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  • 19 hours ago
ओडिशा के भुवनेश्वर की शुभरानी दास पिछले 24 सालों से न्यूजपेपर हॉकर का काम कर रही हैं. उनका संघर्ष रात से ही शुरू हो जाता है, वो स्कूटर पर सवार होकर वो मास्टर कैंटीन पर जाती है, वहां से न्यूजपेपर इकट्ठा करती हैं. कोई दिन हो या कोई मौसम शुभरानी का सफर नहीं रुकता. लोगों के ताने सहकर भी वो अपने काम में लगी रहती हैं.  शुभरानी सिर्फ भुवनेश्वर में ही नहीं, बल्कि पूरे ओडिशा में अकेली महिला न्यूजपेपर हॉकर हैं, जो पिछले 24 सालों से ये काम कर रही हैं. पहले उनके पति ये काम करते थे, लेकिन हादसे ने सब कुछ बदल दिया. पति से अक्षम होने के बाद शुभरानी ने उनका काम संभाल लिया और परिवार का सहारा बनीं. 

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Transcript
00:24परिवार की जिम्मेदारी सम्हालने के लिए शुभरानी को न्यूसपेपर हौकर बनना पड़ा
00:33सुभा का वो वक्त जब शहर अभी नीन से जाग भी नहीं पाया होता पर शुभरानी का दिन शुरू हो
00:39चुका होता है
00:40दोनों हाथों में अखबार का भारी बंडल और जिम्मेदारियों से भरा मन वो स्कूटी तक पहुचती है और फिर शुरू
00:47हो जाता है उनका रोज का सफर
00:49गली गली महले महले ताकि लोगों के दर्वाजे पर समय से सुभा का अखबार पहुच सके
00:59लेकिन शुभरानी का ये सफर सिर्फ अखबार बाटने तक सीमित नहीं है इस रास्ते में उन्हें कई ताने भी सुनने
01:07पड़ते हैं
01:07लोग बोलते हैं कि एक महिला होकर तुम ये काम क्यों कर रही हो कोई कहता है कि घर में
01:13रहो ये काम मर्दों का है
01:18मैं पीपर लेकर बाटती हूँ लोग तरह तरह की बाते करते हैं जैसे मैं घर में क्यों नहीं रहती बाहर
01:25क्यों घूमती हूँ
01:26वो मेरे परिवार को जाने बगर ये बाते करते हैं
01:29मैं सब कुछ सुनती हूँ, बुरा लगता है
01:31लेकिन इससे मेरा होसला बढ़ता है
01:33मैं कई लोगों से मिलती हूँ, नई बाते सीखने को मिलती है
01:37शुभरानी सिर्फ भूवनेश्वर की ही नहीं
01:39बलकी पूरे ओडीशा की एकलोती महिला न्यूस पेपर होकर है
01:43और वो भी पिछले 24 सालों से पहले ये काम उनके पती करते थे
01:48लेकिन हाथसे के बाद वो शारिरिक रूप से असमर्थ हो गए
01:52आज भी कई बार वो शुभरानी के साथ स्कूर्टी पर पीछे बैठ कर निकलते हैं
01:58लेकिन परिवार को समहलने के जिम्मेदारी शुभरानी नहीं अपने कंधों पर उठा ली है
02:06पहले मैं पेपर बाटता था
02:08साल 2000 में मेरा एक्सिडेंट हो गया
02:11कुछ दिनों तक मुझे घर पर रहना पड़ा
02:13उस वक्त मेरी पत्नी और मेरी बेटी पेपर बाटते थे
02:16पेपर बाटने का बिजनेस बंद ना हो
02:19इसलिए शुभरानी लगातार पेपर बाट रही है
02:21लोग तात्रा की बाते करते हैं
02:24लेकिन हमें उससे कोई फरक नहीं पड़ता
02:26हर दिन वो करिब 400 पेपर बाटती है
02:30शुभरानी की पहचान सिर्फ एक हौकर तक सीमित नहीं है
02:33वो नाशनल लेवल की फुटबॉल और खोकों खिलाडी भी रह चुकी है
02:38इतना ही नहीं
02:39वो ओडिशा महिला फुटबॉल टीम की कप्तान भी रह चुकी है
02:42लेकिन शादी और फिर अचानक आई जिम्मेदारियों ने
02:46उन्हें मैदान से सड़को तकला दिया
02:51हलाकी वह महिला है
02:53लेकिन वह एक पुरुस का काम कर सकती है
02:55मेरी मा ने मुझे प्रिरित किया है
02:57मैं भविश्य में ऐसा ही कुछ करूँगी
02:59मैं हर सुबह अपनी मा की मदद करती हूँ
03:01फिलहाल मैं पढ़ रही हूँ
03:03और बच्चों को पढ़ाती भी हूँ
03:04हम कितने भी बड़ी हो जाएंगे
03:06हम ये कभी नहीं भूलेंगे
03:09जिंदगी ने शुबहरानी के सामने
03:11कई मुश्किले खड़ी की
03:12लेकिन उन्होंने हार मानने के बचाए
03:15जिम्मेदारी का रास्ता चुना
03:16आज वो सिर्फ अखबार नहीं बाटती
03:19बल्कि हर सुभाल लोगों तक
03:21मेहनत, हौसले और संघर्ष की
03:24मिसाल भी बाटती है
03:25ETV भारत के लिए
03:27भूगनेश्वर से विकास कुमार दास की रिपोर्ट
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