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यह कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता मुश्किल हो सकता है, लेकिन अंत में उसका फल हमेशा मीठा होता है। एक छोटे से गाँव में रहने वाले एक ईमानदार व्यक्ति की प्रेरणादायक यात्रा, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी नैतिकता नहीं छोड़ी और आखिरकार उसे उसकी निष्ठा का भरपूर सिला मिला।
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Transcript
00:00मैंने मेट्रिक ठक ही तालीम हासिल की थी के अबबा की नौकरी छूट गई
00:07मजबूरन मुझे पढ़ाई छोड़कर नौकरी तलाश करना पड़ी
00:13मगर कही भी नौकरी ना मिली
00:17मैं एक महीना फारिक रहा
00:21फिर अबबा ने बड़ी कोशिश के बाद सेट अशर के यहाँ ड्राइवर लगवा दिया
00:28मैं सुभा आज बजे उनको फैक्टरी ले जाता
00:33और शाम छे बजे वापस ले आता
00:37फारिख वक्त में मैंने फर्स्ट एर का कोर्स पढ़ना शुरू कर दिया
00:43अबबा ने भी दुकान खोल ली थी और गुजारा होने लगा था
00:50इसी तरह दस ग्यारा महीने गुजर गए
00:54इंटर के इमतहानी फॉर्म जाने लगे
00:58मैं शश औ पंज में मुपतला था
01:01मेरे पास इतने पैसे नहीं थें के फॉर्म जमा करा सकता
01:08मैंने अल्ला पर मामला छोड़ दिया
01:12अगले दिन जब मैं अशर सहाब को छोड़ कर गारी कोठी में खड़ी करके
01:19वापस जाने लगा तो लॉन में एक चमकदार चीज़ दिखाई दी
01:25मैंने छुक कर उठाया
01:28वो कीमती मौतियों का हार था
01:32उनकी जग मदाहच से मेरी आखे चंधा गए
01:37मैंने हार जेब में डाल लिया और घर आ गया
01:43मेरा खुशी के मारे बुरा हाल था
01:47मगर मेरा समीर मुझे मलामत भी कर रहा था
01:51अगर मैं उन में से एक मौती भी बेच दो
01:56तो मेरी दाखिला फीज समेथ
01:59तमाम हर्च बाअसानी पूरा हो सकता है
02:03मैंने सोचा
02:05मगर अगले ही लंगे
02:08मेरे जमीर में मुझे बेडार कर दिया
02:12मौाज ये हराम है
02:15ये तुम्हारा में ही
02:17हिसी की अमानत है
02:19अमानत का लव सुनते ही
02:23मुझे अबा की नसिहतें याद आ गए
02:26जिन्दगी में कभी खियानत नहीं करना
02:32मैंने एक फैसला किया
02:35और हार को हिफाज़त से रख दिया
02:38अगले दिन में सेट अशर के यहां पहुँच गया
02:43इतवार का दिन था
02:45वो लौन में बैठे थे
02:48जब मैंने उनके सामने हार रखा
02:52तो वो उच्छ पड़े
02:53माज तुम्हें पता है
02:57इस हार की कीमत पंद्रा लाख लुपै है
03:01सर मुझे मालूम है
03:04मगर ये मेरे लिए हराम है
03:07मैंने सादा सा जवाब दिया
03:11वो मेरी इमानदारी से बहुत खुश हुए
03:15जब उनको पता चला
03:17कि मैं पढ़ना चाहता हो
03:20तो वो कहने लगे
03:21तुम घर बैठो
03:23मैं तुम्हारी परहाई के
03:26तमाम अखराजात बरदाश्ट करूंगा
03:29और तुम्हें दस हजार रिपैर
03:32माहाना वजीफा भी दूंगा
03:36मैंने खुशी से उनके हाथ चुम दिए
03:39मुझे मेरी इमानदारी का सिला
03:43मिल चुका था
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