Skip to playerSkip to main content
Railway Line No.19–Wahan Train Nahi, Kuch Aur Aata Hai
#viral #viralvideo #short #short video #ghost #horror #bhootia #scary #scarystories #scarystory #thriller #fear #mystery #paranormal #horrorstories #horror #hindi #bhoot

Category

😹
Fun
Transcript
00:07रेल्वे ट्रैक पर ट्रेन नहीं चलती, कुछ पट्रिया, किसी और वज़से जिन्दा रहती है।
00:30हौन सुनाई देता है, लाइट्स दूर चमकती दिखती है, लेकिन ट्रेन कभी नहीं आती। आज मैं आपको इस जगे की
00:38असली कहानी सुनाने वाला हूँ।
01:00ट्रैक पुराना है, लोहे पर जंग है, स्लीपर्स धीले पड़े हैं, और आसपास सिर्फ घना जंगल।
01:07रेलवे विभाग ने कई साल पहले इसे नौन ओप्रेशनल घोशित कर दिया था, क्योंकि इस रूट पर आक्सिडेंस लगातार होते
01:15थे।
01:16सबसे अजीबात, आक्सिडेंस में ट्रेन कभी शामिल नहीं होती थी।
01:21हाँ, ट्रैक पर बॉडिज मिलती थी, पर किसी एंजिन के निशान कभी नहीं मिलते थे।
01:27इन अनेक्स्प्लेंड डेट्स के बाद ट्रैक नंबर उननीस को बंद कर दिया गया, लेकिन कहानी यही खत्म नहीं होती।
01:35असल डर इसके बंद होने के बाद शुरू हुआ।
01:40गाव वाले कहते हैं, हर राद ग्यारक कर चालीस पर इस ट्रैक से दूर से आती हुई ट्रेन की आवाज
01:46सुनाई देती हैं।
02:10असले बस हवा में गूंचती पुरानी आवाजे हैं। पर फिर पिछले साल एक घटना हुई जिसने पूरी कहानी बदल दी।
02:18राघव 27 साल का युवा सीतापूर का रहने वाला था। एंजीनियर था, रैशनल थिंकर, पैरनॉर्मल सब छोड़िये।
02:28वो इन बातों पर बिलकुल यकीन नहीं करता था। राघव छुटी में अपने गाव आया हुआ था।
02:35गाव में आते ही उसे लाइन नंबर 19 की बाते सुनाई देने लगी। मा ने एक रात राघव से कहा,
02:42रात सड़े 11 के बाद बाहर मत निकलना। लाइन 19 के पास तो बिलकुल भी नहीं।
02:49राघव हस पड़ा, मा, ट्रैक बंध है, ट्रेन की आवाज कैसे आएगी? मा का चहरा काला पड़ गया, ट्रेन नहीं
02:58आती बेटा, कुछ और आता है। राघव ये सुनकर और क्यूरियस हो गया।
03:03ट्रैक नंबर 19 के बीचों बीच एक मेटल प्लेट लगी हुई है, जिस पर मोटे अक्षरों में लिखा है।
03:1119 गाव वाले बताते हैं, जो भी उस प्लेट को हाथ लगाता है, उसे अगले 24 घंटे में एक सपना
03:18आता है, वो सपना उसकी खुद की लाज दिखाता है, किसी ने इसे मजाग समझा, किसी ने बेवज़का डर, पर
03:27प्लेट को छूने वाले आठ लोगों की मौध हो चुकी है
03:30अगले ही कुछ दिनों में, अपने ही सपने वाली एक्जाक जगे, एक्जाक तरीके से, इन आक्सिदेंस के बाद ग्रामीनों ने
03:39फैसला लिया, नंबर 19 प्लेट को छूना मना ही है, लेकिन राघव वो तो सच साबित करने चल पड़ा था,
03:47राघव और उसका दोस्त अंकित
03:50दोनों राच सड़े 11 में टॉर्च लेकर, लाइन नंबर 19 पर पहुँचे, जैसे ही घडियों में 11.45 हुए, पेडों
03:59की पत्तिया अजीब धंग से हिलने लगी, हुम्मिंग जैसी ट्रेन की दूर से आती हम सुनाई देने लगी, अंकित डरकर
04:07बोला, चलिए राघव, लोट
04:12पता रहा, मैं देखना चाहता हूँ, ये आवाज किसकी है, फिर एक लाइट दिखी, दूर धुन से आती हुई, ट्रेन
04:22की हेडलाइट जैसी, धीरे धीरे नजदीक, अंकित ने कहा, अरे सच में ट्रेन आ रही है, राघव गौर से देखने
04:31लगा, लेकिन उसे कुछ अजी�
04:34पत्रिया काम प्रही थीवा में, धातू की बर्निंग स्मेल थी आवाज बिलकुल ट्रेन जैसी, लेकिन ट्रैक वाइब्रेशन्स उल्टी दिशा में
04:43जा रही थी, अचानक एक डेफनिंग हूंक, दोनों डर कर पीछे हटे, लाइट सीधा उन पर पड़ी, और फिर गायब,
04:53एक जटके में, पूरी आवाज, पूरा कमपन, पूरा लाइट बीम, सब हवा, जैसे कुछ था ही नहीं, अंकित भाग गया,
05:05राघव वही खड़ा रहा, confused, panicked, trembling, उसने धीरे धीरे नोटिस किया,
05:11मेटल प्लेट नो उननीस, हलकी गर्म थी, राघव ने क्यूरियोसिटी में फिंगर से बस हलकासा टच कर दिया, बस, उसी
