00:09रमजान का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाओं पर है और दुनिया भर के मुस्लिम समुधाय में ईदुल फित्र के
00:15तैयारियां जोरों पर है
00:17इस वर्ष साओधी अरब, इराक और यमेन जैसे देशों ने आधिकारिक रूप से घोशना की है कि वहाँ 20 मार्च
00:25को ईद मनाई जाएगी
00:26ये निर्णे शव्वाल का चांद समय पर न दिखने के कारण लिया गया जिससे रमजान के 30 रोजे पूरे हुए
00:33साओधी अरब में शुकरवार को ईद का जश्न मनाया जा रहा है
00:36वहीं भारत में स्थानिय चांद की उपलब्धता के आधार पर शनिवार को ईद मनाई जाएगी
00:42भारत और साओधी अरब के बीच ईद की तारीखों में अकसर ये एक दिन का अंतर बना रहता है
00:47साओधी अरब और भारत के बीच ईद मनाने की समय में अंतर होने के पीछे
00:52वैज्यानिक, भावगोलिक और धार्मिक कारण गहराई से जड़े हुए हैं
00:56सबसे प्रमुक कारण भावगोलिक स्थिती और प्रित्वी की अपनी धोरी पर घूमने की गती है
01:00साओधी अरब भागोलिक रूप से भारत के पश्चिम में स्थित है
01:05खगोलिय नियमों के अनुसार जब नया चान निकलता है तो वो पश्चिम की ओर से आगे बढ़ते हुए दिखाई देता
01:10है
01:10पश्चिम में स्थित देशों में सूर्यास्त भारत के तुलिनामे बाद में होता है
01:15जिससे वहाँ नया चान दिखने की संभावना और समय अधिक अनुकूल होता है
01:20भारत में जब सूरज ढलता है तब तक चांद की स्थिती इतनी स्पष्ट नहीं हो पाती कि उसे नंगी आखों
01:25से देखा जा सके
01:26जबकि साउधी अरब तक पहुंचते पहुंचते समय के अंतराल और स्थिती की वजह से वो स्पष्ट दिखने लगता है
01:32यही वजह है कि खगोली गड़ना के अनुसार साउधी अरब में अकसर भारत से एक दिन पहले ही चांद का
01:39दीदार हो जाता है
01:40इसके अतरिक्त एक महत्वपूर्ण पहलू धार्मिक केंद्र का भी है
01:43साउधी अरब में इसलाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना स्थित हैं
01:48दुनिया भर के मुसल्मान इन पवित्र शेहरों की ओर अपना रुख करते हैं
01:53धार्मिक महत्व के कारण साउधी अरब द्वारा किये गए चांद के दीदार के ऐलान को
01:57कई खाड़ी देश और पश्चिमी देशों में रहने वाले मुसलिम समुदाय अंतिम मानते हैं
02:02और उसी के अनुसार अपना त्योहार मनाते हैं
02:05साउधी अरब में चांद देखने के लिए एक बहुत ही विवस्थित और आधिकारिक तंतर काम करता है
02:10वहां की सरकार ने इसके लिए विशेश कमेटियां बनाई हैं
02:13जो आधनिक दुरबीनों और गवाहों के बयानों के आधार पर चांद देखने की पुष्टी करती हैं
02:19वहां नंगी आखों से चांद देखने की गवाही को सर्वोच प्राथमिकता दी जाती है
02:23और जब कई विश्वसनिय गवाह इसकी पुष्टी कर देते हैं तभी आधिकारिक घुष्टना की जाती है
02:29इसी प्रक्रिया को ईराग और यमन जैसे पडोसी देश भी अपनाते हैं और साओधी के साथ ही ईद मनाते हैं
02:36दूसरी ओर भारत में रुवत ए हिलाल यानि स्थानिय स्तर पर चांद देखने की परंपरा का कड़ाई से पालन किया
02:42जाता है
02:42भारत में उलेमा और धार्मिक विद्वान इस बात पर जोर देते हैं कि ईद तभी मनाई जाएगी जब स्थानिय स्तर
02:49पर अपनी देश के आस्मान में चांद दिखाई दे
02:52चोंकि चांद का दिखना बादलों की स्थिती और वायू मंडल की शुद्धी पर भी निर्भर करता है
02:57इसलिए कभी-कभी खगोलिय रूप से चांद होने के बावजूद वो दिखाई नहीं देता
03:02भारत में विभिन शहरों की हिलाल कमीटियां आपस में संपर्क करती है
03:06और जब देश के किसी भी हिस्से में चांद दिखने की ठोस पुष्टी हो जाती है तब ही ईद का
03:11ऐलान होता है
03:12भारत और साउधी अरप के बीच समय का अंतर लगभग साड़े तीन घंटे का है
03:17जो की भले ही कम लगे लेकिन चांद की चाल के मामले में ये अंतर बहुत महत्वपूर हो जाता है
03:22इसी भागोलिक दूरी और समय के चक्र की वजह से दोनों देशों के बीच त्योहार मनाने में एक दिन का
03:29फासला आ जाता है
03:30जिसे दुनिया भर में एक सामानने खगोलिये और धार्मिक प्रक्रिया के रूप में स्विकार किया जाता है
03:35यही कारण है कि साओधी अरब में एध हमेशा एक दिन पहले ही मनाई जाती है
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