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Breaking News: US-Iran Tension के बीच भारत की शरण में ईरानी युद्धपोत, दुनिया हैरान | Geopolitics
मिडिल ईस्ट में भयंकर तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत को शरण देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। आखिर भारत ने इतना बड़ा कूटनीतिक दांव क्यों चला?

Amidst escalating US-Iran tensions in the Middle East, India allowed the Iranian naval warship IRIS Lavan to dock at its Kochi port due to critical technical glitches. External Affairs Minister Dr. S Jaishankar clarified at the Raisina Dialogue 2026 that this bold decision was based strictly on international maritime laws (UNCLOS) and humanitarian grounds. This move highlights India's independent foreign policy, its strategic dominance in the Indian Ocean, and its commitment to regional stability.

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Transcript
00:16मिडिल इस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका इरान के बीच टकराव की खबरों के बीच, केरल के कोची बंदरगाह पर
00:22एक इरानी नौसेनिक जहाज के पहुचने से कूट नीतिक हलचल तेज हो गई
00:27इरान का युद्धपोत IRIS-11 तकनीकी खरावी के कारण भारत के पास मदद की गुहार लेकर पहुचा और भारत ने
00:35अंतरनाश्ट्रिय कानून तथा मानविया अधार पर उसे बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमती दे दी
00:41ये घटना ऐसे समय में हुई जब शेत्र में हालात बेहत समवेदनशील बने हुए हैं और हाल ही में एक
00:47इरानी युद्धपोत के अमेरिकी टॉर्पीडो हमले में डूबने की खबर के बाद स्थिती और अधिक तनावपूर हो गई है
00:54राइसीना डायलॉग दोहजार चब्श के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जैशंकर ने इस पूरे मामले पर विस्तार से
01:01जानकारी दी
01:02उन्होंने सपष्ट किया कि भारत ने ये फैसला संयुक्त राष्ट समुद्री कानून समझोते यानी UNCLOS और अंतरराष्ट्रिय नियमों के आधार
01:11पर लिया
01:11उनके मुताबिक इरान की तरफ से भारत को एक संदेश मिला था जिसमें बताया गया कि उनका एक जहाज समुद्र
01:18में तकनीकी समस्या का सामना कर रहा है
01:20और वो भारत के सबसे नस्दीक मौजूद बंदरगाह में शरण लेना चाहता है
01:24विदेश मंत्री ने बताया कि इरानी जहाज में कई युवा केडिट भी सवार थे
01:28और जहाज की स्थिती ऐसी थी कि उसे तुरं तकनीकी सहायता की जरूरत थी
01:33भारत ने एक मार्च को ही जहाज को भारतिय बंदरगाह में प्रवेश की अनुमती दे दी थी
01:38हाला कि समुधर में परिस्थितियों के कारण जहाज को कोची तक पहुँचने में कुछ दिन लग गए
01:43और बाद में वो सुरक्षित रूप से वहाँ डॉक कर सका
01:46जैशंकर ने ये भी कहा कि जब ये जहाज अपने मिशन पर निकला था
01:49तब शेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण नहीं थे
01:52जहाज दरसल एक नौसैनिक बेड़े की समीक्षा के लिए यात्रा पर था
01:56लेकिन रास्ते में शेत्रिये घटना करम तेजी से बदल गए
01:59और वो अंजाने में उस संकट पूर्ण स्थिती के बीच फस गया
02:02भारत के सामने ये सवाल था कि इस थिती में क्या किया जाए
02:06उन्होंने बताया कि भारत ने इस मामले को केवल कानूनी नजरिये से नहीं
02:10बलकि मानविय दृष्टिकोंड से भी देखा
02:12समुद्र में किसी भी जहाज को तकनीकी समस्या या संकट की स्थिती में सहायता देना अंतराश्ट्रिय परंपरा और समुद्री नियमों
02:20का हिस्सा है
02:20ऐसे में भारत ने मानविय जिम्मदारी निभाते हुए इरान के जहाज को मदद देने का फैसला किया
02:26विदेश मंतरी ने ये भी उलेख किया कि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में काफी बहस हो रही है
02:31लेकिन हिंद महासागर की वास्तविक स्थिती को समझे बिना इस तरह की बहस अधूरी है
02:36उन्होंने कहा कि हिंद महासागर लंबे समय से वैश्विक रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है
02:41डिएगो गार्सिया जैसे सैन्ने ठिकाने दशकों से यहां मौजूद है
02:45और जिबूती में विदेशी सेनाओं की तैनाती भी इसी सदी की शुरूआत में बढ़ी है
02:50श्रीलंका का हमबन टोटा बंदरगाह भी इसी व्यापक रणनीतिक परिध्रिश्य का हिस्सा बन कर उभरा है
02:56जैशंकर ने कहा कि हिंद महासागर की खास बात ये है कि ये दुनिया का एक मात्र महासागर है जिसका
03:02नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है
03:04और भारत इसकी भोगौलिक स्थिती के केंद्र में है
03:07ऐसे में भारत की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वो शेत्र में स्थिर्ता, सहयोग और विकास को आगे बढ़ाए
03:13उनके अनुसार भारत का उदय किसी दूसरे देश की कमजोरियों या गलतियों पर निर्भर नहीं करेगा
03:18बलकि भारत अपनी क्षमता, संसाधनों और नीटियों के आधार पर आगे बढ़ेगा
03:23उन्होंने ये भी कहा कि जो देश भारत के साथ सहयोग करेंगे उन्हें निश्चित रूप से इसका अधिकलाब मिलेगा
03:29और हिंद महसागर शेत्र में साजह विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी
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