00:26आत्मा तो लाइट है
00:30लाइट तो एक सेकिंड में किसी को बता भी नहीं चेलेगी, कहां भी जाता है ना, लाइट हैस गॉन
00:44मर तो वो तेरा साल पहले गया था, लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिस्से में आई, जब इस चिता पर
00:52लेटने के बाद, हरीश के आत्मा की लाइट, यानि रोशनी, चिता से उड़ती इस आग के साथ मिलकर, हमेशा हमेशा
01:01के लिए ये दुनिया छोड़ गे।
01:06पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले, हरीश आजाद भारत के इतिहास का ऐसा पहला भारतिय बन गया, जिसे अदालत
01:15और अस्पताल ने मिलकर, माबाप की इक्षा को ध्यान में रखते हुए, इक्षा मिठती हुदी।
01:28भारत में पैसिफ युथिनेजिया का ये पहला मामला है, हरीश अपनी मौत के साथ, नजाने इस देश के ऐसे कितने
01:37ही मरीजों के लिए एक रास्ता खोल गया।
01:41रास्ता लाश बनकर जीने की बजाए इज़त से इक्षा मिर्चियूगा।
01:5224 मार्च यानि मंगलवार का दिन था, शाम के ठी चार बच कर दस मिनट हुए थे, और यही वो
02:00वक्त था, जिसका इंतजार बीते दस दिनों से, खुदेम्स के डॉक्टर और हरीश के माबाब कर रहे थे, हरीश के
02:10सांसों की आखरी हिच्की की, वो चार बच कर दस मिनट ही ह�
02:24हरीश की मौत के बाद 24 मार्च को ही एम्स की तरफ से एक बयान जारी किया जाता है, यह
02:31वही बयान है.
02:32काइदे से इस बियान में ऐसा कुछ नहीं है सिवाहिस के केम्स हरीश की मौत की तस्दीक कर रहा है
02:38मौत का वक्त बता रहा है तारीख बता रहा है
02:42शायद एम्स की भी गलती नहीं है क्योंकि एम्स है ही इसलिए ताकि बीमारों का इलाज कर सके
02:48और उन्हें अच्छा कर सके
02:50पर ये पहली बार था जब एम्स के एक मरीज को उसकी बीमारी के इलाज के लिए नहीं
02:56बलकि मौत के इलाज के लिए एम्स लाय गया था
02:59पर ये बयान लिखते वक्त इस अजीब और खुद शायद एम्स का ऐसा पहला केस होने की वज़ा से
03:18यानी देखभाल ऐसे मरीजों का होता है जिनकी बीमारी का इलाज चल रहा हूँ
03:24जिसके ठीक हो जाने की उम्मीदे हो पर हरीश तो एम्स लाया ही इसलिए गया था
03:29ताकि उसे मौत दी जा सके
03:33इसलिए इस बयान का ये केर शब्द कम से कम हरीश के मामले में अजीब सा लगता है
03:39क्योंकि यहां हरीश की जिन्दगी नहीं बलकि उसकी मौत की देखभाल यानी केर करनी थी
03:47वो इसी महीने के एक 11 तारीख थी यानी 11 मार्च जब देश की सबसे बड़ी अधारत
03:54सुप्रिम कोर्ट ने एक बेहत मार्मिक और एतिहासिक फैसला दिया था
03:58हरीश के माबाप की गुजारिश पर 13 सालों से एक जिन्दा लाश बन कर
04:04जो हरीश चार बाई छे के बिट पर लेटा हुआ था
04:07उसे इस्जत की मौत देने का फैसला
04:10यानि पैसिफ यूथेनेजिया इस हुक में के तीन दिन बात ही
04:1514 मार्च को हरीश को गाजियाबाद के उसके इस खर से एम्स ले जाए गया
04:21एम्स ले जाने से ठीक एक दिन पहले यानि 13 मार्च की यह हरीश की आखरी जिन्दा तस्वीर है
04:28तब ब्रहम्म कुमारी की बेहने उसे आखरी विदाई देने उसके घर पहुँची थी
