00:03ऐसा बाप नहीं चाहिए एक बड़े शहर में रतनलाल अपनी बेटी संध्या और छोटी बेटे कुनाल के साथ रहता है।
00:30एक दिन रतनलाल योगिश्वर से कहता है।
01:00एक चोटा बेटा है उसको पढ़ाना भी है उसकी देख भाल भी करनी है और अगर मैं बेटी को घर
01:06में रखूंगा तो उसकी शादी कैसे करूंगा साथ।
01:11तुमको कितने पैसे मिल रहे हैं? अब अब पचास हजार साथ।
01:17देखो मैं तुमको पूरे 20 लाख रुपे देता हूँ। तुम अपनी बेटी संध्या को मुझे दे दो।
01:30अगले दिन रतनलाल संध्या को हमेशा के लिए युगिश्वर के यहाँ छोड़ाता है और बदले में 20 लाख रुपे लेकर
01:38घर आ जाता है।
01:39रतनलाल जिंदगी में पहली बार इतने पैसे पाकर बोखला गया। उसने एक अच्छा घर लिया।
01:46कुणाल अब हमें कोई चिंता नहीं है तो अब अच्छे से पढ़। खुब मन लगा कर पढ़ाई करना।
01:53पापा मुझे पढ़ाई करना अच्छा नहीं लगता।
02:03कुणाल का एड्मिशन एक अच्छे स्कुल में हो जाता है लेकिन आए दिन स्कुल से शिकायत आती ही रहती है।
02:09दस साल बाद एक दिन प्रिंसिबल मैडम रतनलाल को स्कुल में बिलाती है।
02:15रतनलाल आपका बेटा कुणाल बहुत आवारा हो गया है और यह बिलकुल भी पढ़ाई नहीं करता है बलकि उसका दिमाग
02:22गलत कामों में जा रहा है।
02:23अब मैं उससे बात करूँगा मैडम ठीक है आज यह आखरी मौका है अगली बार तो मैं उससे स्कुल से
02:31ही बात निकाल दूँगी।
02:33रतनलाल घर आ जाता है और कुणाल से कहता है।
02:36कुणाल बेटा मैं तुम्हारे उपर इतना पैसा लगा रहा हूँ फिर भी तुम स्कुल में सही से क्यों नहीं पढ़ते
02:42हो।
02:42आप तो रहने ही दीजिये। मैं सब जानता हूँ कि यह पैसा कहां से आया है।
02:47और वैसे भी अब यह पैसा मेरा है। मेरा जो भी मनोगा मैं करूँगा।
02:52आज के बाद मैं कभी स्कुल नहीं जाने वाला।
02:55रतनलाल को अपनी बेटी की याद आती है और वो रोने लगता है।
02:59पांच साल बाद कुणाल एक दिन एक लड़की को शादी करके घर ले आता है।
03:04पिताजी यह मेरी पत्मी है स्वीटी।
03:08हाँ तुमने शादी कर ली।
03:10हाँ शादी करनी मैंने दिकाई नहीं दे रहा है।
03:13और अब से आप फिर से कमाना शुरू कर दो।
03:15बाद बैट कर खा लिया।
03:18कुणाल तुम इस बुट्टे को घर में क्यों रख रहे हो।
03:21देखो न यह शराब पीता है।
03:23इस घर से बहान निकाल पीको।
03:25अरे स्विट्टी यह मेरे पापा है।
03:27कैसे बहान निकाल दू।
03:29और वैसे भी घर में कोई तो चाहिए न काम करने वाला।
03:32लागर समझ कर रख लो।
03:34हम।
03:34इस बुट्टी को तो घर से बहान निकाल कर ही रहूंगी मैं।
03:38मैं कब तक इसके लिए खाना बनाऊंगी।
03:41स्विट्टी एक दिन घर के बाहर पार्क में अपनी दोस्तों के साथ बैठी होती है।
03:45तब ही वो रतनलाल को बलाती है।
03:47पिताजी
03:48मेरे कमरे में मैं अपना फोन छोड़ाई हूं।
03:51जरह लाकर तो दी ना।
03:53अब हाँ हाँ जरूर अभी लेकर आता हूं।
03:56रतनलाल फोन लेकर आ जाता है।
03:58कुछ समय बाद स्वीटी के फ्रेंड्स पी चले जाते हैं।
04:00स्वीटी अंदर आकर शोर मचाती है।
04:03चोर चोर।
04:05का है चोर।
04:06मुझे तो यहां कुछ नहीं दिख रहा।
04:08अरे यह अलमारी खुली पड़ी है।
04:10जरूर किसी चोर नहीं खुली होगी।
04:12अरे कौन आय था यहां।
04:15यहां।
04:16यहां तो पिताजी आय थे बस।
04:18अरे बहु मैं चोर नहीं हूं।
04:21मुझे तो आप पर अब बिल्कुल भी विश्वास नहीं है पिताजी।
