00:00आप किसी से दिलने जाएंगे, आप उसके घर में, उसके द्वाइंग रोम में बैठे हैं, अगर आपकी रिकॉर्डिंग कर ली
00:10जाए, कि आप अपने रिश्टदारों के साथ बैठ कर क्या बातें करते हैं, और आपके चेहरें के सारे जो भाव
00:17हैं, उनको कैप्चर कर लिया �
00:23दृख जाए, कैमरे में, आपको फिर दिखाया जाए, अपको लाजसी आएगी कि मैं कितना फरेव कर रहा था, कितना हरेव
00:35कर था हैं, ऑवाजें उच्छी हो जाती हैं, मुस्कुराहटें मियटली हो जाती हैं, जहां ना होनी चाहिए, वहां हो जाती
00:47है, हाँ ना में कब्�
00:49हो जाती है. और यह सब बिलकुल गयर जरूरी है. रिष्टे गयर जरूरी नहीं है.
00:55रिष्टे तो कह रहा हूं, बहुत संदर्थ पड़े-प्यारे भी हो सकते हैं पर हम गड़वड़ हैं तो हम रिष्टे
01:02भी गड़वड़ी बनाएंगे ना.
01:04जो असली बाते हैं, वो हमें कभी किसी से करनी नहीं, रिष्टेदारों से तो कभी भी नहीं करनी, यह ना,
01:11और त्यों हारों पर तो एकदम नहीं करनी असली बाते हैं, सब उपर उपर की सतही बाते हैं, अगर अनिवारे
01:20होती हैं, तो मैं कुछ नहीं कहता, मैं तो पूछ रह
01:35और तरीका तो सही तब होगा जब केंद्र सही हो, हमारे केंद्र ही गड़बड होते हैं
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