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यह वीडियो 16 जनवरी 2026 को पटना में हुए लाइव सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00गोवा में मुझे अपने खून की जाच करानी थी और मैं वहाँ शहर में नहीं दूर गाउं में रहता हूँ
00:07तो पेथालोजी को फोन किया बुला कि ब्लड कलेक्शन के लिए आप भेजिये किसी को तो नों ने भेजा
00:13महिला आई हुई है दूर दराज के एक गाउं में एक अंजान व्यक्ति के घर में महिला आई हुई है
00:19ब्लड कलेक्शन करने के लिए अगर यह हमारे उत्तर भारत में हो तो क्या होगा
00:23वो खून लेने जाएगी खून दे कर आजाएगी आप जाएए तमिल नाडू में दक्षन में कहीं पी जाएए
00:29वहां महिलाएं आपको आटो चलाती मिलेंगी पेट्रोल पंपे मिलेंगी यहां मुश्किल है न थोड़ा
00:34मुश्किल है न और वहां महिलाओं के चहरे पर एक साधगी रहती है और आत्मविश्वास रहता है
00:40क्योंकि वहां महिला अपेक्षाक्रत आजाद है तो उसके उपर यह दबाव नहीं रहता कि सजबज के फुरुष को रिजाना है
00:49उसके ऊपर ये आंतरिक दबाव नहीं रहता कि सुन्दर दिखो, सुन्दर दिखो, नहीं तो तुझे ब्याहेगा कौन
00:54वो खुद पढ़ी लिखिए, वो कहते हैं इतना खुद अपना कमा लोगी
00:57आप चले जाएए आप चन्रही की सड़कों पर आम महिला को देखिए
01:00साधारन दिखेगी बिलकुल, साधारन लेकिन सशक्त
01:08वो बस चला भी रही है, बस में कंड़क्टर भी है
01:10कितनी दुकाने जहां आप जाएं तो आल फीमेल स्काफ है
01:13सिर्फ महिलाएं महिलाएं वहाँ पर, वहीं पूरा काम कर रही है
01:17साधारन और आत्मविश्वास से भरी हुई
01:20क्योंकि अब वो महिलागी देह नहीं है
01:22वो मनुश्य की चेतना है
01:24तो उसमें एक सहज आत्मविश्वास है
01:26वो डरी हुई नहीं है
01:28क्यों?
01:29क्योंकि डर बुद्ध को कुंद कर देता है
01:32और जो पर निर्भर है
01:34वो डरा हुआ रहे गई
01:38और जब डर बुद्ध को कुंद कर देता है
01:41तो फिर पुरुश्वर्ग
01:44ये बात पहलाता है
01:45कि ये महिलाओं के तो बुद्धी नहीं होती
01:48लेकिन जब तो मुसको
01:49इतना डरा कर रखोगे
01:51तो उसकी सोचने समझने की क्षमता
01:53साफ हो जाती है
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