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  • 3 weeks ago
NCERT ने न्यायिक भ्रष्टाचार पर एक अध्याय शामिल करने के लिए सार्वजनिक माफी मांगते हुए मंगलवार को कहा कि आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पूरी किताबें वापस ले ली गई हैं.आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की इस पाठ्यपुस्तक में लिखा था कि न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और पर्याप्त न्यायाधीशों की कमी शामिल हैं.NCERT ने जारी बयान में कहा, ‘‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने हाल में कक्षा 8 (भाग 2) की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ प्रकाशित की है, जिसमें अध्याय चार ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शामिल था. NCERT के निदेशक और सदस्य अध्याय के लिए बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगते हैं. पूरी पुस्तक वापस ले ली गई है और अब उपलब्ध नहीं है.’’प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के बारे में आपत्तिजनक बयानों का स्वतः संज्ञान लिया था. यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और अभिषेक सिंघवी द्वारा तत्काल विचार के लिए उठाया गया था. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने और उसकी गरिमा को धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उच्चतम न्यायालय ने पुस्तक के भविष्य में किसी भी प्रकाशन, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसार पर ‘‘पूर्ण प्रतिबंध’’ लगा दिया.

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00:01N.C.A.R.T. ने नियाइक भ्रष्टाचार के एक चेप्टर को आठमी कक्षा के पाठ्थे पुष्टक में शामिल करने
00:08को लेकर सार्व्यनिक माफी मांगी है
00:10उसने मंगलवार को कहा कि सामाजिक विज्ञान की पूरी किताबें वापस ले ली गई है
00:19N.C.A.R.T. ने कहा कि राष्टरिय सैक्षिक अनुसंदान एबं प्रसिक्षन परिशद ने हाल में कक्षा आर्ट की
00:26समाजिक विज्ञान की पुष्टक
00:27Exploring Society India and Beyond प्रकाशित की जिसमें अध्याय चार हमारे समाज में न्याय पालिका की भूमिका शामिल था
00:37N.C.A.R.T. के निदेशक और सदस्य उस अध्याय के लिए विनासर्थ और पुर्ण माफी मांगते हैं
00:46CGI सुर्यकांत न्याय मुर्ती ज्वाय माल लेबागची और न्याय मुर्ती विपुल M.5 की तीन न्याय धीशों की पीठ ने
00:54N.C.A.R.T. की किताबों में न्याय पालिका के बारे में अपत्ती जनक बयानों का स्वता संग्यान लिया
01:00था
01:01ये मामला वरिष्ट अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिशेक मनु सिंगवी द्वारा ततकाल विचार के लिए उठाय गया था
01:08प्रधान न्याय धीश सुर्यकांत ने कहा कि किसी को भी न्याय पालिका को बदनाम करने और उसकी गरिमा को धुमिल
01:15करने की अनुमती नहीं दी जाएगी
01:17उचतम न्यायाले ने किताब के भविश में किसी भी प्रकाशन, पुरण मुद्रण और डिजिटल प्रकाशन पर पुर्णत प्रतिवंद लगा दिया
01:25था
01:25सरकार ने पुस्तक में विवादास्पत सामागरी सामिल होने पर खेद वक्त किया था
01:31केंद्रिय शिक्षा मंती धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि दोशियों की जिमेदारी ते की जाएगी और उनके खिलाप कारवाई की
01:38जाएगी
01:39बिरो रिपोर्ट एटीवी भारत
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