00:00ऐसा है कि मेरे ड्राइंग रूम में अगर सोफे पे मुझे कोई कौकरुच नजर नहीं आए
00:07तो भाई मुझे तो सोफे पे बैठने का मज़ा भी नहीं आता
00:12कमरों में अगर मकडों के जाले ना लगे वे हूं तो घर घर नहीं लगता
00:19और चुंके आपको पता ही है कि भाई मैं वान यूनिट बंगला में रहता हूं
00:25तो महमान जो हैं वो उपर की सीडियां चड़ते हुए अगर पान की पीक फैंकते हुए ना जाएं
00:34तो ऐसे लगता है कि महमान दारी में कुछ कसर रह गई है और महमान नवाजी का मज़ा किरकिरा हो
00:39जाता है उसे
00:40तो आपने खरा सच बोलकि सबको बता दिया कि नालों और गल्यों की सफ़ाई अब कभी भी नहीं होगी है
00:45ना
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