00:06आपको इंसाफ करती ना दिखे लेकिन जिम्मेदारियों की नजर से देखेंगे तो शायद कुछ समझ में आए
00:15ये क्या है बहू सुपर से घर का काम करती रहती है फिर ओफिस जाती है और बच्चों में लगी
00:22रहती है और ओफिस क्यों नहीं छोड़ देती या फिर घर के लिए कोई नौकरानी रख ले
00:28कैसी बात कर रही है मा जानती तो है न अभी इनके उपर कितना लोन है थोड़ा ही सही मदद
00:34कर देती हूँ तो अच्छा लगता है और अभी उनको मेरे पैसे की जरुरत भी तो है
00:38सुधा चंदर को बच्पन से प्यार करती थी एक की महले में खेल कुद कर बड़े हुए दोनों जहां सुधा
00:45संपन परिवार से थी तो वहीं चंदर का परिवार आर्थिक परिशानियों से जूचता ही रहा लेकिन सुधा की जिद के
00:53आगे किसी की नहीं चली
00:54सुधा कल ओफिस जल्दी जाना है और दो दिन के लिए गुजरात ओफिस की काम से भी जाना होगा
01:00अरे कैसी बात कर रहा है बेटा बहु को अगले महिने बच्चा होने वाला है इस वक्त तो उसके साथ
01:06रहा है
01:07अरे कोई बात नहीं न मा उनको जरूरी काम होगा वरना मीरा चंदर ऐसे वक्त में मुझे छोड़ कर कभी
01:14नहीं जाता
01:14चंदर सुबह घर से निकलता तो आधी रात को घर में खुशता वो भी शराब की नशे में चंदर की
01:22मा उसे खुब समझाती
01:23अरे मा देख रही हो ना कितना कर्जा है सर पर काम करना पड़ता है दिने रात काम नहीं करूँगा
01:28तो घर कैसे चलेगा
01:29अरे लेकिन बहु को भी तो देख लिया कर इस हालत में भी घर का बाहर का सारा काम करती
01:36है
01:37चंदर तो जैसे मा की बात सुनकर भी अंसुना कर दिता है
01:40ओफिस के बात चंदर का फोन मा की पास आता है
01:44मा वो ओफिस की काम से आज रात के लिए पास की शहर के ओफिस जाना पड़ रहा है
01:48कल सुपा आ जाओंगा
01:50सुधा रात को कमरे में सू रही होती है
01:52कि उसके पेट में दर्ध होता है
01:54सुधा चंदर को वीडियो कॉल करती है
01:57इनको फोन कर लो
01:58शायद कुछ आराम मिले
02:00लेकिन दस बार फोन करने पर भी
02:02वो सुधा का फोन नहीं उठाता
02:04ओफिस की काम से गए है
02:06हो सकता है बिजी हो
02:08कितनी मैंनत कर रहे हैं हम लोगों के लिए
02:10सुधा सू तो जाती है
02:12लेकिन अकेले उसे कमरे में डर लगता है
02:14अगले रोज चंदर घर आता है
02:16जहां सुधा ओफिस जाने के लिए तयार हो रही थी
02:19तुम आज भी ओफिस जाओगी
02:21कल रात पर तो ड्यूटी की है
02:23ठक जाओगे छुटी ले लो ना
02:25अरे नहीं नहीं कैसी बात कर रही हो
02:27यह तो पॉसिबल ही नहीं है
02:29अच्छा रुको मैं जल्दी से तुम्हारा खाना और नाश्ता बना देती हूं
02:32बेचारी सुधा ओफिस जाना छोड़कर लग जाती है
02:35पती के लिए खाना बनाने
02:37उसके कपड़े प्रेस करने
02:38और जरूरत का सामान मुहया कराने के लिए
02:41हो सके तो रात की जूटी मत लिया करो ना
02:44मुझे बहुर डर लगता है
02:46अरे यार क्या है
02:47तुम तो ऐसे बियेव कर रही हो
02:49कि तुम ही अकेली हो जिसे बच्चा होने वाला है
02:51इतने लोगों के पती जो काम के सिलस्रे में बहार होते हैं
02:54उनका क्या
02:56सुधा को चंदर की मुझे ये बाते अजीब लगती है
02:59अरे हुआ क्या है तुमको
03:00पहले तो तुम मेरा कितना खयाल रखते थे
03:03मेरे पास रहते थे
03:04मेरी दवा से लेकर खाने पीने तक का सारा खयाल
03:07हो अरब
03:08इस बार तो तुम एक दफा भी मेरे साथ डॉक्टर की पास नहीं आए
03:11क्यों
03:11अरे पागल हो गई हो क्या
03:13बागर वाली बात कर रही हो
03:14काम धंदा देखू या फिर तुम्हें लेकर टैलता फिरू
03:17और मुझे शुक्रवार की रात को काम से निकलना है सोमवा रहूँगा
