00:00आचारी जी, आज कल होली बस कीचर और खुर्दंग का तेवार हो चुका है, बाहर जाने से भी डर लगता
00:06है, एक बहतर होली कैसे मना है?
00:09चका चौन्ध वाली चीज को ही खास मत माना करो, जो चीज सरल हो, सीधी हो, उसमें भी बहुत कुछ
00:16खास होता है
00:28प्रक्रति को जो पूजगे, पदार्थ ही तुम खाओगे, काम पूरे हो जाएंगे, अधूरे तुम रग जाओगे
00:43इतना तू क्यों तरा हुआ, जो मरे हुए को न मार सका
00:47बंधन को बंधन को जाओगे, गीता में मुक्ती है, बात तो मानो, बात तो मानो
00:53खाना पीना हो गया, ठीक ठाक था, सौगत सत्कार में कोई कमी तो नहीं
01:04नहीं तो देखो, जिन्दगी एका कोई नहीं भरोसा है, एक खोली पिछले साल थी, एक खोली इस साल है, अगले
01:09साल क्या होगा कोई नहीं जानता
01:12मौका आज है, जो उसका करना चाहो कर लो
01:16मौका आज है, जो नहीं जानता
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