00:15ये एक ऐसी सल्तनत थी जहां सुभा की रोशनी भी किसी पुराने राज को छुपा कर उतरती थी
00:22सालों बाद महल में खुशी की रौनक लोट आई बादशा और मलका के चहरों पर मसकान थी उनकी नन्नी बेटी
00:29ने हर कमरा महबत से भर दिया
00:31मलका अपनी बेटी की पैदाईश से बहुत खुश थी लेकिन दिल में एक बात थी जो वो किसी से कह
00:38नहीं पा रही थी
00:39मलका की परेशानी ये थी कि वो जादूगर्णी के पास गई थी क्यूंके वो हामला नहीं हो सकती थी
00:44जादूगर्णी ने कहा था कि उसकी एक बेटी होगी और सोलवे सालगिरह पर वो अपना हक लेने आएगी
00:50मलका दिल ही दिल में डर रही थी कि अगर ये बात सच हो गई और वो जादूगर्णी वाकई आ
00:57गई तो क्या होगा
01:03दिन गुजरते गए और प्रिंसिस आरीशा हर दिन ज्यादा खुबसूरत और निकھरती गई
01:10देखते ही देखते वक्त आ गया आरेशा सोला साल की होने वाली थी
01:14महल में उसकी सालगिरह की तैयारियां शुरू हो चुकी थी
01:18खुबसूरती तो उसकी पहचान थी
01:20मगर उसका दिल उससे भी ज्यादा साफ और नरम था
01:26पूरा महल खुशियों से जूम रहा था
01:30और शेहजादी अपने सालगिरह के केक को काटने लगी थी
01:34पूरा महल खुशियों से जूम रहा था
01:36लेकिन अचानक सयाह धुआ चा गया
01:39और एक खौफनाव जादू गर्नी नमोदार हुई
01:42मलका तुम भूल गई थी अपनी शर्ट के मताबिक
01:46अब वक्त आ गया है के मैं अपना हक वसूल करूँ
01:50मुझे माफ कर दो तुम जो मर्जी लो
01:53हीरे मौती सोना चांदी
01:55मगर हमारी बेटी और हमसे दूर रहा
01:58मुझे ये सब कुछ नहीं चाहिए
01:59मुझे तुम्हारी बेटी चाहिए सोला साल के बाद
02:02अब वो मेरे साथ जाएगी
02:05ये नहीं हो सकता
02:06हम तुम्हें अपनी बेटी नहीं दे सकते
02:12मैं तुम्हारी बेटी पर काला जादू करती हूँ
02:17तुम्हारी बेटी कभी सूरज की रोशनी नहीं देख पाएगी
02:29बादशा और मलका ने सूचा शायद ऐसा कुछ ना हो
02:33ये सब जादू गर्नी बस डराने के लिए कह गई है
02:36अगले दिन जब शहजादी बाग में सेर के लिए निकली
02:40जैसे ही सूरज की रोशनी उस पर पड़ी
02:43आसमान ने जैसे अपना रंग बदल लिया
02:46और फज़त तौफान में बदल गई तौफान इतना ज्यादा था
02:50कि शहजादी के लिए महल वापत आना मुश्किल हो गया
02:56अगले दिन जब शहजादी दुबारा बाहर निकली
02:59तो इस बार तौफान पहले से कहीं ज्यादा शदीद था
03:02तेज बारिश के साथ असमान से आग के शौले भी बरसने लगे
03:07जैसे कुदरत खुद किसी अंधीरी ताकत के जेरे असर आ चुकी हो
03:12अब रोज का मामूल शहजादी के लिए बदल गया था
03:15बाहर जाना मुश्किल हो गया
03:17और तौफान ने खुद उसे महल तक महदूद कर दिया था
