India News CEO : इंडिया न्यूज़ चैनल के वायरल वीडियो के बाद अब चैनल हेड यशवंत राणा ने खुद की सफाई देते हुए एक वीडियो शेयर किया है और उन्होंने क्या कुछ कहा
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00:02नश्रार दोस्तों एक दो मिनट की देरी हो गए हो गए हो जाता है कि जब जब से पहले तो
00:15पिछले दस बारा घंटों में आप सबों ने
00:19जो साथ दिया समर्थन जताया साहस संबल सहयोग इन सब के लिए आपका दिल की गहराईों से अबार
00:36मुझे ये बात समझा है कि मैंने अपने पूरे करियर में
00:41क्या कमाया है, क्या बनाया है, क्या स्थाचा है, क्या सहेजा है, क्या उपलब्दी है
00:49आप सबों का मेरे लिए इस तरीके से खड़ा होना
00:59किसी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्दी और ठाती हो सकते, जिस पर वो जीवन पर नाज कर सकता है
01:06उसको इसके अलावा कुछ चाहिए नहीं, इसकी कीमत है ही नहीं
01:10अब फोन आते हैं तो फिर बीच में दिक्कत हो जाएगी, सुनते रहेगा मुझे
01:15मैं जानता हूँ कि मुझे देशवर में मेरे जो पत्रकार मित्र हैं, मेरे शुप्चिन तक हैं, साथ ही हैं, इस्ट
01:26हैं
01:27वो सुन रहे हैं या फिर बाद में सुनेंगे
01:34न्यूज इंडिया 24-7 न्यूज चैनल के जो मेरे साथ ही हैं, वो सुन रहे हैं या फिर वीडियो बाद
01:43में देखेंगे
01:47दरसल ये मेरा लाइव आना, किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई अभियान नहीं है
01:57लेकिन एक संस्थान के भीतर मालिकान अदम्भ, सामन्ति मानसिक्ता, अशुष्ट असब्भ विवहार
02:11इसके खिलाफ युद्ध, इसके विरुद्ध, अपने साथियों और पत्रकारी स्वाहिमान के लिए युद्ध
02:24और ये किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए वश्यक होता है
02:30जो शर्तों पर जिवन जीता रहा हो
02:34जिसने वसूलों के साथ अपना पेशा निभाया हो
02:42और जिसने कभी मर्यादा नहीं लांगी हो
02:46विवहार की, समवाद की, साहचारी की, सहमती या सहमती की
02:57जो लश्वन रेखा है मैंने हमेशा उसका पालन किया
03:02किसी भी व्यक्ती से हर आदमी की सहमती नहीं हो सकती
03:08बहुत सारे लोग आपके मेरे विर्द हो सकते हैं
03:13उनका भी सम्मान है
03:14क्योंकि उनकी असहमती उनके विरोध के अपने कारण है
03:18वो किसी काल विश्युष परिस्ति में होंगे
03:21लेकिन आपने मर्यादा अनुशासन सम्मान और संस्थान के भीतर काम करने का जो एक दाइरा है
03:35और भी पॉलिसी बेस्ट क्या उसका पालन किया या नहीं
03:44और इस वीडियो को लाइव आने के लिए कारण ये है
03:54कि कल से एक वीडियो वाइरल चल रहा है
03:58दो वाइरल किया जा रहा है
04:01ये निउस इंडाइ 24-7 की निउस रूम का वीडियो है
04:06और इसमें निउस रूम के भीतर एक टेबल की उपर फाइलें रखे हुए है
04:15और निउस इंडिया के चेर्मेन शलंद शर्मा और शालू पंडित
04:20वो कह रहे हैं कि ये जितने भी लोग हैं जिनकी ये फाइलें हैं
