00:00उन्होंने देखा कि राजकुमार आदित्य एक पेड के नीचे वीना बजा रहे थे
00:05पेड पर तारे जैसे फल लगे थे और नीचे वही कमल का चिन था
00:10कुछ देर की कोशिश के बाद उन्होंने संदू खोला
00:14उसके अंदर एक रेशम में लिप्टा हुआ प्राचीन स्क्रॉल
00:18सूर्य के आकार का एक लॉकेट और एक छोटी सोने की चाबी थी
00:23स्क्रॉल ने एक चौंकाने वाली सच्चाई उजागर की
00:27राजकुमार आदित्य को दुश्मन राज्य के हत्यारों से बचाने के लिए छिपा दिया गया था
00:33उनके वफादा रक्षक केशव ने उन्हें एक दूरस्त आश्रम में भेज दिया
00:38जहां उन्हें गुमनाम रूप से पाला गया
00:41लॉकेट पर शाही चिन बना था
00:43जो उनकी पहचान साबित करता था
00:46सच्चाई जानने के लिए अर्जुन और देविका ने कमला और पंडित विश्वनाद से सलाह ली
00:52कमला की आखों में आसु आ गये जब उन्होंने लॉकेट देखा
00:57ये ये राजकुमार का है मैंने इसे बच्पन में देखा था
01:02पंडित जी ने खुलासा किया
01:04स्क्रॉल में जिस आश्रम का जिक्र है वो चित्रकूट की पहाडियों के जंगलों में है
01:09अगर आदित्य जिन्दा थे तो उनके वन्शज आज भी वहां हो सकते हैं
01:15अर्जुन और देविका ने आश्रम का रास्ता पकड़ा
01:18वहां के दुर्गम मारगों और घने जंगलों को पार करने के बाद
01:22उनकी मुलाकात प्रमुक साधु स्वामी हरी नारायन से हुई
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