04:48अब 14 मार्च की सुबह हो चुकी थी
04:50शनिवार का दिन था
04:52इस घर का ये कमरा अब खाली होने जा रहा था
04:56इस बेट की भी अब इस कमरे में शायद कोई जरूवत नहीं
04:59सुबह के करीब 11 बजे होंगी
05:02आखरी सफर पर निकलने से पहले हरीश को बस एक आखरी सफर और करना था
05:08घर से 33 किलोमेटर दूर एम्स तक का सफर
05:12उस एम्स का जहां धीरे धीरे मशीनें उसकी सांसों की दोर को तोड़ कर
05:18हमेशा हमेशा के लिए न सर्फ उसकी धरकनों को खामोश कर देंगी
05:23बलकि ये खुला मूँ और खुली पलके भी हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी
05:2913 मार्च की दोबहर लगबग एक बजे का वक्त रहा होगा
05:34जब हरीश के माबाप और भाई उसे एम्बुलेंस में बिठाकर घर से विदा करते हुए
05:40अपने साथ उस एम्ट में पहुँचे
05:42जहां हर मरीज इस उम्मीद से पहुचता है कि वहां से वो ठीक होकर अपने खर लोटेगा
05:49लेकिन ये दुनिया के शायद वो बदमसीद बाबाप है
05:53जो अपने बेटे को देश के सबसे बड़े अस्पतार इसलिए ले जा रहे है ताकि वो मरकर लोटे
06:02एम्स के बाद हरीश की आखरी मन्जिल उसका अपना घर नहीं बल्कि कोई शमशान होगा
06:10ये उसी एम्स में मौझूद इंस्टिट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल है
06:15वैसे इसका पूरा नाम बियार अमेटकर इंस्टिट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल है
06:21इसे बिल्डिंग की पहली मन्जिल पर पैलियेटिव केर यूनिट यानी PCU डिपार्टमेंट है
06:28असल में PCU में उन मरीजों को ही रखा जाता है
06:32जो बहुत दर्द या तकलीव में हो और जिनके दर्द की कोई दवाना ह।
06:37पचने के उमीद लगबख खत्म हो चुकी हो
06:40बस यू समझ लीजे
06:41कि एक मरीज को आसान और कम तकलीव दे मौत देने की जो जगा होती है
06:47उसे ही पैलियेटिव केर यूनिट या PCU कहते है
06:53सुप्रेम कोर्ट का हुम था
06:55तारीख 14 मार्च की पहले से तह दी
06:57लहाजा PCU वाड में हरीश के लिए एक आखरी बेट भी तैयार था
07:02इसी बिल्डिंग की पहली मन्जिल पर
07:05हरीश के हिस्से मौत की जो बिस्तर आई है
07:08उसका नमबर है
07:09बेट नमबर ती
07:12बेशक एम्स देश का सबसे बड़ा स्पताल है
07:15लेकिन बदनसीबी देखिए
07:17कि जिन्दगी बचाने वाले एम्स के सामने भी पहली बार एक ऐसा केस आया
07:22जिसमें उसे किसी की जिन्दगी बचानी नहीं बलकि जान लेनी थी
07:27वो भी पूरी मर्यादा, इंसानियत, टॉक्टरी के महान पेशे
07:32और कानून को ध्यान में रखकर
07:34हरीश जब 14 मार्ट की दोपहर एम्स लाया गया
07:37उससे पहले ही एम्स में धीरे धीरे उसकी जान लेनी की तैयारी शुरू हो चुकी थी
07:44हरीश एक दम से नहीं मरने वाला था
07:46बलकि आहिस्ता आहिस्ता इस तरह उसकी जान ली जानी थी
07:50कि शायद जान निकलने की जो तकलीफ होती है उसे उस तकलीफ तक का एहसास न हो
08:00ये डॉक्टर सीमा मिश्रा है एम्स की ओनको एनिस्थीसिया की हेड अफ डिपार्टमेंट