04:25दरसल ये लोग फर्जी हैं
04:28इनके डॉक्मेंट्स पूरे नहीं हैं कंपनी इनकी जिम्मेदारी नहीं लेती है इनकी सैलरी राना इश्वन्ची देंगी
04:37पूरे निउस रूम के भीतर चैनल के प्रोमोटर चेर्मेन का वो जो चीख ना चिलाना है और इस तरह का
04:45बरताव है वो घोर अपमांजनक है
04:49गोर अपमांजनक है वो अराजक है असब्य है अशिष्ट है फूहर और घटिया बहुर है किसी भी संस्थान के भीतर
05:03किसी भी व्यक्ति के लिए इस तरह का बरताव बरदाश नहीं क्या सकता है
05:12जो फाइले हैं वो उन पत्रकारों की है जिनको पिसले महीने देर महीने के भीतर मैंने हार किया है
05:27और कहा ये जा रहा है कि इनके कागस गलत है फर्जी हैं ये कोई ऐसे लोग हैं जो किसी
05:38गुमनाम दुनिया से आये हुए हैं
05:40किसी ऐसे पेश्वे में हैं जो अंधेरे कमरे में किये जाने वाले धतकरमों से जुड़ा है ये क्या इट गारा
05:55मिट्टी से जुड़े लोग हैं
06:00वो सम्मान का काम है बार बार फोन आने के चलते हो सकते हैं मेरी आवाज आपको नहीं आ रही
06:06होगी ये ठेकेदारी नहीं है ये कमिशन खोड़ी नहीं है ये सम्मान का पेशा है
06:17पत्रकार इस देश में कुछ जम्मेदारियों के साथ चलता है लोगों के परिवार समाज इस देश इसके भीतर जो सवाल
06:30हैं अगर उन सवालों के साथ वो जीता है तो वो अपने जीने के भी तौर तरीके अपने साथ रखता
06:36है
06:40बार-बार फोन आ रहा है। इसलिए मैं रुक रहा हूं। तो जिन लोगों की फाईलियं पड़ी हैं।
06:49वो सब इसी इंडस्ट्री के हैं। मीडिया इंडस्ट्री के हैं। टाइस साल हो गए मुझे इंडस्ट्री के भीतर।
06:55एक एक आदमी को आप जानते हैं, एक एक को पहचानते हैं, कोई आदमी किसी कंपनी से आता है, तो
07:03उसके पास रिनिशनलेटर होता है, उसका बैंक स्टेट्मेंट होता है, उसका पुराना प्रोफाइल होता है, ये सारे के सारे पड़े
07:15हुए हैं, मैंने व्यक्तिगत तोर पर
07:18सबसे बात की,
07:20HR को ले करके,
07:21तो कि ये काम ये जिम्मेदारी
07:23HR की होती है,
07:24और जाहिर है कि HR अपना काम करता है,
07:28HR के लिहास में पूछा हुआ कि
07:30बताओ तुम को इसमें क्या क्या चाहिए,
07:32उन सब लोगों को मैंने बुलाया,
07:34बुला कि देखो, ये दो पेपर और है,
07:36या ये एक और कमी है,
07:38इसको पूरा कर दो,
07:41उन सबों ने पूरा किया,
07:45और उन सबों की फाइलों को,
07:47अगर टेबल पर रख करके,
07:49उनको रद किया जाता है,
07:50तो उनकी पत्रकारता,
07:51उनकी सम्मान, उनकी स्वाविमान,
08:04काम करना, नहीं करना,
08:07आप जब किसी को हायर करते हैं,
08:10तो आप अपनी,
08:12नजर में योगिता और जरुवत,
08:16इन दोनों के मताबिक हायर करते हैं,
08:18हर संपादा करता है,
08:19हर संपादों को लगता है,
08:21कि मेरी जरुवत के लोग हैं,
08:23मेरे जरूत के लोग नहीं है।
08:24ये मसलालग है कि आप किसको हैर करते हैं, किसको नहीं करते हैं?