04:24क्योंकि जब आप पैसे के लिए दीदी को बेच सकते हो तो आप चोरी भी तो करी सकते हो।
04:28अरे लेकिन वो सब तो मैंने तेरे फले के लिए किया था न।
04:32मैं तो कहती हूं कि हमें इनकी कमरे की तलाशी लेनी चाहिए।
04:36तुम बिल्कुल सही कह रही हूं।
04:39स्वीटी और कुणाल दोनों रतनलाल के कमरे की तलाशी लेते हैं।
04:43और उन्हें वहाँ स्वीटी की जूलरी और पैसे मिल जाते हैं।
04:46मैं तो पहले ही जानता था कि चोर आप ही हो।
04:49निकल जाओ मेरे घर से और दुबार अपनी शकल मत दिखाना।
04:52रतनलाल आखों में आसुली ये घर से निकल जाता है।
04:56स्वीटी मन ही मन सोचती है।
04:58हम। आज तो मेरे प्लानिंग सफल हो गई।
05:01जैसा मैं चाती थी ऐसा ही किया।
05:03और बड़ी आसानी से उस बुड़ी को चोरी का इल्जाम लगा कर घर से भगा दिया।
05:12रतनलाल की हालत अब ज्यादा खराब हो गई।
05:15और वो सड़क पर बैठ कर भीक मांग कर खाने लगा।
05:18एक दिन वहाँ एक गाडिया कर रुकी और सड़क पर बैठे सभी भिखारियों को अपने सेंटर ले गई।
05:24एंजियों की मालिक संध्या एक एक कर के सभी को सुविदा मोहया कराती है।
05:29तब ही उसके नजर रतनलाल पर पड़ती है।
05:32पिता जी।
05:33संध्या तू।
05:35पिता जी आपकी ये हालत कैसे हुई।
05:38ये सब मेरे पूरे कर्बों के ससा है।
05:43जो मुझे मिल रही है।
05:45मुझे बाफ कर दे बेटी है।
05:52पिता जी।
05:53मैं आप पर बिल्कुल भी गुसा नहीं हूँ।
05:55क्योंकि आपने मुझे यहां भेज कर अच्छा ही किया।
05:58मेरी सिंदगी बदल गई।
06:00लेकिन ये सब हुआ कैसे बेटा।
06:05आप ये नए कपड़े पहनो।
06:07तब तक मैं योगेश्वर अंकल को बुला कर लाती हूँ।
06:11योगेश्वर अंकल।
06:12हाँ अंकल।
06:14योगेश्वर जी ने तुझसे शादी नहीं की थी।
06:18नहीं तो पापा।
06:19उन्होंने तो मुझे पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया है कि मैं आज सब की सेवा कर पा रही हूँ।
06:25रतनलाल पश्चा ताप करकी रूता रहता है।
06:28तब ही योगेश्वर भी वहां आ जाता है।
06:31रतनलाल जी आपकी ये हालत कैसे हुई।
06:35इतने सारे पैसों के बावजुद भी।
06:39क्योंकि मैंने बेटे और बेटी में भेदभाव किया था।
06:43लेकिन आपने ये कैसे किया।
06:45मुझे ये जानना है बताइए।
06:48सालों पहले जब संध्या छोटी थी।
06:51तब मैंने एक बार एक आदमी से तुम्हें बात करते हुए सुना था।
06:55जो कुछ पैसों में संध्या को तुमसे खरित कर शादी करना चाता था।
06:59मैं उस समय एंजियों में बच्चियों के लिए ही काम कर रहा था।
07:03और मैं किसी भी लड़की की जिन्दगी खराब होते नहीं देख सकता था।
07:07इसलिए मैंने अपने जीवन की कमाई का एक बड़ा हिस्सा तुम्हें दे दिया था।
07:12सच में कितना गलत था मैं, मुझे माफ कर दो।
07:16अब आप दोनों मेरे साथ घर चलो और आज मैं अपना सच्चा प्रायश्चित करना चाता हूँ।
07:22योगेश्वर और संध्या रतनलाल के साथ घर जाते हैं।
07:26स्वीटी दर्वाजा खुलती है।
07:28चोर फिखारी तो फिर से आ गया। चल भाग यहां से बुड़े।
07:32यह घर तुम्हारे बाप का नहीं मेरा है। बाहर निकलो यहां से।
07:37रतनलाल कुणाल और संध्या को घर से बहार निकाल दीता है।
07:42योगेश्वर जी अब यह घर आपका है। और अब आप यहां एक और NGO खोल सकते हैं।
07:48शायद अब यह सच्चा प्रायश्चित है।
07:51संध्या अपने पिता के गले लग जाती है।
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