03:28महल के अंदर भी शहजादी के लिए सब मुश्किल हो गया
03:31वो जैसे ही हौल में भी आती सूरज की रोशनी पढ़ती और मौसम तौफान में बदल जाता
03:36बादशा और मलका शहजादी के लिए परेशान थे
03:47पहलने लगी हर जबान पर शहजादी और आने वाले तौफान की बात थी
03:52ये बात महल तक पहुँच चुकी थी लोग शहजादी को खत्रा समझने लगे थे
03:57तौफानों की वज़ह से जानो माल का नुकसान वो रहा था
04:00बात्शा परेशान था उस पर दबाव था कि शहजादी को यहां से दूर भेजा जाए
04:05वरना लोगों का एहतिजाज खत्म नहीं होगा
04:08सल्तनत की बका के लिए बात्शा ने फैकला किया कि शहजादी को दूर एक ऐसे किले में मुंतकिल कर दिया
04:14जाए
04:14जहां रोशनी कभी नहीं पहुँचती
04:16रात की खामूशी में शहजादी को शाही भगी में बिठा कर ले जाया गया
04:20यह फैसला महबत का नहीं बलके सल्तनत की मजबूरी था
04:24बात्शा और मलका गम में डूबे हुए थे
04:26मलका के आंसु उनकी बेबसी को जाहिस कर रहे थे
04:29शहजादी को दूर भेजना उनके लिए आसन नहीं था
04:32शहजादी को तारीक और बंद किले तक ले जाया गया
04:35जहां रोशनी कभी नहीं पहुँचते थी
04:38और ये उसके लिए तनहाई का आगास था
04:40शहजादी के दिल में गम था
04:42महल से दूर होने की वजह से
04:45वो खुद को बहुत तनहा महसूस कर रही थी
04:48वक्त गुजरता गया
04:50और शहजादी खुद को इस तनहाई का आदी बना चुकी थी
04:57शहजादी बिस्तर पर बैठी थी
04:58कि अचानक उसे बाहर से किसी जानवर की दर्द भरी आवास सुनाई दी
05:04ये आवास कहां से आ रही है
05:06और कौन है जो दर्द में है
05:12रात की तारीकी में शहजादी बाहर निकली
05:15ताकि देख सके कि रोने की आवास कहां से आ रही है
05:20चलते चलते शहजादी की नजर एक हिरन पर पड़ी, जो देखने में तो बिलकुल ठीक था, मगर कहीं से भी
05:27हरकत नहीं कर रहा था
05:28शहजादी ने जब हिरन को देखा तो वो रो रहा था, बजाहर उस पर कोई जखम नहीं था, मगर वो
05:34शदीद दर्द और तकलीफ में मुब्तला था
05:36करीब जाकर शहजादी ने देखा कि उसके जिसम में एक सुनहरी पिन घुसी हुई थी
05:43शहजादी करीब गई और नर्मी से उसके जिसम से सुनहरी पिन निकाल दी
05:51पन निकलते ही हैरन एक बूड़ी औरत में तबदील हो गया
06:00शुक्रिया बेटी, तुमने मुझे इस जादू से आजाद किया
06:08आपको जानवर किसने बनाया?
06:12मेरी सुतीली बेहन ने मुझे हीरन में बदल दिया
06:17वो एक शैतानी जादूगर्णी है
06:20बेटी, तुम वेरान जगह में क्यों हो?
06:25तुम्हारा घर कहां है?
06:29शहजादी ने उसे सब कुछ बता दिया
06:31कि किस तरह एक जादूगर्णी ने उस पर जादू किया
06:33और कैसे वो मजबूरी में उस वेरान जगह तक आ पहुँची?