08:29लेकिन जन लोगों को ओफर लेटर दिआ गया,
08:31जो कमपनी में महीने, डियर महीने से काम करते हैं,
08:34उनके पूरे वजूद को रद्द कर देना, खरईज कर देना,
08:39यह गलत है अपमांजनक है वो पूरा वीडियो साजिशन वाइरल करा है गया उसमें मेरा कुछ नहीं है उसमें मेरा
08:53कुछ नहीं बिगड़ता है
08:55हाँ तकलीफ इस बात की है कि जिस संस्थान में मैं हूँ उस संस्थान में चेर्मेन का बरताव ऐसा है
09:08यह बात बाहर जाएगी तो लोग क्या सोचेंगे कि मैं कहा हूँ
09:13और जब कभी भी कोई आदमी कोई बरताव करता है तो जाहिर है उसकी अपनी शिक्षा संस्कार परवेश संगती इन
09:22सबका असर उसके उपर होता है उससे बाहर उससे अधिक आप अपने आपको नसाच सकते हैं न बना सकते हैं
09:34मैंने अपनी मर्यादा बनाए रखी अलोबत्ता वह न्यूजरूम का मामला नहीं था लेकिन न्यूजरूम में उसको लाया गया जो पत्रकार
09:44बहुत लंबे समय से काम करते रहे हैं मैं सब को बारी-बारी से आपके सामने लियाओंगा सब जाने पहचाने
09:50चेहरे
09:52जो लोग इंडस्ट्री में काम करते हैं एक चैनल से दूसरे चैनल दूसरे से तीसरे चैनल में जाते रहते हैं
09:57नौकड़ी छूटती है लगती है यह स्पेश्व में चलता है लेकिन आप उनको रद नहीं कर सकते हैं वो फर्जी
10:05हैं यह नहीं कर सकते हैं वो गलत हैं उसके �
10:20उसमें मनमवाने तरीके से, अराज़क तरीके से कोई भी बात न कही जा सकती है, न कही जा सकती है।
10:50पर नहीं प्रेदी तो इस वीडियो में जिन लोगों को आप कह रहे हैं कि ये गलत है उन सब
11:06को बारी बारी से मैं आपके सामने लिए आऊंगा ये बताने के लिए कि ये क्यां से लोग है
11:13उन्हें सब लोगों पर और जितने न्यूज इंडर 24-7 मेरे साथ ही हैं सब पर मुझे नाज है किसी
11:20भी संपादक को अपने किये पर अगर फक्र है तो वो अखेले कुछ नहीं करता है टीम करती है
11:27संपादक के बूते चैनल को खड़ा करना चमकाना ले जाना बढ़ाना नहीं सम्भव है संपादक गाडिंग फोस होता है टीम
11:35करती है और आपको अपनी टीम के ऊपर हमेश्वा नाज होना चाहिए और मुझे है हमेश्वा है
11:43मैंने एक अनुशासन संतुलन मर्यादा सम्मान इसका जीवन जिया है और इसी का जीवन जीता रहूंगा
12:01अब मर्यादित बरताव विवार मैंने कभी स्विकार नहीं किया जिन लोगों को हैर किया गया जो महीने देर महीने से
12:13काम कर रहे हैं उनका हक बनता है
12:21और उस हक की खाते भी में बात करूंगा लेकिन मुझे इस बात का अफसोस है और जीवन में पहली
12:33बार है और ठाइस साल के करियर में ट्वी तुड़े में काम करता रहा इंडिया नूज में काम किया करियर
12:42के शुरुआत में निसी से की
12:45पहली बार जिन लोगों को आप हायर करते हैं उन लोगों को
13:02ये कोई ठाकधार हायर नहीं किया में ने, कमिशन खोर हायर नहीं किया में ने,
13:10कोई जालसाज हार नहीं किया
13:19यह पत्रकार हैं
13:22और पत्रकारता की शर्तों के मताबिक
13:26वो अपना काम करते रहे हैं
13:31और नोनिस कमपनी को आगे बढ़ाने में चमकाने में
13:35अपना खून पसीना लगाया है
