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800 साल पुरानी है आपकी पसंदीदा गुजिया की कहानी, जानें...

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00:00होली और गुजिया का रिष्टा सदियों पुराना माना जाता है
00:03फूड एतिहासकारों के अनुसार गुजिया जैसा पकवान
00:06तेरहवीन सदी में गुंजा नाम से भारतिय ग्रंथों में उल्लेखित मिलता है
00:10उस दोर में गुड शहद की भराई को आटे से ढखकर बनाया जाता था
00:13कुछ स्टडीज इसे तुर्की की मशहूर मिठाई बकलावा से जोडते हैं
00:17माना जाता है कि मध्य एशियाई व्यापारी भर्वां पेश्ट्री की परंपरा भारत लाए
00:21समय के साथ भारतिय रसोयों ने इसमें मावा, सूखे मेवे और इलायची का स्वाध जोड कर इसे नया रूप दिया
00:27गुंदेल घंड को गुजिया का गढ़ माना जाता है जहां राजदरवारों में चंद्रकला नाम से इसका शाही रूप तयार हुआ
00:33सोलहवीन सदी में ब्रज क्षेत्र में ये भगवान कृष्ण को प्रसाद के रूप में भी चढ़ाई जाने लगी
00:37मुगलकाल में केसर और महंगे मेवों से इसे और सम्रिध बनाया गया
00:41आज गुजिया पारंपरिक मावा से लेकर चॉकलेट और शुगर फ्री जैसे आधुनिक रूपों में मिलती है
00:45अलग-अलग राजियों में इसे करंजी, पिड़कियां और करजिकाई जैसे नामों से जाना जाता है
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