03:21सुधा को समझ में नहीं आता कि क्यों औचानक से चंदर को फिल्ड का काम मिल गया है
03:27तेकिन एक दिन
03:29सुधा मैं और चंदर जरा एक रिष्टेदार के घर जा रहे हैं
03:33तुम भी तयार हो जाओ घर में अकेली कैसी रहोगी
03:35अरे ने ने इस हालत में इसे लेकर जाना ठीक नहीं है
03:39अरे लेकिन मैं ओफिस भी तो जाती हूँ
03:41फिर घर में अकेले चंदर उसकी कोई बात नहीं सुनता
03:45वो सीधा कार निकाल कर मा को लेकर चला जाता है
03:49सुधा घर के काम में लग जाती है कि अचानक उसकी नजर चंदर के बैक पर पड़ती है
03:54जिसमें एक कागस दिखाई देता है
03:57इनकी कागस बीना इधर उतर फैले होते हैं
04:00एक भी खो जाएगा तो बवाल करेंगे
04:02लेकिन जैसी ही सुधा वो कागस खोल कर देखती है
04:05तो वो सदमे में आ जाती है
04:06दरसल वो कागस नहीं
04:08बलकि चंदर और उसके ओफिस में काम करने वाली लड़की
04:11चांदनी की गोवा की टिकेट होती है
04:14सुधा चंदर के बैग को खोल कर देखती है
04:16तो उसे होटल के बिल से लेकर महंगी गिप्स और दूसरे शहरों के टिकेट दिलते हैं
04:21सुधा को समझते देर नहीं लगती कि उसका पती किसी और लड़की के साथ है
04:26चंदर के आने पर सुधा उससे बात करती है
04:29अर नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है तुमको गलत फहमी हो गई है
04:32लेकिन जब सुधा के सवाल तीखे हो जाते हैं तो चंदर को अपने गलती माननी पड़ती है
04:38और वो सुधा से माफी मांग लेता है
04:40सुधा फैसला कर लेती है कि वो चंदर को छोड़ देगी
04:43बच्चे और सामान को लेकर वो घर से निकल ही रही होती है
04:46कि सास उसे रुकी है
04:48कहा जाएगी बेटा, रुक जा
04:50चंदर को सुधा का जाना खल नहीं रहा था
04:53वो जूठे मूँ भी उसे रोकने की कोशिशी नहीं कर रहा था
04:56सुधा चंदर को देखती है और माईके चली जाती है
04:59माईके में मा कहती है
05:01अरे आयसे कैसे घर छोड़ कर आ गई
05:03कौन सा चंदर तुझे छोड़ रहा था
05:05माफी तो मांग ली थे न
05:08देखो बेटा
05:09बेटी डोली में जाती है
05:11और अर्थी में ही निकलती है
05:12पर पापा मेरा आत्मस सम्मान
05:14उसका क्या? आपने मुझे पढ़ाया लिखाया है
05:17इस लायक बनाया कि मैं खुद का
05:19खर्चा उठा सकूँ
05:20बेटी को पढ़ा सकूँ एक अच्छा जीवन पाऊँ
05:23आरे लेकिन पती की जरूरत तो होती है ना सुधा दिदी
05:26और अगर आपको नहीं है
05:28तो इस बच्ची का सोचो
05:30जो अपने पिता से इस कदर जुड़ी है
05:32आने वाले बच्ची की सोचो
05:33जिसके आने से पहले ही आपने पिता का प्यार से
05:37दूर करने की सोच ली
05:38सुधा फोन देखती है
05:39लेकिन चंदर का कोई कॉल नहीं होता
05:41वो समझ रही पाती क्या अपने आत्मस सम्मान के बारे में सोचे
05:46या बच्चों के बारे में
05:47मम्मी, हम नाना नानी की घर से
05:50दाटी और पापा की पास कब जाएंगे
05:53नहीं जाएंगे बिटा, अब यहीं रहेंगे
05:57नहीं मम्मी, मैं पापा के पास जाऊंगी
06:00मुझे दाटी की साथ रहना है
06:02और मेरे साथ?
06:04हाँ, आपकी साथ भी तो, सबकी साथ मा
06:09देखो सुधा दीदी, आपकी सर पर पिता का साया होना जरूरी होता है
06:13अपने घमन के लिए पिता और बेटी को अलग मत करो
06:16सुधा आप सामान उठा कर अपने ससुराल जाने लगती है
06:19लेकिन मन में सवाल रह जाता है
06:22कि जिसे दुन्या घमन समझ रही है
06:24वो उसका आत्पर सम्मान था
06:26चन्दन ने माफी ज़रूर मांग ली
06:28लेकिन कभी ये ऐसास नहीं दिलाया
06:30कि वो सिर्फ उसी का है
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