13:42कभी कभी आपके जीवने दुर्भाग या आजाता है
13:46और बहुत कुछ नहीं करने के फैसले के बाद भी
13:52आप से कोई गुनाह कोई गलती हो जाती है
13:55आप इंसान हैं आप समझ नहीं पाते
14:02मैंने सूच रखा था कि मैं कभी भी
14:06इस तरह के सती में नहीं आऊंगा
14:09जिस तरह के सत्यां बनी
14:14और मैंने इस चैनल को बहुत हद तक टाला
14:19लेकिन महीनों लगातार ये कहने के बावजूद
14:52कि सर्फ प्लीज आप देखिए आप ही का है
14:53बरोसे के हैं वो भी आप से कहते हैं कि विचार करना चाहिए और आप निरणे
15:03ले लेते हैं और यहीं निरणे है नियूज इंडिया 24-7 जॉइन करने का नहीं चाहते हुए भी
15:15इस्ति ऐसी आगई मुझे लगा कि यह शायद ठीक है और यह शायद जो है यह संदेह सवालों में रहा
15:28और यह गहराता चला गया
15:33कंपनी के भीतर जो स्थितियां रही उन पर मैं जाना नहीं चाहता हूँ आप जब किसी कंपनी में काम करते
15:42हैं
15:43आप बहुत सारी जमilenे दारियों के साथ काम करते हैं आपके जवाब देहें होती हैं वहां جतने भी लोग यह
15:48कम करते हैं वह आपके परिवार का हिस्सा होते हैं इस तरह का होते हैं लेकिन एक वह भूत ही
15:56घैरनशास्नात्मक और आजक और गड़्डमेडस सिस्तिती थि
16:04उसको सहेजने, संभालने
16:06और अपनी साख बचाने के लिए मैंने दिन रात लगाए
16:14चैनल का पूरा लुक
16:17और आप मेरा विरूद करने के लिए बिस्वतंत रहें
16:19जो मैं कह रहा हूँ इसमें कुछ भी गलत होगा
16:21तो यह आजादी हर व्यक्ति को होनी चाहिए
16:24मैंने पहले भी कहा कि मेरी यह बाद किसी व्यक्ति के खलाफ नहीं है
16:28लेकिन एक मानसिक्ता एक खलाफ है जो किसी चैनल के भीतर
16:31किसी को भी रौन करके और पत्रकारों को दबा करके
16:34या फिर उनको अपनी जूती की नूप पर रखने की मानसिक्ता से चलती हो
16:38जहर बुझी मानसिक्ता यह नहीं चलता ठेकेदारी में और न्यूज चैनल की जिमेदारी में
16:48जमीन आस्मान का अंतर है जमीन आस्मान का अंतर है इस अंतर को अगर आप में समझते हो
16:57तो समझाना मुश्किल है
17:01तो मैं आया
17:04मैंने चैनल का पुरा लुक बदला
17:07उसका कलेवर बदला
17:11खबरों को लेकर के जो
17:16एक साफ सुथरी समझ मेरी मेरे मुताबिक रही है
17:22चैनल का औरियंटेशन में नदर किया
17:25देश के जाने माने पैनलिस्ट जितने भी होते हैं
17:29जितने भी हैं
17:30चैनल पर बैठने लगे
17:34इंटेव्यूस का सिलसिला शुरू हुआ
17:38मेरे मुताबिक
17:40साख बनी चमकी
17:44जिन चीजों को लेकर के
17:47कई तरह की बातें कही जाती रही
17:49वो सारे कारण दीरे-दीरे
17:51धूमिल पढ़ते जा रहे थे पढ़ते गए
17:56मेरे मुताबिक
18:00चैनल एक सम्मान और स्वाहिमान के सती में
18:03रहा और मैं ऐसा नहीं कहता हूँ
18:05किसके पहले क्या था उस पर नहीं जा रहा हूँ
18:09कि लेकिन जब कभी भी आप अपनी जिम्मदारी को लेकर के चलते हैं तो जाहिर है कि आप अपनी जिम्मदारियों
18:15के साथ आगे बढ़ते हैं और जो आप सोच रहे होते हैं कि चैनल आप
