00:00धन्गर समाज के लिए रिजर्वेशन मांगते हैं दीपक बॉराडे का आज नौवा दिन है अंशन का नौवे दिन अंशन पे
00:08न की तबिएत कैसी आई उन्हीं से जानते हैं तब यह ठीक है तब ठीक तो लोगों को बोलना पड़ता
00:13है लेकिन ठीक कहा से होगी नौवा दिन �
00:17चल रहा है। इससे पहले आपने आपने 16 दिन का भी अंशन किया था लेकिन अभी क्या सरकार की तरह
00:24से कोई बाचीत करने आया आपकी तबियत बूछने कोई आया
00:26� dominance वाहाशन गलोब क होई बाचीत को भी कुछ भी हिसने कोई सरकारी तंतर का कोई हिस्सा
00:34नहीं है पुलिस के लोग देखे आज काफी जारे खड़े हैं क्या उनलोग ने आपको यहां से हटने के लिए
00:40कुछ कहा है
00:40नए आज हमें आजाद मैदान की जो रूल से उसके इसाब से पर्मिशन है मिली वी अभी तोड़ी देर बाद
00:52हम आजाद मैदान में जाएंगे
00:55पुलिस का हम पुलिस की बाते मान रहे हैं कौपरेट कर रहे हैं वो भी हमें कौपरेट कर रहे हैं
01:03क्योंकि मैं भी कभी पुलिस था वर्दी का इसा था तो पुलिस और हमारी तो कोई दुश्मनी है नहीं और
01:10जगड़ा जो है हमारा वो है सरकार के साथ तो पुलिस से भी हमार
01:25इनको सिटी का हो सकता है कुछ कम ज्यादा हो तो उतना इग्नोर करके लेकिन आज नौ दिन हो गए
01:31आप देखेंगे तो एक भी आम आदमी को हमारे बज़े से को इतना तो तकलिफ हुई है
01:41मैं यही जाना चाहती क्योंकि आपके जो लोग है यहां पर वो कह रहे हैं कि बाकी लोग आएं ताकि
01:47मुंबई को पैक कर दिया जाए यह पर घंकी ही समझी इसे
01:52मुंबई को पैक करना या जायम करना या किसी को तकलिफ देना यह हमारा उद्देश बिल्कुल नहीं है लेकिन यह
02:01मुंबई है जहां से राज का सब चीजों का कारूबार चलता है
02:10कि यहां से सर्थ सिश्टम आफएट होता है कानून यहां पे बनते है लोगों की भलायी की युजणा ही यहां
02:18से बनती है और अभी आधियोसे चलुए जो भी लोगों की भावनाएं है जो भी
02:37मुंबई तो राजदानी है, सत्ता का केंद्र है, विदान भवन यहाँ पे है, मंतरा लई यहाँ पे है, सभी मंतरी
02:47गन, नेता गन, मुख्य मंतरी यहाँ पे बैटे तो मुंबई नहीं बुलाएंगे तो कहा बुलाएंगे?
02:53इसके हलावा मनोज जारांगे पाटिल जिन्होंने मराठा रिजर्वेशन को लीड किया था, मराठा रिजर्वेशन आखिरकार उनकी अंचन की वज़े से,
03:02जैसे आप अंचन कर रहे हैं, उन्होंने भी कई दिनों तक अंचन किया था, उसकी वज़े से मराठा आरक्षन आखि
03:22थो हुआ कि हमारी यह कोई दिपक बोराडे की लड़ाई नहीं है यह दिपक बोराडे के कोई परसनल इश्यूज नहीं
03:29है यह तो धहीं तीन करोर के आबादी
03:32जो हजारों सालों से जंगल में रहके बेड़ बक्रिया चला चला के पहाडों में रहके अपना जीवन गुजारती है
03:45इनके दुख दर्दों की लड़ाई है इनके अफ़ा दिखार की लड़ाई है
03:49जो बाबा साब ने दिया अमरूत उसको पाने की लड़ाई है
03:53तो इसमें जो भी हमें समर्थन करेगा, हमारा तो 17 सप्टेमबर 25 को जब लड़ाई शुरू किया, उसी दिन एक
04:04बात हमने क्लियर किया था, कि भई जो भी हमें सपोर्ट करेगा, फिरो कौन से जाती धरम का, पार्टी का,
04:12संघठन का है, हमें उससे कोई फरक ने पड़ता, वो
04:16हमारे लिए अगर हमारी दुख को समझने के लिए आ रहा है, और हमें लड़ने में साथ दे रहा है,
04:21तो हमें उसका स्वागत ही करना चाहिए.
04:23याज कल अधिवेशन का आखरी दिन है कि आपको लग रहा है कि ये सरकार कुछ भी कर पाएगी कर
04:30रही है क्या प्लान कर रही है कि आपसे बात चीट करने तक तो कोई आ नहीं है
04:35सरकार बहुत बड़ा प्लान करती है और वो प्लान हमेशे ये होता है कि किसी भी अंदोलन को लड़ाई को
04:43खत्म कैसे किया जाए
04:46और जैसे बोलते साम दाम दंड भेट की नीती जो कहते है आप उन तो अब वो सारे पैत्रे सरकार
04:54आजमा चुकी है
04:57अब सरकार का शेडियंत्र सरकार का इस आंदोलन को दबाने का पूरा प्लान काफी बड़ी ताकत से काम कर रहा
05:11है
05:11अब समाज की ताकत सरकार के इस शेडियंत्र को प्यार्ण को जुखाती है ये देखना है
05:22या समाज सरकार के इस शेडियंत्र को शेडियंत्र का शिकार होता है ये देखना है
05:34अब भी उन्हें इंपजार है इस बात का कि सरकार की तरह से कोई बातचीत हो उम्मीद यही है
05:39और कोशिश यही है कि जो उनके समाज के लोग है देंगर समाज के लोग महराश्र भर से जो आ
05:45रहे हैं मुंबई की तरह वो आए ताकि सांदूलन को आगे ले जाया सकी
05:50कैमरमेंन साहिल चौहान के साथ विद्या मुंबई आज तक
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