होली पर धुलंडी के दिन बुधवार को शहर में साढ़े चार सौ वर्ष पुरानी धाकड़ समाज की धमाल अपने रियासतकालीन अंदाज में धूमधाम से निकली। ढोल-नगाड़ों के डंकों की गूंज पर हवा में लहराती लाठियों के बीच धार्मिक वृतांतोंं के ख्याल ठड्ड़ा गीतों की स्वर लहरियों से दशकों पुराना उत्साह फिर से जीवंत हो गया। धमाल में लोगों ने खूब गुलाल उड़ाई।
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