00:00जिन लोगों ने पशुवों को अपने मंदिरों में स्थान दे दिया, वो पशुवों के प्रतिक्रूर कैसे हो पाएंगे?
00:09वो सकते हैं?
00:12मंदिर पशुवों को सिस्मे संभान नहीं दे रहा है, कि वो हमारे दिवताओं की सवारी वा गधे हैं
00:19मंदिर कह रहा है पशुओं का स्वतंत्र अस्तित्व भी इतना महत तो रखता है कि उसको सम्मान दिया जाए देखो
00:27सब पशु पशु पशु पशु पशु कितने पशु मौजूद है और कितनी विचितर बात है गे आज भी कुछ मंदिरों
00:36में पशु बली होती है
00:39कैसे हो सकता है यह निश्चित रूप से यह यह काम भारतिय दर्शन का तो नहीं है यह या तो
00:47अज्ञान का है या फिर किनी बाहरी प्रभावों का है
00:53और सब सब पशु मौजूद है तुम वहां देख रहे हो वो इस्तरी है और उसका जो धड़ है वो
01:04मचली का है
01:06जिसको पश्चि में मरमेड बोलते हैं तो यह अनन्यता है कि मनुष्य और पशु एक ही है और मनुष्य तुम
01:17बस अपने सर की वजह से हो उपर से मनुष्य है और नीचे से मचली है
01:22मनुष्य बस इसकी वज़े से हो नहीं तो हो तो तुम भी जानवरी और वही जानवर हो तुम जिसको फिर
01:28दारविन ने बताया
01:29evolution में कि वो समुद्र से निकला था तो तुम मछली हो लेकिन ये चेतना ही है जो तुम मनुष्य
01:35बनाती है और इस बात को हमने अपने
01:38मन्दिरों में जाकर के इंगित कर दिया और अब ऐसे लोग मछली खाएं ये कैसे हो सकता है जहां हम
01:47मचलीों को भी इतना सम्मान
01:48दे रहे हैं, सब पश्वों को इतना सम्मान दे रहे हैं, वो लोग पश्वों के पति कुरूर हो जाएं, मिश्चत
01:54रूप से ये हमारे रिशियों की सीख तो नहीं है
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