08:06वो डौक्टर सीमा मिश्रही थी जिनकी निगरानी में हरीश को धीरे धीरे मौत की आगोश तक पहुचाना था
08:14सुप्रीम कोड का साफ हुक्म था कि हरीश के हिस्से जो मौत आए वो आसान और धीरे धीरे आए
08:21इस हुक्म पर अमल करना इतना आसान भी नहीं था
08:25वज़ा ये थी कि डॉक्टर सीमा मिश्रा की अगवाई वाली डॉक्टरों की टीम को हरीश की जिंदगी छीनने के लिए
08:32किष्टों में घंटों के हिसाब से उनुन चीजों को उससे दूर करते जाना था जो पिछले 13 सालों से उसे
08:40मरने नहीं दे रही थी
08:42और यहीं से हरीश की मौत का सफर शुरू होता है
08:4714 मार्च को एमस लाए जाने के बाद सबसे पहले डॉक्टर उसकी उन दवाओं से उसे दूर कर देते हैं
08:54जिनके सहारे वो लाश बन कर भी सांसे ले रहा था
08:58एक एक लाइफ सेविंग ट्रक्स किष्टों में बंद किया जा रहा था
09:03एक एक कर जब सारी दवाओं बंद कर दी गई
09:06तो डॉक्टरों को एहसास हुआ कि हरीश तकलीफ में आ गया
09:10अब चुकि मौत आसान और बिना तकलीफ के देनी थी
09:14लहाजा डॉक्टरों ने जिन्दगी बचाने वाली दवाओं को तो हरीश से दूर कर दिया
09:19मगर दर्द और तकलीफ कम करने के लिए उसे पेन किलर देना शुरू कर दिया
09:25पेन किलर से सिर्फ दर्द के शिद्द कम होती है
09:28मौत दूर नहीं होती
09:31पैलेटिफ केर डिपार्टमेंट की जिस पहली मंजिल पर हरीश को रखा गया था
09:36ठीक उसके बराबर वाले कमरे में हरीश के घर वाले थे
09:40ताकि आखरी कुछ दिन और आखरी लमहे तक वो अपने बेटे के साथ रहे
09:45लाइफ सेविंग ड्रक्स और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पहले दो दिनों में ही पूरी तरह से हटाया जा चुका था
09:52इन्हें हटाने के बाद डॉक्टर हरीश का ब्रेट पेशन, शुगर और दूसरे टेस्ट कर लगातार ये जाच कर रहे थे
10:01कि हरीश के हालत कितनी नाज़ुक होती जा रही है
10:15लाइफ सेविंग ड्रक्स और लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के बाद हरीश की हालत की जाच कर डॉक्टरों ने पहले चार
10:23दिनों में अब हरीश को खाना और पानी ना देने का फैसला किया
10:27हरीश पिछले 13 सालों से फूट पाइप के जरीए लिक्विट खाना खा रहा था
10:32पर दवाओं की तरह हरीश का खाना पानी किष्टों में नहीं
10:36बलकि एक ही बार में पूरी तरह बंद करना पड़ा
10:40खाना पानी बंद होते ही हरीश की हालत सबसे ज़्यादा बिगड़नी शुरू है
10:45शोगर और यूरीन टेस्टे डॉक्टर अब हरीश की बिगड़ती हालत
10:50और उसके बाद उसकी आखरी सांस की तारीख और वक्त का अंदाजा लगाने लगा
10:56कहते हैं कि बेगार खाना पानी के इंसान 10-15 दिन तक जी सकता है
11:01लेकिन हरीश सिर्फ 6 दिन भूका ब्यासा रह सका
11:05सोंवार यानि 23 मार्च की शाम हरीश की हालत सबसे ज़्यादा बिगड़नी शुरू ही
11:11उसकी हालत देखकर डॉक्टरों को लगा कि शायद अगले कुछ घंटों में हरीश की सांसे रुख जाएं
11:18लेकिन बिना किसी दवा, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और खाना पानी के भी हरीश ने पूरी रात काट थी
