00:00देखो मुहम्मत की पिछली पूरी जिन्दगी को अच्छी तरह चांद करके भी हमें कोई भी ऐसी बात इनमें नजर नहीं
00:04आई
00:04जिसकी वज़ा से हम मुहम्मत पर कोई इल्जाम लगा सके ताके लोग उनको बुरा समझने लग जाएं
00:09तुम ये इतनी आसानी से कैसे कह सकते हो मुहम्मत की पूरी जिन्दगी में कुछ तो ऐसा होगा आखिर वो
00:14भी तो इंसान है
00:27हमने बहुत कोशिश कर ली लेकिन हम नाकाम रहे और हकीकत ये कि ना जवानी में कोई दाग ना बच्पन
00:32में कोई लगस और ना ही अमली जिन्दगी में कोई कमजोरी
00:34और ये बात आप भी तो जानते हैं कि मक्का में पहले इन अवसाफ की वज़ा से ही मशुर है
00:38यही वो नाकामली तरदीद हकीकत है जो हर साहब आकल इनसान को इस एतराफ पर मजबूर कर देती है
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