00:16मिडिल इस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका इरान के बीच टकराव की खबरों के बीच, केरल के कोची बंदरगाह पर
00:22एक इरानी नौसेनिक जहाज के पहुचने से कूट नीतिक हलचल तेज हो गई
00:27इरान का युद्धपोत IRIS-11 तकनीकी खरावी के कारण भारत के पास मदद की गुहार लेकर पहुचा और भारत ने
00:35अंतरनाश्ट्रिय कानून तथा मानविया अधार पर उसे बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमती दे दी
00:41ये घटना ऐसे समय में हुई जब शेत्र में हालात बेहत समवेदनशील बने हुए हैं और हाल ही में एक
00:47इरानी युद्धपोत के अमेरिकी टॉर्पीडो हमले में डूबने की खबर के बाद स्थिती और अधिक तनावपूर हो गई है
00:54राइसीना डायलॉग दोहजार चब्श के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जैशंकर ने इस पूरे मामले पर विस्तार से
01:01जानकारी दी
01:02उन्होंने सपष्ट किया कि भारत ने ये फैसला संयुक्त राष्ट समुद्री कानून समझोते यानी UNCLOS और अंतरराष्ट्रिय नियमों के आधार
01:11पर लिया
01:11उनके मुताबिक इरान की तरफ से भारत को एक संदेश मिला था जिसमें बताया गया कि उनका एक जहाज समुद्र
01:18में तकनीकी समस्या का सामना कर रहा है
01:20और वो भारत के सबसे नस्दीक मौजूद बंदरगाह में शरण लेना चाहता है
01:24विदेश मंत्री ने बताया कि इरानी जहाज में कई युवा केडिट भी सवार थे
01:28और जहाज की स्थिती ऐसी थी कि उसे तुरं तकनीकी सहायता की जरूरत थी
01:33भारत ने एक मार्च को ही जहाज को भारतिय बंदरगाह में प्रवेश की अनुमती दे दी थी
01:38हाला कि समुधर में परिस्थितियों के कारण जहाज को कोची तक पहुँचने में कुछ दिन लग गए
01:43और बाद में वो सुरक्षित रूप से वहाँ डॉक कर सका
01:46जैशंकर ने ये भी कहा कि जब ये जहाज अपने मिशन पर निकला था
01:49तब शेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण नहीं थे
01:52जहाज दरसल एक नौसैनिक बेड़े की समीक्षा के लिए यात्रा पर था
01:56लेकिन रास्ते में शेत्रिये घटना करम तेजी से बदल गए
01:59और वो अंजाने में उस संकट पूर्ण स्थिती के बीच फस गया
02:02भारत के सामने ये सवाल था कि इस थिती में क्या किया जाए
02:06उन्होंने बताया कि भारत ने इस मामले को केवल कानूनी नजरिये से नहीं
02:10बलकि मानविय दृष्टिकोंड से भी देखा
02:12समुद्र में किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या संकट की स्थिती में सहायता देना अंतराश्ट्रिय परंपरा और समुद्री नियमों
02:20का हिस्सा है
02:20ऐसे में भारत ने मानविय जिम्मदारी निभाते हुए इरान के जहाज को मदद देने का फैसला किया
02:26विदेश मंतरी ने ये भी उलेख किया कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में काफी बहस हो रही है
02:31लेकिन हिंद महासागर की वास्तविक स्थिती को समझे बिना इस तरह की बहस अधूरी है
02:36उन्होंने कहा कि हिंद महासागर लंबे समय से वैश्विक रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है
02:41डिएगो गार्सिया जैसे सैन्ने ठिकाने दशकों से यहां मौजूद है
02:45और जिबूती में विदेशी सेनाओं की तैनाती भी इसी सदी की शुरूआत में बढ़ी है
02:50श्रीलंका का हमबन टोटा बंदरगाह भी इसी व्यापक रणनीतिक परिध्रिश्य का हिस्सा बन कर उभरा है
02:56जैशंकर ने कहा कि हिंद महासागर की खास बात ये है कि ये दुनिया का एक मात्र महासागर है जिसका
03:02नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है
03:04और भारत इसकी भोगौलिक स्थिती के केंद्र में है
03:07ऐसे में भारत की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वो शेत्र में स्थिर्ता, सहयोग और विकास को आगे बढ़ाए
03:13उनके अनुसार भारत का उदय किसी दूसरे देश की कमजोरियों या गलतियों पर निर्भर नहीं करेगा
03:18बलकि भारत अपनी क्षमता, संसाधनों और नीटियों के आधार पर आगे बढ़ेगा
03:23उन्होंने ये भी कहा कि जो देश भारत के साथ सहयोग करेंगे उन्हें निश्चित रूप से इसका अधिकलाब मिलेगा
03:29और हिंद महसागर शेत्र में साजह विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी
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