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Saudi Arabia और India की Eid की तारीखों में क्यों होता है अंतर? जानिए इसके पीछे का वो वैज्ञानिक और भौगोलिक सच जो शायद आप नहीं जानते। क्या केवल चांद की चाल ही इसके पीछे की वजह है या कुछ और?

This video explains the scientific and geographical reasons behind the difference in Eid-ul-Fitr dates between Saudi Arabia and India. It explores how the moon's visibility, Earth's rotation, and local religious traditions play a crucial role in deciding the festival date.

#Eid2026 #SaudiArabia #India #OneindiaHindi #MoonSighting

~HT.410~PR.250~ED.520~GR.510~

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Transcript
00:09रमजान का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाओं पर है और दुनिया भर के मुस्लिम समुधाय में ईदुल फित्र के
00:15तैयारियां जोरों पर है
00:17इस वर्ष साओधी अरब, इराक और यमेन जैसे देशों ने आधिकारिक रूप से घोशना की है कि वहाँ 20 मार्च
00:25को ईद मनाई जाएगी
00:26ये निर्णे शव्वाल का चांद समय पर न दिखने के कारण लिया गया जिससे रमजान के 30 रोजे पूरे हुए
00:33साओधी अरब में शुकरवार को ईद का जश्न मनाया जा रहा है
00:36वहीं भारत में स्थानिय चांद की उपलब्धता के आधार पर शनिवार को ईद मनाई जाएगी
00:42भारत और साओधी अरब के बीच ईद की तारीखों में अकसर ये एक दिन का अंतर बना रहता है
00:47साओधी अरब और भारत के बीच ईद मनाने की समय में अंतर होने के पीछे
00:52वैज्यानिक, भावगोलिक और धार्मिक कारण गहराई से जड़े हुए हैं
00:56सबसे प्रमुक कारण भावगोलिक स्थिती और प्रित्वी की अपनी धोरी पर घूमने की गती है
01:00साओधी अरब भागोलिक रूप से भारत के पश्चिम में स्थित है
01:05खगोलिय नियमों के अनुसार जब नया चान निकलता है तो वो पश्चिम की ओर से आगे बढ़ते हुए दिखाई देता
01:10है
01:10पश्चिम में स्थित देशों में सूर्यास्त भारत के तुलिनामे बाद में होता है
01:15जिससे वहाँ नया चान दिखने की संभावना और समय अधिक अनुकूल होता है
01:20भारत में जब सूरज ढलता है तब तक चांद की स्थिती इतनी स्पष्ट नहीं हो पाती कि उसे नंगी आखों
01:25से देखा जा सके
01:26जबकि साउधी अरब तक पहुंचते पहुंचते समय के अंतराल और स्थिती की वजह से वो स्पष्ट दिखने लगता है
01:32यही वजह है कि खगोली गड़ना के अनुसार साउधी अरब में अकसर भारत से एक दिन पहले ही चांद का
01:39दीदार हो जाता है
01:40इसके अतरिक्त एक महत्वपूर्ण पहलू धार्मिक केंद्र का भी है
01:43साउधी अरब में इसलाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना स्थित हैं
01:48दुनिया भर के मुसल्मान इन पवित्र शेहरों की ओर अपना रुख करते हैं
01:53धार्मिक महत्व के कारण साउधी अरब द्वारा किये गए चांद के दीदार के ऐलान को
01:57कई खाड़ी देश और पश्चिमी देशों में रहने वाले मुसलिम समुदाय अंतिम मानते हैं
02:02और उसी के अनुसार अपना त्योहार मनाते हैं
02:05साउधी अरब में चांद देखने के लिए एक बहुत ही विवस्थित और आधिकारिक तंतर काम करता है
02:10वहां की सरकार ने इसके लिए विशेश कमेटियां बनाई हैं
02:13जो आधनिक दुरबीनों और गवाहों के बयानों के आधार पर चांद देखने की पुष्टी करती हैं
02:19वहां नंगी आखों से चांद देखने की गवाही को सर्वोच प्राथमिकता दी जाती है
02:23और जब कई विश्वसनिय गवाह इसकी पुष्टी कर देते हैं तभी आधिकारिक घुष्टना की जाती है
02:29इसी प्रक्रिया को ईराग और यमन जैसे पडोसी देश भी अपनाते हैं और साओधी के साथ ही ईद मनाते हैं
02:36दूसरी ओर भारत में रुवत ए हिलाल यानि स्थानिय स्तर पर चांद देखने की परंपरा का कड़ाई से पालन किया
02:42जाता है
02:42भारत में उलेमा और धार्मिक विद्वान इस बात पर जोर देते हैं कि ईद तभी मनाई जाएगी जब स्थानिय स्तर
02:49पर अपनी देश के आस्मान में चांद दिखाई दे
02:52चोंकि चांद का दिखना बादलों की स्थिती और वायू मंडल की शुद्धी पर भी निर्भर करता है
02:57इसलिए कभी-कभी खगोलिय रूप से चांद होने के बावजूद वो दिखाई नहीं देता
03:02भारत में विभिन शहरों की हिलाल कमीटियां आपस में संपर्क करती है
03:06और जब देश के किसी भी हिस्से में चांद दिखने की ठोस पुष्टी हो जाती है तब ही ईद का
03:11ऐलान होता है
03:12भारत और साउधी अरप के बीच समय का अंतर लगभग साड़े तीन घंटे का है
03:17जो की भले ही कम लगे लेकिन चांद की चाल के मामले में ये अंतर बहुत महत्वपूर हो जाता है
03:22इसी भागोलिक दूरी और समय के चक्र की वजह से दोनों देशों के बीच त्योहार मनाने में एक दिन का
03:29फासला आ जाता है
03:30जिसे दुनिया भर में एक सामानने खगोलिये और धार्मिक प्रक्रिया के रूप में स्विकार किया जाता है
03:35यही कारण है कि साओधी अरब में एध हमेशा एक दिन पहले ही मनाई जाती है
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