18:22कि ऐसी बननी चाहिए तो लाजमी है कि आप कॉंटेंट के डिजाइनिंग कॉंटेंट को लेकर के चर्चा उसकी पूरी प्रोग्राम
18:30एक पीसी सब पर काम करते हैं
18:36और दो महीने में जितने बदलाव आए उन सबका भी प्रेजन्टेशन का भी मैं आपके सामें रखूँ और यह मजबूरन
18:47है मैं बहुत ही
18:54अनुशासित और मर्यादित जीवन जीने वाला आदमी हूँ मैंने कभी किसी के खिलाफ कुछ कहा नहीं
19:08जिसके बारे में मैंने कहा कि यह गलत है तो मैंने उसके सामने कहा कि या यह गलत है
19:13लेकिन कहने का सलीखा जगह तरीखा यह जरूरी है कि आप ताय करेंगे
19:35बेड़ बकरी नहीं है पत्रकार
19:41आप हांक नहीं सकते खड़ी होती हुई बिल्डिंग और वहां लाचार मजबूर मजदूर और एक न्यूज चनल के सम्मानित स्वाविमानी
19:57पत्रकारों के भी तर
20:03आपके वेवहार को ले करके अगर कोई फर्क नहीं है
20:12जबकि दोनों इंसानी जीवन है बस यह कि काम करने के दो अलग अलग फील्ड्स हैं तो वहां तोर तरीखा
20:20बदल जाए
20:21लेकिन इंसानीत और कमपनी के भीतर काम करने की कमपनी की पॉलिसी इन दोनों को आप दरकिनार नहीं कर सकते
20:32इन दोनों के मताबिक ही आपको चलना पड़ेगा किसी को भी
20:39जिस कमपनी के भीतर HR पॉलिसी ना हो कोई लीव नहीं ले सकता
20:46CL नहीं है, PL नहीं है, EL नहीं है तो जाहिर के संपादक उस पर काम करना शुरू करेगा
20:54संपादक लोगों के सुकून और सहूलियत बड़ी जन्दगी को सनुश्चित करने का काम करेगा
21:03अपनी टीम के लिए काम करने का बेहतर माहौल और उनके जीवन में एक सुकून दें स्थिती बनी रहे
21:12यह तै करने का जिम्मा संपादक लेकर के चलता है
21:18मैं HR पॉलिसी पर अलग से आऊंगा
21:23लेकिन जब इस्थितियां कम्पनी के भीतर कम्पनी वाली ना हो
21:29और यह आपको जाने के बाद समझ में आ रहा है
21:33तो जाहिर है कि आप अपने मुताबिक उन सभी नीतियों को अमल में लाने की कुछ करेंगे
21:41जो सरकार ने कम्पनी के भीतर करने के लिए तै करकते हैं
21:48किसे व्यक्ति की पालिसी नहीं होती और किसे भी आदमी को रद करने के लिए कोई व्यक्ति स्वतंतर नहीं हो
21:54सकता है
21:58मैंने उस पूरे वीडियो में सिर्फ यही कहा कि यह गलत है यह गलत है इन लोगों को मैंने हार
22:06किया है तो उनकी अपनी पहचान है अपनी साक्ष इननों ने पने पेपस जमा किया है
22:10मैंने देखे हैं HR की मौझूरी में दिख्डवाए क्योंकि HR को मैंने बुलाया कि जिन जिन फाइलों में दिख्कते हैं
22:15उन लोगों को बुलाओ जिन लोगों की दिख्कते हैं वो सब लोग आए और सब ने अपने पेपर्स दिखाए मैंने
22:22कहा कि वो सबों ने अपना काम पू
22:40लेकिन मैंने उस स्थिती में भी ना तो अपनी मर्यादा लांग ना नुशासन ना अपनी भाषा और ये शुष्टा सब्विताएक
22:54पत्रकार के बीतर होनी चाहिए
22:57विरोध का तोर तरीका कभी भी अमर्यादित नहीं हो सकता है लक्षमन रेखा नहीं लांग सकता है और कोई लांगता
23:06है तो लांगने नहीं देना भी उसका फर्च
23:11मैंने इसले भी रोध किया
23:14ये गलत
23:17कितने लोग हैं इस पेशे में