06:37बूरी औरत ने शहजादी को बताया
06:39कि उस पर जादू करने वाली कोई और नहीं
06:41बलकि उसकी सुतीली बेहन ही है
06:44ये कहकर बूरी औरत ने अपनी जेब में हाथ डाला
06:48और एक चमकती हुई सुनहरी छट्री निकाल ली
06:52देखते ही देखते वो छट्री छोटी से बड़ी हो गई
06:56और अब शहजादी के लिए तयार थी
06:59बूरी औरत ने वो छट्री शहजादी को दे दी
07:03और बताया कि ये कोई आम छट्री नहीं
07:06बलकि जादू ही है
07:07बूरी औरत ने बताया कि ये छट्री अब शहजादी को बाहर जाने देगी
07:12और जो तौफान काली जादू की वज़ा से आते थे
07:17वो अब नहीं आएंगे
07:21बेटी मैं वो जादू नहीं तोड़ सकती
07:24मगर तुम्हारी मदद कर सकती हूँ
07:26शमाल की तरफ एक मरी हुई रूहों की नदी है
07:31तुम्हें वहां जाना होगा
07:34वहां वो रूहें तुमसे तीन सवाल करेंगी
07:37अगर तुम सही जवाब दोगी
07:39तो तुम्हें वो नदी पार करने देंगी
07:42और तुम उस जादवी तालाब तक पहुंक जाओगी
07:45जिसका पानी पीने से वो जादू खतम हो सकता है
07:49ये रास्ता आसान नहीं है
07:52मगर ये छटरी तुम्हारी उसमें मदद करेगी
07:57ये कहकर वो गूड़ी और गायब हो गई
08:01और अब वहां शहजादी तनहा खड़ी थी
08:05दिन चड़ते ही शहजादी ने अपना सफर शुरू किया
08:10और वो कभी जंगल से गुजरी
08:13कभी वो तपते सहराओं से गुजरी
08:16जहां गरम हवा और भूक प्यास थी
08:19मगर किसी ने उसका हौसला कम ना किया
08:21शहजादी नहीं जानती थी के इस सब का अंजाम क्या होगा
08:24मगर जादूई च्छत्री ने उसे एक उमीद दी
08:27जो उसे आगे बढ़ने की हिम्मत दे रही थी
08:30कई दिनों के तवील सफर के बाद
08:32शहजादी एक ऐसी वेरान जगा पहुँच गई
08:35जहां कोई इनसान नहीं पहुँच सकता था
08:37आखिरकार शहजादी की नजर उस नदी पर पड़ी
08:40जिसमें मरी हुई रूहें तैर रही थी
08:43जिसका जिकर बूरी औरत ने किया था
08:45मुर्दते रूहों की नदी से तीन रूहें बाहर आई
08:49और शहजादी के आगे खड़ी हो गई
08:54लड़की तुम्हारा यहां क्या काम है
08:57तुम क्यूं आई हो
09:00मैं जादूई तालाब के लिए आई हूँ
09:03मुझे वो पानी चाहिए
09:07जादूई पानी के लिए
09:09तुम्हें हमारे तीन सवालों के जवाब देने होंगे
09:13तुम सही जवाब दोगी तो नदी पार कर जाओगी
09:17और अगर गलत जवाब दोगी
09:20तो हमेशा के लिए इसी नदी में कैद हो जाओगी
09:25शहजादी ने जादूई पानी के लिए
09:27तीनों सवालों के जवाब देने की हामी भर ली
09:30शहजादी को अब अन्जाम का खौफ नहीं था
09:33वो क्या है जो सबसे छुपा रहता है
09:36फिर भी सब उसके पीछे दोडते हैं
09:41ये वक्त है जो सबसे छुपा रहता है
09:45मगर सब उसके पीछे भागते हैं
09:48बिल्कुल दुरुस्त
09:51यही वक्त है जिसके पीछे सब दोड़ते हैं
09:56वो कौन है जो खुद कभी नहीं बोलता
10:01फिर भी सब सुनते हैं
10:04वो आवाज है जो खुद कभी नहीं बोलती
10:08मगर सब उसे सुनते हैं
10:12वो क्या है जो हमेशा दूर नजर आता है
10:15दिल को रोशन करता है, मगर कभी हाथ नहीं लगाया जा सकता।
