भी करता था
24:12तो मैंने कभी कमपनियों के प्रेशर में मैं कभी नहीं आया
24:18क्योंकि बालवच्चे पालने के लिए मेरे पास साधन था
24:22नौकरी तो वो कहते थे कि नेगी जी जैसे टी स्रीज वगरा यह थे रामा कैसेट
24:29तो यह कहते नेगी जी आप के कैसेट बहुत बिगते हैं
24:33आप हर मैने क्यों नहीं कैसेट बनाते हैं
24:38तो मैंने का भई मैं साल बर में एक कैसेट बनाता हूं
24:41मैं कुड़ा कसड़ा मार्केट में डालने के पक्ष में नहीं हूं
24:45और मेरे पास कोई ऐसा प्रसर भी नहीं है
24:48कि मैं जबरदस्ती तो ऐसे गाने
24:52हलके-फलके गाने लिख के मार्केट में डालो
24:55मैंने का मैं यह नहीं
24:56वो फिर उनका एक प्रसर यह होता कि
24:58आप देवर भावी के गीत जैसे बोजपुरी
25:00वगरे में होता है
25:01वैसे गीत गाये साली और जीजा के
25:04गीत ऐसे आपके यानी होता मैंने का होता है
25:07लेकिन जो आप चाहरे हैं वो गीत मैं नहीं लिख पाऊंगा
25:10है ना? मैं लिखूंगा भी तो वो आपकी इच्छा के अनुसार नहीं होगा
25:15वो मेरी ही इच्छा के अनुसार हो
25:16यह तो तो कमपनीस की बाती मैं राजनीतिक दबाव के बात कराऊं
25:19क्यूंकि आपने
25:21अब कतगा खेलो
25:23आपने क्या क्या गीत नहीं लिखा है
25:25हाथन हुसिक पिलाई फूलन पिलाई उरम
25:27नौच भी नारेन
25:29आज़ा डॉंडियाल जी आप किसी को
25:31चूटी काटेंगे तो हाथ जटकने
25:33कादिकार तो उसको भी है
25:35तो मैंने भी उनको
25:37ब्यंग किये हैं
25:39उनके कर्म कुकर्मों के हिसाब से
25:42तो निशित रूप से
25:44मुझ पे तो ऐसे ऐसे दमकियां
25:46और ऐसे ऐसे गालियां पड़ी हैं
25:48उनके चेले चपाटों ने
25:50उनके जो कारे करता थे
25:51जो लाभानुवित हो रहे थे
25:54उन लोग ने बहुत गालियां दी और मेरे बच्चे यहां पड़ी भी रहे थे
26:00ऐसे भी धंकियां दी भी कि हमको मालूम है तुम्हारे बच्चे वहां पड़ते हैं और यह करते हैं
26:04मैंने का या तुम्हें जो करना है करो मैंने जो करना था मैंने कर दिया
26:08तर वो लोग आपका सम्मान पिर पड़ा करते हैं
26:10आज करते हैं ना
26:12आज लोन को लगा कि इसको दमकी didn't
26:14कि कुछ फ़रक तो पड़ा निए फिर मैंने
26:16दूसरी बार दूसरी सरकार पे लिखा
26:19अब क्यूंकि देखे
26:20उत्तरपरडेश में
26:23उत्तरपरडेश
26:24में उबतर प्रदेश हमारे लखनों बहुत दूर था लेकिन अब सरकार नजदी का गई तो उसकी गतिविदियां समझ में आ
26:31रही थी हमें तक पहुंच रही थी और मैं चुंकि सरकारी सेवा में मेरे भी अपने बहुत सारे लोग थे
26:38मित्र थे तो उन से फीड़ बैक भी मु�
26:54फिर कुछ नहीं देखा ना नौकरी देखी ना कुछ देखा मैंने उन गीतों को उसका इसेट का टाइम था लिकिन
27:02सब जब यह सब अच्छा चल रहा था इस बीच में कुछ आरूप भी लगया आप पर ब्रहमन विरूधी होने
27:09का आरूप लगा जब आपने लिखा चल मेरा
27:10थौलर है उसका जो प्रस्तुति करण था उसमें विशेशवर को मतब लूटने वाला या ठगने वाला बताया गया ऐसे आप
27:20ऐसे आप उनको ब्रहमन क्यों कहते हैं उसका प्रस्तुति करण है जो मैं और मेरी तो मेरी तो दोनों बच्चों
27:40की साधी पंडित
27:40तो में हो रखी है, ना तो आरोब लगाने वाले लगाएं, तो उसका मतलब कहा है कि चल मेरा थौला
27:47रे, एक ठगों ला, हैंका बिठों ला, ऐसे ठग आपको बहुत मिल जाएंगे, कि सड़क के किनारी बैठे वे, हाथ
27:55देखने वाले, तोता को लेके निकालने वाले, ऐसे ल
28:10नहीं देखा कि वो ठाकुर जो मूचों वाला था, लंबा कोट पहने हुए, और बकरियां चोर के ले जाता है,
28:18वो क्यों नहीं तो ठाकरों ने तो नहीं कहा कि नेगी जी आपने ऐसे क्यों का, क्योंकि उनको मालूम है,
28:22हमारे बीच ऐसे लोग भी हैं, और ऐसे लोग, और �
28:28जो डौन थाली बजाते हैं, हमारे यहां, उसके धामी, जागरी वगेरा जो नकली बनते हैं और लोग को ठगते हैं,
