00:00Rāči में राम नौमी की शुरुवात बर्स 1929 में हुई, जब पहलीवार 17 अप्रिल को एक छोटा सा जुलूस निकाला
00:07गया।
00:07इसकी प्रेरना हजारिवा की राम नौमी शुभायात्रा से मिली थी।
00:11उस समय इस जुलूस में किवल दो महावीरी जंडे थे और कूछी लोग शामिल थे।
00:16इस परंपरा को शुरू करने में कृष्णाल साहू, जगरनात साहू सही, कई स्थानिया लोगों की एहम भूमिका रही।
00:24इस पर शुरू में पाँच आदमी केवल एक घंडा लेकर घंटी, संक बजा के लोगो लेकर जाते थे, और आज
00:35उसका, उसका, उनिट सो पावन और फिर महावीर मंदर का सब्रा हुआ, महावीर को परातिन महावीर मंदिर से,
00:47अलागे लोगों केजी से नागा बावा, पंदिर नागा बावा थे, नालोगों थे, हिरालाल हल्वाई थे, चत्रभूर नहराइन पाढ़ने थे, एक
01:01बुराटना दी थे, ये लोग मिलके पाँचाब की, एक घंडा को लेकर गिये।
01:08कुछी तरह से रॉम नमी होता आ रहा, उन्हें से 29 से चालू हुआ, पाँचे आदमी मिलकर स्टार्ट किया, और
01:16अब लाखों की संख्या में हो गया है, यहीं से पहला बाद शुरुआते हैं, यहीं से पहले बाद, कुछी यादो
01:22लोग थे, और कुछी मिलकर यहां से, पास
01:38दिरे दिरे इस आयोजन का दिस्तार हुआ, 1930 में रात रोडिस्थी ग्वाला टोली से नन्हु भगत के नित्रित में शोभा
01:45यात्रा निकली, और जंडों की संख्या बढ़ने लगी, 1935 में महाबीर मंडल का गठन हुआ, जिससे इस आयोजन को संगठित
01:53शौरूप मिला
02:21समय के साथ शौभायात्रा का केंद्र महावीर चौक बन गया, जहां महावीर मंदीर में महावीरी पतकाओं का पूजन होता है,
02:30यही से पतका लेकर शौभायात्रा आगे बढ़ती है,
02:33प्रारम में यह जुलूस रातु रोड और आसपास के छेत्रों तक सिमित था, लेकिन बाद में अपरवजार, लालपूर, कांके रोड,
02:40चूटिया, हिंद्पिडी समेथ, पूरे शहर के अखाडे इसमें सामिल होने लगे,
02:45महाविर चौक से निकल कर यह शौभायात्रा शहर के प्रमूक मार्गों से गुजरते हुए अंतता निवारनपुर्श्थी तपुबन मंदिर पहुचती है,
02:53यहीं सभी अखाडे अपनी पतकाएं खड़ी कर पूजा अर्चना करते हैं और शुभायात्रा का समापन होता है।
03:23और भक्तों के बीच में बात बाप्चित के बाद यह गामनोमी बुलूस पुरू हुआ और आज लाकों के लाकों लाकों
03:34में स्वरधाल में यहां आते ही हैं और हजारों हजार में अखाड़ा हैं नाची में और एक परमपरा दिल प्रति
03:42दिन बढ़ता ही जा रहा है और समय
03:46आज नाची की राम नौमी में अठारों सो से अधीक अखाड़े शामिल होते हैं भले ही इसका स्वरूप अभव्व्य और
03:54आधुनिक हो गया है लेकिन महावीर चौक से तपोवन तक पता का पहुँचने की परमपरा आज भी इसकी आत्मा बनी
04:01हुई है लगभग 400 बर्स प�
04:07पूर्ण आस्था का केंद्र है राची से चंदन भटाचारी की रिपोर्ट
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