00:00बुआ जी को दाँ उल्टा पड़ गया, बुआ जी भसमी भूर, प्रहलाद कह रहा है दुवारा मत करना, पूरी जनता
00:05खौफ में, प्रहलाद रौग्ड, अहंकार, शौक्ड, हिरन ने कशिपू, अहंकार है, तीदी हो लिका, जैसे तुम वैसे ही तुमारी बहन,
00:16तो बुआ
00:26जी ने कहा होगा कि अरे तुम तो राजा हो, तुमारे तीन और भी हैं, और ये तो लड़का बिलकुल
00:31हाथ से निकल गया है, और दूसरी बात, इसकी देखा देखी, बाकी तीन जो भाई हैं, वो भी बागी हो
00:36गये, विद्रोही हो गये, और जनता तक बात पहुच गई, कि
00:40कि अरे हिरने कशिपू के तो घर में ही विद्रोह हो गया है, तो फिक पूरी प्रजा यी क्या पता
00:45विद्रोही हो जाए, कि जब ये अपने घर को ये ने ही सम� kali सकते हैं, तो राजे का समालेंगे,
00:49तुवो बहे इस लड़के बात भी हैं, तो जलेंगी नहीं, पर यहाँ आ
01:09अग थी जो भैद कर लेती थी, इस आग को पता तक क्या जलाना है, क्या नहीं जलाना है, वह
01:14आग नहीं है, वह जो आप ले आ करके लिकढ़ीś, कठा करके अभी कल परसों जलाऊ गए, ये विवेक की
01:19आग थी, ये सत असत में भैद करना जानती थी, ये वो आग है, पर हम उस �
01:26तो जाने बेना क्या करते हैं?
01:42किसी एक घर के सामने उसका पेड़ काट दिया, बुरै नमानो हूली है, अरे ये विशिष्ट आग है जिसकी बात
01:48हो रही है, विवेक की आग है, लकडी आग नहीं है।
01:52तभी इस आग ने खुलिका को जला दिया, प्रहलाद को बचा दिया, अगर साधारन आग होती तो दोनों को जला
01:58देती, सार सार को गही रहे, थोथा दे उड़ा, थोथे को जला दे ना है, गंदगी जला दो, सोना बचा
02:07लो, तो आग ने यही करा, बुआ जी को दाँ उल्टा
02:09पड़ गया, बुआ जी भसमी भूत, अब प्रहलाद के रहा दुबारा मत करना, पूरी जनता खौफ में, प्रहलाद रौग्ड, अंकार,
02:18शौग्ड
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