28:36और जितनी बार चिलाता है, उतनी बार उरुफ है, उसमें रख देता है, नदी के किनारे जो उसके भूत बात
28:42चालता है, चल पूछते हैं, तो वो ठग �
28:47आपको नजर नहीं आए, कि वो पंडे जी के पिठाएं नजर आती है, ठाकरों के पिठाएं नजर नहीं आती है,
28:53पता नहीं क्यों, तो यह लोग आरोफ लगानेवाले तो लगाते रहते हैं, मुझसे यह भी कहा गया कि मैंने जितने
29:03भी ये रादिती के भ्यंग सेटायर कि
29:06जैसे नोचमी नारेंड तो पंडित तिवारी जी भी पंडित थे उसके बाद इनका शाशन हुआ से संक जी का तो
29:16फिर ये लगा कि आप किवल ब्रामन ब्रामन मुख्य मंत्रियों पर लिख रहे हैं पिर मेरा जबाब यही होता था
29:26कि मैंने का भाई कि पता नहीं कैसे खंडू
29:33जी छूड़ गए मेरे उससे उसमें तो अपने तंस कसा है अपने गीत में हाथन हुसिक पिलाए फूलने पूलने पूलने
29:40जिसमें आपको इस बात का दुख होता है और खुशी वीसले क्योंकि आपके जो चाहने वाले वो लगातरे मांग करते
30:02हैं कि सबसे पहले अगर
30:03कोई पदमश्री का हगदार है तो वो आप है आपको दुख होता है कि एक तो उनकी नहीं सुनी जा
30:08रही है तो आपके चाहने वाले है और आप ये गीत ना लिखते तो शायद अब तक मिल भी चुका
30:12होता है देखिए डॉन्याल जी पदमश्री के पीछे क्यों पड़े हैं �
30:15कि लोग मेरी तो ये समझ में नहीं आता मैंने तो बहुत सारे पदमश्री को ऐसा देखा है जने उनके
30:19मोहले के लोग नहीं पहचानते मैंने वो पदमश्री भी तो देखे हैं और हमारे साथ के हैं लोग और जो
30:27मुझे संगीत नाटक अगेडिमी का अवार्ड मिला है उसकी
30:30कोई चर्चा ही नहीं करता है है ना वो तो इससे बड़ा है और उसका उस सम्मान को मैं इसलिए
30:39स्विकार किया मैंने कि वो सम्मान बिना मुझे से पूछे मुझे दिया गया मुझे पता भी नहीं था कि मुझे
30:46ये सम्मान मिलने वाला है और ना मैंने मैंने अपलाई कभी न
31:00लिखता नहीं है और गाता नहीं है
31:02सम्मान जनता से
31:05पूछिये और जनता को लगता है
31:06कि वास्ता में इस आइद में ने काम किया है
31:08और उन्होंने यही किया
31:11जो संगितनाटक
31:12अकेडेमी का अवार्ड मिला
31:14उन्होंने यही किया मुझसे नहीं पूछा
31:16मेरे बारे में न कोई मुझे मुझे से कोई डॉकुमेंट मांगे ना कुछ तो ये इनकी बैठक तो वहाँ आसाम
31:25में हो रही थे गौहार्टी में
31:27वहाँ से मुझे फोन आया कि आपको जो है इस बार ये आपका चेहन कर रहे हैं हम लोग
31:39अगर किसी गीत के माधियम से अगर आप दे दे दें तो इसे बहुत हैं लेकिन इस समय इस मिर्थी
31:47में धीर धीर घतम हो गए हो अच्छा नहीं है अधा दूर अधूर अधूर संदेश ही तो मैं अपने जो
31:55लोग गा रहे हैं आजकल नए बच्चे गा रहे हैं उनके लिए मैं
32:01बार बार बोलता रहता हूं कि वही आप गाउं की तरफ भी जाएं अपने गाउं की तरफ जाएं और वहां
32:07पे लोगों की इस्तिति देखें जो जिस रास्ते में चला हूं मैं उस रास्ते की ही सला दे सकता हूं
32:14कि आप देखिए वहां पे क्या अच्छा हो रहा है क्या खरा
32:31तो आज क्या है आज क्या परिवड़ता ना रहे हैं आज क्या अच्छा हो रहा है इस पर गीत लिखो
32:37लेकिन आप उनका फोकस सिर्फ वही है जैसा मैंने कहा कि व्यूर्स बढ़ाने हैं अब यूर्स कैसे बढ़ेंगे यह इसके
32:45तरीका वही लोग जानते हैं
32:48लोग के प्रती निस सब के लिए मुझे आपत ही होते कई बारें ऐसे गीत जिनका नाक नी मूनी अर्या
32:57को सोच समझ के लिए ना सोच समझ के गाव सोच समझ के लिए तो वह हैं लेकिन ऐसा नहीं
33:03है कि हंड़ेट परसेंट सब ऐसा ही है कुछ लोग कुछ उसमें को सीरियस लो
33:17जो हैं वो बिल्कुल उनका इक कंटेंट बहुत कम जोर ना जरांगे यह जो नई पीड़ी की गायक है वो
33:25आपको सुन रहे होंगे और गंभीरता से आपकी बातों को लेंगे बहुत शुक्रिया आप आज तक इस मंच पर आए
33:30इस मंच के आपने शुभा बढ़ा एक बार फ
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