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Dive into a compelling narrative with our latest offering. This video explores complex "relationship stories" through a "romantic drama" lens, bringing to light the intricate dance of hearts. Experience "emotional stories" that resonate deeply.

ऐसा बाप नहीं चाइये Hindi Story Hindi Kahaniya Moral Stories Horror story New hindi Kahani

नमस्ते दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे चैनल पर। आज की यह कहानी "ऐसा बाप नहीं चाहिए" सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भावनाओं और डर का एक ऐसा सफ़र है जिसे आप चाहकर भी भुला नहीं पाएंगे।

इस वीडियो में आप देखेंगे कि कैसे एक पिता का व्यवहार एक हंसते-खेलते परिवार के लिए डर का कारण बन जाता है। क्या यह कोई पुरानी रंजिश थी, कोई दिमागी खेल या फिर कोई रूहानी साया? इस कहानी का अंत आपके दिल को छू लेगा और आपको एक गहरा सबक (Moral Lesson) भी देगा।

इस कहानी की मुख्य विशेषताएं:

Horror & Suspense: हर मोड़ पर एक नया रहस्य।

Moral Message: पारिवारिक रिश्तों और कर्मा की एक अनकही दास्तां।

Cinematic Storytelling: बेहतरीन नरेशन जो आपको अंत तक बांधे रखेगा।

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Transcript
00:03ऐसा बाप नहीं चाहिए एक बड़े शहर में रतनलाल अपनी बेटी संध्या और छोटी बेटे कुनाल के साथ रहता है।
00:30एक दिन रतनलाल योगिश्वर से कहता है।
01:00एक चोटा बेटा है उसको पढ़ाना भी है उसकी देख भाल भी करनी है और अगर मैं बेटी को घर
01:06में रखूंगा तो उसकी शादी कैसे करूंगा साथ।
01:11तुमको कितने पैसे मिल रहे हैं? अब अब पचास हजार साथ।
01:17देखो मैं तुमको पूरे 20 लाख रुपे देता हूँ। तुम अपनी बेटी संध्या को मुझे दे दो।
01:30अगले दिन रतनलाल संध्या को हमेशा के लिए युगिश्वर के यहाँ छोड़ाता है और बदले में 20 लाख रुपे लेकर
01:38घर आ जाता है।
01:39रतनलाल जिंदगी में पहली बार इतने पैसे पाकर बोखला गया। उसने एक अच्छा घर लिया।
01:46कुणाल अब हमें कोई चिंता नहीं है तो अब अच्छे से पढ़। खुब मन लगा कर पढ़ाई करना।
01:53पापा मुझे पढ़ाई करना अच्छा नहीं लगता।
02:03कुणाल का एड्मिशन एक अच्छे स्कुल में हो जाता है लेकिन आए दिन स्कुल से शिकायत आती ही रहती है।
02:09दस साल बाद एक दिन प्रिंसिबल मैडम रतनलाल को स्कुल में बिलाती है।
02:15रतनलाल आपका बेटा कुणाल बहुत आवारा हो गया है और यह बिलकुल भी पढ़ाई नहीं करता है बलकि उसका दिमाग
02:22गलत कामों में जा रहा है।
02:23अब मैं उससे बात करूँगा मैडम ठीक है आज यह आखरी मौका है अगली बार तो मैं उससे स्कुल से
02:31ही बात निकाल दूँगी।
02:33रतनलाल घर आ जाता है और कुणाल से कहता है।
02:36कुणाल बेटा मैं तुम्हारे उपर इतना पैसा लगा रहा हूँ फिर भी तुम स्कुल में सही से क्यों नहीं पढ़ते
02:42हो।
02:42आप तो रहने ही दीजिये। मैं सब जानता हूँ कि यह पैसा कहां से आया है।
02:47और वैसे भी अब यह पैसा मेरा है। मेरा जो भी मनोगा मैं करूँगा।
02:52आज के बाद मैं कभी स्कुल नहीं जाने वाला।
02:55रतनलाल को अपनी बेटी की याद आती है और वो रोने लगता है।
02:59पांच साल बाद कुणाल एक दिन एक लड़की को शादी करके घर ले आता है।
03:04पिताजी यह मेरी पत्मी है स्वीटी।
03:08हाँ तुमने शादी कर ली।
03:10हाँ शादी करनी मैंने दिकाई नहीं दे रहा है।
03:13और अब से आप फिर से कमाना शुरू कर दो।
03:15बाद बैट कर खा लिया।
03:18कुणाल तुम इस बुट्टे को घर में क्यों रख रहे हो।
03:21देखो न यह शराब पीता है।
03:23इस घर से बहान निकाल पीको।
03:25अरे स्विट्टी यह मेरे पापा है।
03:27कैसे बहान निकाल दू।
03:29और वैसे भी घर में कोई तो चाहिए न काम करने वाला।
03:32लागर समझ कर रख लो।
03:34हम।
03:34इस बुट्टी को तो घर से बहान निकाल कर ही रहूंगी मैं।
03:38मैं कब तक इसके लिए खाना बनाऊंगी।
03:41स्विट्टी एक दिन घर के बाहर पार्क में अपनी दोस्तों के साथ बैठी होती है।
