00:08आपको बता दें इस वक्त गाजयवाद के रहने वाले हरीश राना आज एमस दिल्ली के आई सीओ में जिंदिगी और
00:16मौत के भी जूज रहें करीब 13 साल पहले हरीश एक नॉर्मल यूबा थे जो इंजिनियर बनने का सपना लेकर
00:23घर से निकले थे जब वो पढ़ाई के लिए
00:25जा रहे थे तो उन्होंने अपनी मा से वादा किया था कि अगली बार घर आकर उन्हें बदरिनात यात्रा पर
00:30ले जाएंगे लेकिन किसमत को कुछ और ही मनजूर था साल 2013 में इस सीरियस हाथ से के चलते उनके
00:37सिर में चोट लग गई और वो कोमा जैसे सिट्वेशन में चले
00:52रहे डाल दिया गया है जुई हां डॉक्टरों ने उनका वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब हटा दिया है और अब उन्हें
00:59दर्द ना हो इसके लिए दवाईयों के जरिया राम दिया जा रहा है माहर दिर उनके पास बैठकर बस यही
01:04कहती है कि बेटा अब तुझे दर्
01:19पर नजर रखी हुई है और परिवार को मेंटली सहरा दिया जा रहा है यह पूरा प्रोसेस कोछ हपतों तक
01:26चल सकता है हरिशाना की कहानी सिर्फ एक इनसान की कहानी नहीं है बलकि उन सभी परिवारों की है जो
01:32लंबे समय तक अपने परिजनों को दर्द में देखते हैं और
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