00:00होली का तेहार रंगों और खुश्यों का प्रतीक है
00:03लेकिन इससे एक दिन पहले होने वाला होली का देहन भी धार्मिक और सांस्कृतिक द्रिस्ट्री से अत्यांत महत्तपूर्ण माना जाता
00:10है
00:10इस अनस्ठान में लकडियों, उपले और अन्य समागरियों से होली का जलाई चाती है
00:16लेकिन कई लोग इस दोरान अग्यानता में कुछ ऐसे पेड़ों की लकडियां भी जला देते हैं जिनका उपयोग वर्जित माना
00:23जाता है
00:24ऐसे में चलिया आपको हम बताते हैं इस वीडियो में कि होली का देहन में किन लकडियों को जलाना चाहिए
00:29और किन लकडियों को नहीं जलाना चाहिए
00:32दरसे बताया चाहता है कि हुली का दहन में पीपल, बर्गत, आम, तुलसी, सहीद, कई पेड़ों की लकडियां नहीं जलानी
00:39चाहिए
00:40कहा जाता है कि ये पेड़ नाकेवल धार्मिक रूप से पूझनिये हैं बलकि परियावरन और स्वास्ते की द्रिस्टी से भी
00:47महतपुन भूमिगा निभाते हैं
00:49वहीं हिंदुधर में पीपल और बर्गत के व्रिक्ष को अत्यांत पवित्र माना गया है
00:53पीपल के व्रिक्ष में भगवान विष्णू का वास माना जाता है वहीं बर्गत को अच्छे जीवन और लंबी उम्र का
01:00प्रतीक समझा जाता है
01:02ऐसी माननेता है कि इन व्रिक्षों की लकडियां जलाने से देवता रुस्ट हो सकते हैं
01:08जिससे परिवार में अशुब घटनाएं घट सकती हैं इसके लावा तुलसी का पौधा भी माता लक्षमी का स्वरूप माना जाता
01:15है
01:15इसलिए इसकी लकडि चलाने से आर्थिक संकट आने की आश्चंका बनी रहती है
01:20पताय जाता है कि होली का देहन में उन्हीं लकडियों का उपयोग करना चाहिए जो पारंपरिक रूप से मानने हैं
01:26होली का देहन में सूखी लकडियां उपले और विशेश रूप से नीम, बेर, शमी और बबूल जैसे पेड़ों की लकडियों
01:34का उपयोग क्या जा सकता है
01:36ये पेड़ ना केवल धार्मिक रूप से स्विकार रहे हैं बलकि इन में कोई और शिदिये गुन भी नहीं होते
01:56मुख चुकी हो उमेद करती हो आपको जानकारी पसंद आई होगी फिलाल अमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को
02:01लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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