03:45तब ही वो रतनलाल को बलाती है।
03:47पिताजी
03:48मेरे कमरे में मैं अपना फोन छोड़ाई हूं।
03:51जरह लाकर तो दी ना।
03:53अब हाँ हाँ जरूर अभी लेकर आता हूं।
03:56रतनलाल फोन लेकर आ जाता है।
03:58कुछ समय बाद स्वीटी के फ्रेंड्स पी चले जाते हैं।
04:00स्वीटी अंदर आकर शोर मचाती है।
04:03चोर चोर।
04:05का है चोर।
04:06मुझे तो यहां कुछ नहीं दिख रहा।
04:08अरे यह अलमारी खुली पड़ी है।
04:10जरूर किसी चोर नहीं खुली होगी।
04:12अरे कौन आय था यहां।
04:15यहां।
04:16यहां तो पिताजी आय थे बस।
04:18अरे बहु मैं चोर नहीं हूं।
04:21मुझे तो आप पर अब बिल्कुल भी विश्वास नहीं है पिताजी।
04:24क्योंकि जब आप पैसे के लिए दीदी को बेच सकते हो तो आप चोरी भी तो करी सकते हो।
04:28अरे लेकिन वो सब तो मैंने तेरे फले के लिए किया था न।
04:32मैं तो कहती हूं कि हमें इनकी कमरे की तलाशी लेनी चाहिए।
04:36तुम बिल्कुल सही कह रही हूं।
04:39स्वीटी और कुणाल दोनों रतनलाल के कमरे की तलाशी लेते हैं।
04:43और उन्हें वहाँ स्वीटी की जूलरी और पैसे मिल जाते हैं।
04:46मैं तो पहले ही जानता था कि चोर आप ही हो।
04:49निकल जाओ मेरे घर से और दुबार अपनी शकल मत दिखाना।
04:52रतनलाल आखों में आसुली ये घर से निकल जाता है।
04:56स्वीटी मन ही मन सोचती है।
04:58हम। आज तो मेरे प्लानिंग सफल हो गई।
05:01जैसा मैं चाती थी ऐसा ही किया।
05:03और बड़ी आसानी से उस बुड़ी को चोरी का इल्जाम लगा कर घर से भगा दिया।
05:12रतनलाल की हालत अब ज्यादा खराब हो गई।
05:15और वो सड़क पर बैठ कर भीक मांग कर खाने लगा।
05:18एक दिन वहाँ एक गाडिया कर रुकी और सड़क पर बैठे सभी भिखारियों को अपने सेंटर ले गई।
05:24एंजियों की मालिक संध्या एक एक कर के सभी को सुविदा मोहया कराती है।
05:29तब ही उसके नजर रतनलाल पर पड़ती है।
05:32पिता जी।
05:33संध्या तू।
05:35पिता जी आपकी ये हालत कैसे हुई।
05:38ये सब मेरे पूरे कर्बों के ससा है।
05:43जो मुझे मिल रही है।
05:45मुझे बाफ कर दे बेटी है।
05:52पिता जी।
05:53मैं आप पर बिल्कुल भी गुसा नहीं हूँ।
05:55क्योंकि आपने मुझे यहां भेज कर अच्छा ही किया।
05:58मेरी सिंदगी बदल गई।
06:00लेकिन ये सब हुआ कैसे बेटा।
06:05आप ये नए कपड़े पहनो।
06:07तब तक मैं योगेश्वर अंकल को बुला कर लाती हूँ।
06:11योगेश्वर अंकल।
06:12हाँ अंकल।
06:14योगेश्वर जी ने तुझसे शादी नहीं की थी।
06:18नहीं तो पापा।
06:19उन्होंने तो मुझे पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया है कि मैं आज सब की सेवा कर पा रही हूँ।
06:25रतनलाल पश्चा ताप करकी रूता रहता है।
06:28तब ही योगेश्वर भी वहां आ जाता है।
06:31रतनलाल जी आपकी ये हालत कैसे हुई।
06:35इतने सारे पैसों के बावजुद भी।
06:39क्योंकि मैंने बेटे और बेटी में भेदभाव किया था।
06:43लेकिन आपने ये कैसे किया।
06:45मुझे ये जानना है बताइए।
06:48सालों पहले जब संध्या छोटी थी।
06:51तब मैंने एक बार एक आदमी से तुम्हें बात करते हुए सुना था।
06:55जो कुछ पैसों में संध्या को तुमसे खरित कर शादी करना चाता था।
06:59मैं उस समय एंजियों में बच्चियों के लिए ही काम कर रहा था।
07:03और मैं किसी भी लड़की की जिन्दगी खराब होते नहीं देख सकता था।
07:07इसलिए मैंने अपने जीवन की कमाई का एक बड़ा हिस्सा तुम्हें दे दिया था।
07:12सच में कितना गलत था मैं, मुझे माफ कर दो।
07:16अब आप दोनों मेरे साथ घर चलो और आज मैं अपना सच्चा प्रायश्चित करना चाता हूँ।
07:22योगेश्वर और संध्या रतनलाल के साथ घर जाते हैं।
07:26स्वीटी दर्वाजा खुलती है।
07:28चोर फिखारी तो फिर से आ गया। चल भाग यहां से बुड़े।
07:32यह घर तुम्हारे बाप का नहीं मेरा है। बाहर निकलो यहां से।
07:37रतनलाल कुणाल और संध्या को घर से बहार निकाल दीता है।
07:42योगेश्वर जी अब यह घर आपका है। और अब आप यहां एक और NGO खोल सकते हैं।
07:48शायद अब यह सच्चा प्रायश्चित है।
07:51संध्या अपने पिता के गले लग जाती है।
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