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Harish Rana Case:गाजियाबाद के हरीश राणा ने 13 साल तक बिस्तर पर एक बेहद कठिन और दर्द भरी जिंदगी जी। एक हादसे के बाद वे न बोल सकते थे और न ही चल सकते थे, और पूरी तरह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर हो गए थे।लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, सुप्रीम कोर्ट से उन्हें ‘पैसिव यूथेनेशिया’ यानी इच्छा मृत्यु की अनुमति मिली। इसके बाद लाइफ सपोर्ट हटाए जाने पर उन्होंने अंतिम सांस ली और वर्षों से चली आ रही पीड़ा से उन्हें मुक्ति मिल गई।उनके निधन के बाद परिवार गहरे सदमे में है। यह कहानी न सिर्फ दर्द और संघर्ष की है, बल्कि एक इंसान को सम्मान के साथ विदाई देने की भी है।.Watch Video To Know More

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00:00सब को माफ करते हुए और सबसे मापी मखते हुए
00:30लेकिन हर दिन वही दर्द वही बेबसी एक इनसान जिन्दा हो लेकिन जी ना पा रहा हो ये दर्द सिर्फ
00:37वही समझ सकता है या फिर उसका परिवार आखिरकार वो दिन आया जब फैसला लेना पड़ा दिल पर पत्थर रखकर
00:44सुप्रीम कोट ने हरी श्राना को एक च्छा म�
00:47वित्यू की अनुमती भी दी ताकि उन्हें इस दर्द से मुक्ते मिल सके और फिर दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में
00:52हरी श्राना ने अपनी आखरी सांसे ली कहते हैं उनके आखरी दिन बेहद मुश्किल थे लेकिन अब उन्हें उस दर्द
00:59से आजादी मिल गई है घर में सन
01:1513 साल से बिस्तर पर दर्द के साथ जिंदगी बिता रहे हरी श्राना ने इस दुनिया को हमीशा हमीशा के
01:22लिए अलविदा कह दिया गाजियबाद के हरी श्राना 13 साल तक बिस्तर पर एक बेहद मुश्किल और दर्द भरी जिंदगी
01:29जीत रहे एक हादसे के बाद ना वो बो
01:42क्योंकि अनुमती मिली इसके बाद लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाने पर उन्होंने आकरी सांस ली और सालों से चली आ
01:49रही पीड़ा से उन्हें हमीशा हमीशा के लिए मुक्ती मिल गई उनके निधन के बाद परिवार गहरे सदमे में है
01:55ये कहानी ना सिर्फ दर्द और
01:57संगर्श की थी बलकि एक ऐसे इनसान की थी जो सम्मान के साथ इस दुनिया से जाना चाहता था

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