00:00भक्ति की वो भारिश नीले आसमान के नीचे एक मोर अपने पंख फिलाए उड़ रहा था जैसे उसके हर पंख
00:09में शर्दा बस गी हो
00:10उसी समय एक शोटा सा पोर्तली भी आसमान से उर्ती हुई मंदिर के और बढ़ रही थी जैसे खुद प्रकृती
00:18भी किसी चमतकार की त्यारी कर रही हो
00:20मंदिर के बीचो बीच बिराज मान थे बगवान मुरुगन शान्त दिब्य और तेजस्वी उनके सामने मोर और मुरुगा दोनों एक
00:30साथ खड़े थे दोनों अलग थे लेकिन भगती एक थी
00:34अचानक आसमान से फूलों की बारिश शुरू होगी
00:37हर एक फूल जैसे कह रहो जहां सची शर्दा होती है बहां खुद स्वर्ग भी जुक जाता है
00:45मोर ने अपने पंक फिलाए मुर्गे ने सिर्द जुकार दिया और उस पल में पूरा बाताबन भगती में दूख गया
00:52यह कहानी हमें सिखाती है कि भक्ती में भड़ा जा सोटा कुछ नहीं होता अगर दिल सच्चा हो तो बगवान
01:01तक पहुँचने के लिए सिर्फ एक भावना ही काफी होती है
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