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Truth Without Apology
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यह वीडियो 11 जनवरी को दोपहर 1 बजे भुवनेश्वर, राजा-रानी मंदिर में हुई बातचीत से लिया गया है,
विषय: भारत ने सबसे बड़ी भूल कहाँ की?

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Transcript
00:00चल्दी मेरे एक सवाल मुझे कौन रहा था
00:02बदादी के तहा ठीक है
00:04यह इतना थाकतवर फिलोसोफी के साथ जी रहते
00:07तो बाहरी सप्रेशन इन पर कामियाद कैसे हो
00:11तुम वहाँ देख रहे हो
00:12वो इस्तरी है
00:14और उसका जो धाड़ है
00:18वो मचली का है
00:22जिसको पश्चे में मरमेड बोलते है
00:25मनुष्य और पशु एक ही है
00:29और मनुष्य तुम बस अपने सर की वज़े से हो
00:31उपर से मनुष्य है और मीचे से मचली है
00:34और इस बात को हमने अपने मंदिरों में जा करके इंगित कर दिया
00:38तुम समझ नहीं रहे हो
00:50ठीक उस समय जिस समय इसका निर्मान हो रहा था, ठीक उस समय बाकी सोसाइटी बिलकुल हो सकता है कि
00:56पिछडी हुई हो, मैं बस एक दोश देता हूँ उन लोगों को, जिनने दर्शन की समझ थी, जो जिन्दगी जानते
01:02थे, कि उन्होंने और जान लगा करके प्रचार क्यों न
01:17पाया उसने, छोटा सा एक क्रॉस सेक्षिन होता सोसाइटी का, वो अपने ग्यान को उचाई देता रहता था, एसेंशन देता
01:24रहता था, कि ग्यान आकाश दक पहुँच जाए, वर्टिकल एसेंशन तो हो रहा था, होरिज़ॉंटल एक्सपैंश्ण नहीं हो रहा था,
01:30होरि
01:34महारत में एक तो वर्ण वेवस्था दूसरे खेतेहर लोग तो उनको बहुत ज्यादा ग्यान की कोई जरूद भी नहीं महसूस
01:42होती थी तीसरा जो जो संचार के और
01:46कम्यूनिकेशन के पूरे साधन थे वो सीमित थे तो यह जो वर्टिकल नॉलेज होता था यह कभी एक होरिजॉंटल मुव्मेंट
01:57नहीं बन पाया तो नतीजा क्या हुआ कि एक प्रतिशत तो समाज में महाग्यानी हो गए अब आकी 99 प्रतिशत
02:03वो साधारनी रह गए जब साध
02:08और जब विदेशी हमले हुए तो उसमें हार भी जहली क्योंकि ग्यानी थोड़ी जाएगा लड़ने ग्यान का होना काफी नहीं
02:15है ग्यान का फैलाव भी जरूरी है आप बहुत जान लो पर गर उसको फैलाओगे नहीं तो बात बनेगी नहीं
02:22इसलिए हम कहते हैं पाओ और �
02:23नहीं तो ग्यान रह जाता है और समाज गिर जाता है
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