00:05चैत्र नवरात्री 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा।
00:30साथ बचकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त जो लोग सुभा स्थापना नहीं कर पाएंगे वे दुपहर में अभिजीत महूर्थ
00:37के दौरान 12 बचकर 5 मिनट से 12 बचकर 33 मिनट के बीच कलश स्थापना कर सकती है।
01:00की पूजा होती है जिन्हें हिमालय की पुत्री माना जाता है।
01:03पूजा के समय मा को सफेद या पीले पुष्प अर्पित करना और दूद से बनी मिठाईयों का भूग लगाना अत्यंत
01:10शुभ माना जाता है।
01:12गट स्थापना के लिए घर की उत्तर पूर्व दिशा यानि इशान कोण को सबसे श्रेष्ट स्थान माना गया है।
01:18कलश स्थापित करते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि कलश कभी भी सीधे जमीन पर ना रखा जाए।
01:25इसके नीचे अक्षत या अनाज की एक धेरी जरूर होनी चाहिए।
01:29कलश को हमेशा माता की प्रतिमा के बाईं तरफ और भक्त के दाईं तरफ स्थापित करना चाहिए।
01:35यदि आप अखंड जोती जलाने वाले हैं तो उसे कलश के पास ही स्थापित करना चाहिए।
01:40कलश स्थापना की विधी में एक तामबे या मिट्टी के पात्र पर मौली बांध कर उस पर स्वास्तिक का चिन्ड
01:47बनाना चाहिए और उसमें गंगाजल, सिक्का, सुपारी तथा हल्दी की गांठ डाल कर उपर से आम के पत्तों और नारियल
01:54से सुसजित करना चाहिए।
01:56नवरातरी के दौरान शुद्धता और सात्विक्ता का विशेश महत्व बताया गया है।
02:26मा चंद्र घंटा, मा कूश्मांडा, मा सकंद माता, मा कात्याईनी, मा कालरातरी, मा महागौरी और मा सिध्धिदातरी की शुद्धा पूर्वक
02:36पूजा की जाती है।
02:41चोंकि इस बार नवरातरी गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए पहले दिन चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र या
02:48केसर का दान करना, ब्रिहस्पती देव और मातारानी की कृपा प्राप्त करने का उत्तम्मार्ग है।
02:54भक्त अपनी सामर्थ के अनुसार वस्त्र, फल, सुहाग सामगरी या खाद्यान का दान कर सकते हैं।
03:25मानसिक और शाररिक शुद्धी के बाद ही कलश को स्पर्श करें।
03:54घर में पूर्ण तह सात्विक वातावरन बनाए रखना चाहिए और मन में किसी के प्रती द्वेश या छल नहीं रखना
04:00चाहिए, क्यूंकि ईश्वर को निर्मल मन ही प्रिया होता है।
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