00:01सिर्फ एक बार खुलते हैं।
00:03रात के ग्यारा बज कर पैंतालिस मिनिट बजे वे हवेली की तरफ निकले।
00:09जंगल की पग्रंडी अंधेरे में गुम हो गई थी।
00:13चारों तरफ गहरा सन्नाटा था।
00:16तभी दूर से एक धीमी तूटी-फूटी लोरी की आवाज आई।
00:22एक औरत गा रही थी।
00:26अनन्या धीमे स्वर में कहते हैं।
00:29कोई हमें बुला रहा है।
00:33कदमों की आहट बढ़ने लगी।
00:36ऐसा लगा जैसे कोई उनके ठीक पीछे चल रहा हो।
00:41विक्रम कहते हैं।
00:43हम पांच हैं।
00:46फिर ये चटी आहट किसकी है।
00:49हवेली के तूटे हुए दर्वाजे को धक्का लिया।
00:52तो वो खुद बखुद खुल गया।
00:55अंदर गुसते ही दर्वाजा जोर से बंध हो गया।
00:59हवा में एक गंध थी, सड़ी हुई लाश की।
01:03मीरा कहते है, मुझे लग रहा है।
01:07जैसे ये दीवारे हमें देख रही है।
01:11फश पर चलते ही अजिब सी सरसराहट होई।
01:15ऐसा लगा जैसे फश जिन्दा हो।
01:18और धीरे धीरे, हवेली के कौनों से कानों में फुस-फुसाहट गुंजने लगी।
01:25कबीर को एक पुराना आइना में लगाए।
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