23:19कुछ लोगों के उपर ये बात आई की
23:21ये लोग घर पे बैठे वे लोग थे
23:27कौन से लोग थे
23:29एक पत्रकार अगर कुछ महीनों के लिए
23:32नौकणी से बाहर है तो उसकी योगता
23:34उसकी शम्ता उसकी पहचान क्या खत्म हो जाती है
23:40उसकी गाबलियत सवालों के घेरे में आ जाती है
23:44फिर तो एक हजार पत्रकारों का नाम लूँगा जिनकी साख है
23:48जिनकी अपनी जगह है
23:51जिनका सम्मान है
23:54वो नौकणी नहीं कर रहे हैं
23:55तो क्या दुबारा नौकणी करेंगे
23:58तो रद्द कर दे जाएंगे
24:03कितने लोग हैं
24:07एक हजार तो आप जानते होंगे
24:10और उतनी है प्रतिभा के उतनी है
24:12कुबत काबलियत के बहुते रहे लोग पड़े हैं
24:16से नौकणी नहीं कर रहा है आध की तारीख में
24:18कुछ महीनों से घर पे हैं कुछ साल से घर पे हैं
24:21उसका तेबर
24:24उसकी योगता
24:26पत्रगार के तोर पर उसकी पहjungाई
24:30वो कुछ नहीं कर सकता
24:33इस तरह की मान सकता
24:38क्या है
24:39सब कर दढ़ मुषकर
24:46पत्रकार के पेश्वे में ये उतार चड़ाव जीवन के चलते रहते हैं
24:52वो लग तरह की मिट्टिका बना इंसान होता है
24:56बहुत खपता है वो
25:01और रद्द करने का अधिकार किसी को नहीं है
25:05अगर दिमाग साथ में आसमान पर है तो उसका कोई लाज नहीं है
25:13लेकिन एक पत्रकार पत्रकार है
25:16वो दो महीने घर पे है या दो साल घर पे है
25:21वो फिर नौकने शुल करता है उसी जज़वे से करता है
25:27और जब तक नहीं करता है तब तक यूप पत्रकार के तौर पर काम करता है
25:31रद्द कर देंगे उसको
25:36नाम गिराओं कितने लोग घर पर बैठे हैं
25:41उनके साख है
25:45मैं फिर बोलता हूं किसी का विरूद किया सकता है
25:49किसी भी मसले पर बात हो सकती है
25:51जिन देशों के बीच में युद्ध होते हैं वो भी टेबल पर बैठते हैं
25:58लेकिन ये तरीखा
26:01ये तमीज
26:03ये बढ़ता हो
26:10ये नहीं चलता है
26:14और हर पत्रकार को
26:18अपनी रियर्ड सीधी करके टनी चाहिए
26:24ये मालिकाना कुड मगजी
26:29जार्बुजी सोच
26:33और
26:36किसी को कुछ नहीं समझने का संसकार
26:44कहां से पैदा होता है
26:47है रहत है मुझे
26:52मैंने इंडियान उसमें काम किया
26:53टीवी टुड़ी में काम किया
26:56मैंनेज्मेंट के साथ आपका इंट्रेक्शन कैसे होता है
26:59कितना मर्यादित होता है
27:02बंद कमरे के भीतर आपकी लड़ाईयां चलती कई मुझ्दों के होते हैं चैनल बहुत बड़ा का नेशनल जूज चैनल है
27:09देश्वर में देखा जाता है मंत्रालियों में रिकॉर्ड होता है
27:13आपको नहीं समझा है तो बात अलग है
27:17लेकिन मेनेजमेंट के साथ संपादक का इंटरेक्शन जिस मर्यादित रूप में होना चाहिए
27:24जिस तरह से होना चाहिए उन संस्थानों जाकर देखो
27:30जिन संस्थानों से आपने अपने रिष्टे काटे हैं
27:35वहाँ नौकरी नहीं कर रहे हैं
27:36फिर भी आपके इज़त क्यूं है? क्योंकि आपने इज़त की रोटी कमाई. आपने सम्मान, स्वाविमान,
27:44मर्यादा इन सब का पालन किया है. अनुशासं के दाएरे में रहें आप.
