00:00लाक्षा ग्रह की साजिश धीरे-धीरे आकार ले रही थी। दुर्योधन और शकुनी ने मिलकर एक ऐसा महल बनवाया, जो
00:07बाहर से तो बेहत सुन्दर था, लेकिन अंदर से पूरी तरह ज्वलनशील।
00:11वार्नावर्त में पांडवों को वहां रहने भेजा गया, एक चाल, एक जाल, एक मौत का इंतजार, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं
00:20था कि विदुर सब समझ चुके थे, उन्होंने गुप्त संकेतों में युधिष्ठिर को चेतावनी दी, पांडव सतर्क हो गय, और
00:30चुप
00:40सुरंग से निकल चुके थे, सब को लगा, पांडव जल कर मर गय, लेकिन सच कुछ और था, वो जिन्दा
00:46थे, और अब परचाईयों में रहकर, सही समय का इंतजार कर रहे थे, कहानी अब और खतरनाक होने वाली थी,
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