10:20शहजादी काफी देर सोचती रही कि उसका जवाब क्या हो, फिर उसकी नजर उसके हाथ में मौजूद जादवी छतरी पर
10:28पड़ी।
10:28ये उमीद है जो दिल को रोशन रखती है, मगर उसे हाथ नहीं लगाया जा सकता।
10:36शहजादी, तुमने साबित किया कि तुम्हारा दिल पाक है, तुमने सही जवाब दिये।
10:43शहजादी, याद रखना, बाग का कोई फल मत खाना, वरना तुम जानवर बन जाओगी।
10:51रूहों ने शहजादी को जाने की इजाज़त दे दी, और शहजादी नदी पार कर गई।
10:59उशहजादी एक जादवी बाग से गुजरी, और चलते चलते उसकी नजर एक जादवी तालाब पर पड़ी।
11:09शहजादी ने जादवी पानी पी लिया और उसका काला जादू तूट गया
11:15शहजादी की वापिस जाते हुए नजर उन जादूई फलों पर पड़ी जो रूहों ने जिकर किया था
11:23शहजादी ने कुछ जादूई फल तोड़े और अपने पास रख लिये
11:31शहजादी दिन रात का सफर करते हुए वापिस किलहा की तरफ आई ताके वो उस जगा पहुंच सके जहां उसे
11:38वो बूरी औरत मिली थी
11:39जब शहजादी किलहे पर पहुंची उसने अपनी मदद करने वाली बूरी औरत को आवाज दी
11:48शहजादी के पुकारते ही वो बूड़ी औरत उसके सामने जाहिर हो गए
11:55शहजादी ने बूड़ी औरत का शुक्रिया अदा किया
11:58कि अगर वो उसे रास्ता ना दिखाती तो वो पूरी जिंदगी इसी तरह कैद रहती
12:03शहजादी ने वो जादूई फल बूड़ी ओरत को दिया
12:08और खामोशी से उससे कुछ बातें की
12:11शहजादी ने जादूई छटरी बूड़ी ओरत को वापिस देना चाही
12:15मगर बूड़ी ओरत ने नर्मी से इनकार कर दिया
12:19और जब भी तुम मायूस होगी ये तुम्हें उमीद देगी
12:27ये कहकर वो बूरी औरत शहजादी के सामने गायब हो गई
12:32अब वो बूरी औरत उस जादूगर्णी के पास पहुँच गई
12:36जो दरसल उसकी सौतीली बेहन थी
12:42मैंने तो तुम्हें जानवर बना दिया था फिर तुम यहां कैसे आ गई
12:48मैं समझ गई हूँ मैं तुम्हारी तरह ताकतवर नहीं हो सकती
12:54अच्छा है तुम्हें पता चल गया मेरे हांगे तुम्हारी कोई आउकात नहीं
13:00हां और मैं अपनी वफादारी साबित करने के लिए तुम्हारे लिए एक तौफा लेकर आई हूँ
13:08यह एक जादवी फल है जिससे तुम्हारे काले जादू में इजाफा होगा
13:16जैसे ही जादूगर्णी ने फल खाया वो अचानक एक गदे में बदल गई
13:24शहजादी की दानिश्मंदी भरे मश्वरे से वो जादूगर्णी अपने अंजाम तक पहुँच गई
13:31वहां शहजादी अपने महल वापिस आई और उसने देखा कि उसके वालिदैन उसके बगएर बहुत उदास हैं
13:40बादशा और मलका ने शहजादी को देखते ही खुशी से गले लगा लिया
13:47शहजादी ने सब बताया किस तरह बूड़ी औरत की मदद से उस पर से जादू खतम हुआ और जादूगर्णी अपने
13:54अंजाम तक पहुँच गई
13:55पूरी सल्तनत में खुशी की लहर दोड़ गई जब शहजादी वापित पहुँची और जादू खतम होने की खुशी में हर
14:02तरफ जशन मनाया गया
14:03शहजादी ने सीखा कि कभी भी जिन्दगी में उमीद खतम नहीं होनी चाहिए वरना इंसान का होसला भी खतम हो
14:10जाता है
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