11:25अब 24 मार्च की सुबा हो चकी थी
11:27मंगलवार का दिन था, सुबा से हरीश का पूरा चिस्प जो पहले से ही बेजान था
11:33उसकी थोड़ी भव धरकत भी बंध होने लगी
11:36जो हरीश बीते 13 सालों से मूँ खोल कर गले से इस तरह सांसे लेता
11:42और अपनी आखों की पलकों को बीज बीज में छपकता
11:46उसकी रफतार भी अब कम होने लगी थी
11:50मंगलवार की दोपहर होते होते
11:52बागी की टेस्ट रिपोर्ट से डॉक्टर समझ चुके थे
11:55कि अब बस कुछ घंटों की ही बात है
11:59मंगलवार दोपहर 12 बजे की बात रही होगी
12:02बराबर के कमरे में मौजूद
12:05हरीश के माबाप और भाई बहन को
12:07डॉक्टरों ने पहली बार ये जानकारी दी
12:10कि अब शायद हरीश की आखरी घड़ी आ गई है
12:13इसी के बाद हरीश की माँ हरीश के कमरे में जाती है
12:17और हरीश के करीब बैट कर
12:20हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर देती है
12:23थोड़ी देर बाद ही हरीश के पिता, भाई, भाई की पत्मी, बहन और उनके पती
12:29सभी हरीश के कमरे में हरीश के पास थे
12:32सभी परातनाए कर रहे थे
12:36दोपहर तीन बजे का वक्त रहा होगा
12:38जब हरीश की खुलती बंध होती बलके अचानक बंध हो गई
12:42डॉक्टरों ने फिर से हरीश का चेकप किया
12:45उसकी सांसों को टटोला
12:47आपस में बातें की मशीन को पढ़ा
12:50और फिर शाम के ठीक चार बच कर दस मिनट पर
12:54पहली बार डॉक्टर ने हरीश की माँ को बताया
12:57हरीश मर चुका है
13:02एमस लाए जाने के ठीक 248 घंटे बाद
13:06आखिरकार हरीश की मौत हो गई
13:09अब चुकि हरीश की मौत की वज़ा
13:11पहले से मालूम थी
13:12लियाजा हरीश की मौत के बाद
13:15पोस्ट मौटम की भी जरूरत नहीं पड़ी
13:17अब हरीश को एमस से ही घरवाले
13:20शम्शान ले जाती है
13:2425 मार्च सुबा करीब 9 बजे
13:26हरीश के परिवार
13:28हरीश के पड़ोसी
13:29सिर्फ हरीश की कहानी सुनकर
13:31हरीश को जानने वाले
13:33उससे हमदर्दी रखने वाले
13:35एमस के करीब
13:36ग्रीन पार्क शम्शान पहुँचते हैं
13:39सुबा के 9 बज कर 28 मिलट हुए थे
13:41जब हरीश का छोटा भाई आशीश
13:44चिता को मुखागनी देता है
14:00फर्याद माबाप की थी
14:01हुक्म देश की सबसे बड़ी अदालत का
14:05और उस हुक्म पर अमल करना था
14:07देश के सबसे बड़े अस्पताल को
14:09दस दिन पहले सुप्रीम कोट के
14:12उसी हुक्म पर अमल करने के लिए
14:14उसे एमस लाया गया
14:16जिन्दगी नहीं मौत के इलाज के लिए
14:19इलाज काम्याब रहा
14:20और इस तरह हरीश मर गया
14:24तेरा साल का दर्थ
14:25शायद अब रोशनी और चिता की आग में चल चुका हूँ
14:29मगर दुनिया की कोई भी आग या रोशनी
14:32हरीश के इन माबाप के दर्थ को
14:35शायद ही कभी चला पाए
14:37क्योंकि ये वो पदनसी माबाप है
14:40जिनोंने पूरे तेरा साल तक
14:42अपने बेटे की मौत देखी है
14:44जिता तो बस आखरी रस में अदाईगी थी
14:51ये हरीश के पिता अशोक राना है
14:54बेटे की मौत पर शम्शान आए
14:56लोगों के सामने