05:22पल से सब खत्म होना शुरू हुआ, घर पहुँचकर, राघव देर रात अंजानी बेचैनी से जूचता रहा, सिर्भारी था, कानों
05:32में ट्रेंग क
05:32आवाज फिर से गुंजने लगी थी, रात के दो बचकर तिर मिनट पर वो अचानक जागा, पुरी बोडी पसीने से
05:40भीगी हुई, उसे याद आया, एक भयानक सपना, सपने में उसने खुद को रेलवेट ट्रैक पर देखा था, ठीक नंबर
05:4919 प्लेट के पास, धुंद में क
06:01अपनी ही तूटी हुई लाज देखी थी, ठीक वहीं, जहां अभी वो खड़ा था, जब वो जागा, उसके हाथों पर
06:11लोहे की जंग के निशान थे, अगली सुबर राघव गाव के बुजूर्ग दादा ठाकुर के पास गया, दादा, ये सब
06:20क्या है, ट्रेन की आवाज ब
06:311978 में चली थी, लेकिन उस राद ट्रेन पटरी से उत्री नहीं, पटरी गायब हो गई थी, राघव चौंग गया,
06:40गायब, दादा बोले, हाँ, जब दुरगट ना हुई, रेस्क्यू टीम पहुची, तो पाया की एंजिन और बोगीज हवा में समा
06:50गए, जैसे कोई अद्रि
06:54पूरी ट्रेन खींच ली गई, इसके बाद 23 लोग मारे गए, उनकी बोडिस कभी रिकवर नहीं हुई, और तब से
07:02उसी रात, उसी समय, उसी ट्रेन की आवाज अब भी लोटती है, पर वो ट्रेन नहीं है बेटा, उनकी आत्मा
07:10है, खोई हुई, अधूरी, घुटती हुई,
07:14अपने लास जर्नी को बार-बार दोहराती हुई, राघव की रीड में ठंड उतर गई, राघव ने दादा को पूरा
07:22सच बताया, कि उसने प्लेट को छुआ था, दादा का चेहरा सफेद पढ़ गया, उन्होंने कहा, तुमने गलती कर दी
07:31है बेटा, बहुत बड़ी गलती,
07:33क्योंकि प्लेट पर वो नंबर नहीं, बलकी एक सील है, जो उस कर्स जर्नी को कैद रखती है, जिसने भी
07:41उस सील को छुआ, वो उस जर्नी का हिस्सा बन जाता है, उसकी आखरी यात्रा, उसे भी रिपीट करनी पड़ती
07:49है, राघव अकेला लाइन 19 के पास खड़ा है, हवा
08:03धुन्द जमा होने लगी, ट्रैक कापने लगा, पट्रियों के नीचे वाइब्रेशन, धीरे धीरे तेज, और तेज, ठीक उसी जगे जहां
08:14उसने सपना देखा था, वही अब लौट आया था, अचानक, वही येलो हेडलाइट धुन्द को चीरते हुए दिखी, अंकित, मा
08:25गाव वाले दूर से चिल्लाए, राघव, हट जा वहा से, लेकिन राघव की टांगे जम गई थी, जैसे कोई उसे
08:34पकड़ कर खड़ा कर रहा हो, लाइट पास, और पास, कम से कम 20 फीट दूर, फिर 10 फीट, फिर
08:445 फीट, एक अद्रिश्य, इंजनेक, गायब डिबाइक, अ
08:50एक ही जगे से निकला, और राघव हवा में उचल गया, जैसे किसी स्पीडिंग ट्रेन ने उसे टककर मारी हो,
08:57सारे गाव वाले ने देखा, कोई ट्रेन नहीं थी, पर राघव का शरीर 15 फीट, दूर जाडियों में गिरा था,
09:07ठीक वही, जैसा उसने सपने में देखा था,
09:11राघव ने मरने से 5 मिनट पहले अपने फोन में एक वोईस नोट रिकॉर्ड किया था, वोईस नोट में सिर्फ
09:18एक ही बात सुनाई देती है, ट्रेन नहीं है, ये ट्रेन नहीं है, ये लोग है, बहुत सारे लोग, मदद
09:27करो, और फिर एक चीख, एक तेज हवा की आवाज,
09:32और अंत में, एक बहुत पुराना, तूटता हुआ ट्रेन होन, रेलवे लाइन नंबर 19 आज भी वही है, जंग लगी,
09:42तूटी, अबैंडन्ट, लेकिन हर रात 11.40 पीम पर, वही आवाज लोटती है, गाव वाले आज भी उस रास्ते से
09:51दूर रहते हैं, नंबर 19 प्लेट के
09:53पास, लोग फूल और दिया रखते हैं, ताकि उनकी आखरी यात्रा पूरी हो सके, कई लोग कहते हैं, अगर आप
10:01शांत खड़े रहो, तो हवा में घंटी बजने जैसी आवाज आती है, जैसे कोई अकेला ट्रावलर, अब भी अपने कोच
10:10की तलाश कर रहा हो, हर ट्रैक पर
10:12ट्रेन नहीं चलती, कुछ ट्रैक्स, कहानी चलाते हैं, रेलवे लाइन नमबर 19 भी ऐसी ही एक कहानी है, जहाँ ट्रेन
10:21कभी नहीं आई, लेकिन जो कुछ आया, वो आज भी वही है, अगर आपको कभी देर राट्राय के पास से
10:29गुजरते हुए दूर एक होन सुनाई दे, �
10:31तो एक बात याद रखिये, हर आवाज, किसी ट्रेन की नहीं होती, कभी कभी वो उन लोगों की होती है,
10:39जो अपनी मन्जिल तक कभी पहुचे ही नहीं,
Comments

Recommended