27:51discussing उन्में फिर बोलता हूं, सनस्थान के भी तर सनस्थान के नियंम
27:57कायदे चलते हैं किसी व्यक्ति का आदेश नहीं चलता है यह खुला फर्मान नहीं चलता है फैसले किसी के भी
28:04सही गलत होते होंगे उन फैसलों पर बात करने का तौर तरीखा अलग है
28:12सडक नहीं है यह चोराह नहीं है यह मन मर्जी से नहीं चलता है जिन संस्थानों के बीदर जिन साथियों
28:30के साथ मैंने काम किया है
28:34हजारों हजार लोग हैं हजारों लोग तो नौकरी दी होगी दस्यों हजार के साथ आपने काम किया है
28:47कही हो सकता है कि आप किसी के फैसले सहमत हो गो अपना विरोध दर्ज करते है मुझे लगता है
28:53उनका विरोध सही है तो मैं कहता हूँ यार स्वारी
28:56शायद उस समें मेरा फैसला खलता लेकिन मैं अपने तरीके से उसे बात करता हूं
29:01और इस पूरी इंडस्ट्री में मैंने अपनी जो जगह बनाई है
29:06वो अपने अपनी योगिता अपने सायम शुष्चाचार टीम के साथ खड़ा होने का साहस रीड
29:19और टीम के साथ सम्मान जनक बरताव सक्माई है
29:26आसमान से नहीं आकर किया जमीन फटक नहीं गई मेरे लिए
29:31मैंने अपनी जगह बनाई है
29:34और अगर उसको इस तरीके से कोई आदमी कुचलने की कोशिश करेगा
29:44मैं फिर बोलता हूँ एक व्यक्ति अपने जीवन में क्या करता है
29:49क्या कुछ करता है
29:52मेरा उससे कोई लिना देना नहीं है
29:56लेकिन संस्थान के भीतर संस्थान के नियम काईदे
30:01बाचीत का दाइरा उसकी मरियादा
30:05अगर यह सब ध्वस्त होते हैं
30:09तो वहां चुप रहना बुजदली है
30:14गैर पिश्वराना है
30:18और अपनी नजरों में जो कुछ भी आपने बनाया है
30:22उन्हें सब को स्वाहा करने जैसा है
30:26और यह नहीं हो सकता है
30:30न्यूज इंडिया में जितने भी साथ ही मेरे हैं
30:33जो काम कर रहे हैं
30:37उनके वाजिब हक और उनके सम्मान
30:45इन दोनों का पैरोकार मेरा और रहूंगा
30:52जीवन में सिर्फ पत्रकारता की है
30:58इसके वसूल इसके तौर तरीके
31:04मुझे कोई सिखाए
31:07और वह भी कोई और
31:11जिसका दूर दूर तक इससे कोई रिष्टा नहीं है
31:15तो शर्माती है
31:21जो हुआ
31:25बहुत दुर्भागे पुर्ण है
31:27बहुत अफसोसनाक है
31:33बहुत अमर्यादित है
31:37जिन लोगों को मैंने हार किया
31:42कोई ऐसा नहीं है
31:45तो चोर चक्का है
31:47इस फील्ड में अपनी पहचान
31:50अपनी काबियत के साथ उन लंबे समय से है
31:54घर पे है तब भी उसकी अपनी जगए है
32:00उन सबों के भरोसे को ठियस पहुँचिए
32:06इस पूरे घट नाकरम से