14:57हाथ जोड़कर एक विंती कर रहे है
15:01इनकी विंती ये है
15:02कि हरीश की मौत पर
15:03कोई भी रोएगा नहीं
15:06मगर आखिर में
15:07खुद ही रोगार
15:11कोई भी रोएगा नहीं
15:13जिम्त अरशर ये आत्मा थांकी से जाए
15:16हरूरा को आजबता है
15:19ये थांकी से जाए
15:21कि आखरट भगों क्या कि आत्वा
15:23हमेज लिश्रा ते तो खुचिए
15:38दिल्ली से मलीशा जहा और अमर्दीब कुमार के साथ महिंग गौड घासियाबाद आज तक
15:53बात 11 साल पुरानी है तब हरीश और उसके घरवालों की जिन्दगी पूरी तरह से गुल्जार थी
16:01हरीश इंजीनियर बनना चाहता था अपने इसी खौब को पूरा करने के लिए 2013 में उसने चंड़ेगड युनिवरसिटी में दाखला
16:09लिया
16:11इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी हरीश युनिवरसिटी के नजदीक मुहाली में एक पीजी में रहता था
16:18पीजी में उसका कमरा चौथी मन्जिल पर था
16:21कॉलिज से आने के बाद एक रोज हरीश अपने पीजी की बालकनी पर ख़ड़ा था और अचानक वो उस बालकनी
16:28से नीचे गिर गया
16:34हरीश को फोरण पीजी आई चंड़ी गड़ी जाया गया
16:37उसके सिर पर गंभीड चोटे आई थी सांसे चल रही थी लेकिन वो होश में नहीं था
16:45चुकी मामला एक्सिडेंट का था लहाजा मुहाली पुलिस ने एफ आई आर भी धर्च की
16:51हरीश के घरवालों ने तब इलजाम भी लगाया था कि उनके बेटे को जान बूच कर कुछ लड़कों ने बालकनी
16:57से नीचे गिराया
17:03चंड़ीगड पीजी आई में हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ
17:06डॉक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर लिया
17:09लेकिन माबाप ने हिम्मत नहीं हारी
17:11वो हरीश को पीजी आई चंड़ीगड से दिल्ली के एम्स ले आए
17:16यहां भी उसका लंबा इलाज चला पर हालत में कोई सुधार नहीं
17:21एम्स के डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया
17:24एम्स के बाद हरीश को दिल्ली के हिराम मनोहर लुया अस्पतार
17:28फिर लोक ना एक जैपरकाश ना रायन अस्पतार
17:31और उसके बाद फोटिस अस्पताल में घरवानों ने भर दी करा
17:35लेकिन कहीं कोई फायदा नहीं हुआ
17:39अलबत्ता इस इलाज की वज़ा से घर की माली हालत दिन बदिन खराब होती थी
17:48हरीश के पिता अशो उकराना एक कैटरिंग सर्विस कंपनी में नौकरी क्या करते थे
17:53तनखा बहुत ज्यादा नहीं थी
17:55आमदनी का दूसरा जरिया भी नहीं था
17:57छोटा बेटा आशीस तब बहुत छोटा था
18:00फिर भी उन्होंने हरीश के इलाज के लिए अपना सब कुछ छोट दिया
18:04यहां तक कि दिल्ली के जिस घर में वो रहा करते थे
18:07उस घर को भी बेच दिया
18:08पर हरीश के हालत में कोई सुधार नहीं बोई
18:12वो एक जिन्दा लाश की तरह बिट पर पड़ा रहा हूँ
18:16जब हर डॉक्टर हर हस्पताल ने जवाब दे दिया
18:19तब मजबूरन हरीश के माबाप उसे घर ले आए
18:22उन्होंने हरीश की देख भाल के लिए एक नर्स रख लिया
18:25पर नर्स का खर्चा भी कम नहीं था
18:42इलाज के साथ साथ घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था
18:45फिर वो वक्त भी आया जब अशोक राना नौकरी से रिटायर कर दिये गए
18:51छोटे बेटे की अभी नौकरी भी नहीं लगी थी
18:53मजबूरन उन्हें नर्स को हटाना पड़ा
18:56अब हरीश की देख बाल खुद माबाप किया करते हैं
19:28बेटे की दवा और घर का खर्च चलाने के लिए शोकराना ने सैंड्विच और स्प्राउट पेचना शुरू कर दिया
19:40घर के पास ये एक मैदान है जहां खास कर हर शनिवार और रविवार पड़ी तादाद में बच्चे खेलने आते
19:46हैं
19:47शुरुवात में अशोकराना घर में ही सैंड्विच और स्प्राउट पना कर मैदान ले जाते हैं
19:52और वहां वो बच्चों को बेचा करते हैं
19:55घर का कुछ खर्चा निकला था
19:57पेंशन के नाम पर तीन हजार रुपे मिला करते थे
20:00फिर भी इन सब के बीच घर चलाना मुश्किल हो रहा था
20:03महीने साल बीचते रहें
20:06इदर हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ
20:09नजाने कितने बरस कितने मौसम बीच गए
20:12पर हरीश इस मुद्दत में इसी बिस्तर पर युँगी पढ़ रहा
20:17इस पूरी मुद्दत में उसने एक करवट तक नहीं बदली
20:22बिस्तर के साथ एक यूरीन बैग और एक फूट पाइप लगा था
20:25उसी पाइप के सहारे उसे रोजाना उसकी माँ खाना दे दी
20:33गुजरते वक्त में हरीश को एक इनसान से कंकाल बना दिया था
20:37पर ना उसे कंकाल कह सकते और नहीं मुरता
20:41क्योंकि एक चीज अब भी ऐसी थी जो उसका साथ नहीं छोड़ रही थी
20:46और वो थी उसकी सांस ही
20:52और इसी सांस ने उसे जिन्दा होने का सर्टिफिकेट दे रखा था
20:56जबकि तमाम अस्पताल और डॉक्टर कपका अपना हाथ खड़ा कर चुके थे
21:00घर के इस एक बिस्तर ने मानो घर की पूरी खुशियां ही निकल ली थी
21:05कैसा तेवार कैसी खुशियां किसका चलम दे
21:09खुशी देने वाली हर खुशी ने यहां मातम का लबाता और रखा था
21:21अब तक हरीश को इसी तरह बिस्तर पर जिन्दा मुर्दा लेटे दस बरस बीच चुके थे
21:26इन दस लंबे बरसों में हरीश की हालत जरा भी नहीं बतली
21:30लेकिन घर में रहने वाले बागी तीन जिन्दा लोगों की जिन्दगी पूरी तरह से पतल चुकी थी
21:51और तभी एक रोज अचानक हरीश की माने एक आरजू की
21:56दुआ में लिप्टी ये आरजू हरीश की मौत की थी
22:01हरीश की माँ चाहती थी कि अब हरीश के हिस्से मौत ही आ जाए
22:12हाजसे के बाद से हर रोज अपने बच्चे की जिन्दगी की दुआ मांगने वाली माँ
22:17अब हर वक्त अपने बेटे की मौत की दुआ मांग रही थी
22:22पर मौत भी जित्ती है आती अपनी मर्जी से ही है लहाजा मौत ने भी मां की आर्जू पूरी करने
22:28से इंकार कर दिया
22:30दवा के बाद अब दुआ भी बेकार जा रही थी और ठीक तभी हरीश की मां ने एक फैसला लिया
22:37एक ऐसा फैसला जो शायद ही दुनिया की कोई भी मां ले सकती है
22:42मां के इस फैसले के साथ हरीश का पूरा परिवार एक फर्यात के साथ दिल्ली हाई कोट के दरवाजे पर
22:50दस्तक देता है
22:52मनीशा जहा और मैंगौल के साथ हिमानशो मिश्रा आज तक
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