32:12जितने भी इंडस्ट्री के लोग है
32:16मुझे जानते हैं लंबे समय से
32:19हजारों हाँ हजार मेस्जिजज हैं
32:21फोन कॉल से हैं
32:25उनको पता है कि ठीक नहीं हुआ
32:29मैंने अपना सैयम बनाई रखा
32:33और वो मेरा नुशासन है
32:37रहेगा जो गलत है गलत कहता रहा
32:39यह तरीगा गलत है
32:41यह गलत है
32:43और अडिट करा सकते हैं
32:45कंपनी के भीतर कंपनी के तरीके से चल सकते हैं
32:51ठेंगे पर तो कंपनी नहीं चलती है
32:54यह चलेगी
33:01लेकिन जीवन में पहली बार जो लोग मेरा भरुसा करके आए
33:08जिन लोगों ने मेरे चेहरे पर छोड़ा हैं
33:19उन लोगों से मैं माफ़ी ज़रूर बाओगा
33:26मैं शर्विन्दा हूँ आप लोगों के आगे
33:30कि मैं आपके भरुसे को नहीं बना पाया
33:36जीवन यह नहीं है
33:39आगे भी है
33:42लेकिन मुझे इस बात का
33:45हफसूस है
33:49कि मैं आपका भरुसा नहीं रख सका
33:56यह ऐसा
34:01जिस विवार
34:04के बारे में मैं
34:07कुछ कह नहीं सकता
34:09कहने लाग नहीं है यह
34:16पत्रकार अपनी प्रतिभा
34:19अपनी कमिट्मेंट
34:23अपने होने से जाना जाता है
34:25आप सब लोग
34:27इसी के आधार पे जाने जाती है
34:31आप सब की इज़त भी मैं
34:34इसी ले करता हूँ क्योंकि
34:36आपने अपनी
34:37जिम्मेदारियों से कभी मोह नहीं मोड़ा
34:41और आउट ओफ वे काम करते रहें
34:46आठ गंटे, नौ गंटे, दस गंटे
34:49आपने
34:51अपनी जिम्मेदारियां
34:53सराखों पर उठाई हैं
34:56लेकिन मेरे चेहरे पर
34:58मेरे भरुसे पर
35:00जितनी भी लोग आए हैं
35:06उस में मापी चाहता हूँ
35:25यह गलत है
35:35यह नहीं हो सकता
35:38सोच पर यह
35:44किसी भी सब्धे समाज
35:48और कंपनी के भीतर
35:54कि लुहेडों लंपटों वाला बढ़ताव
36:00अवाली बवाली मवाली पत्रकार थोड़े हैं
36:11जो बहुत तकलीफ है
36:21मैं मैं हूँ
36:24जो मेरे होने पर नाज है
36:28पत्रकार होने पर भी
36:32पूरी पत्रकारी कम्मिनटी पर भी
36:37मर्यादि सब अनुशासन के दाएरे में रहने वाला
36:43एक व्यक्ति हमेशा इस तरह के बरताव के उम्मिद करता है
36:49मैंने वही किया
36:53लेकिन जो हुआ वो गलत हुआ
37:00जितनी लोग हार किये गए
37:07उनसे में मिलवाँगा आपको
37:12एचार पालिसीज एचार
37:22क्या है बताउगा
37:30नीजी तोर पर कोई दिक्त नहीं है
37:35लेकिन कंपनी के दारे में
37:38उसूल से बात होती है
37:41काम तरीके से कंपनी के पालिसी के मताबिक होता है
37:47मामले सुलजाय निपटाय कंपनी के पालिसी के मताबिक जाते है
37:50बंद कमरों के भी तर बहुत सारे मीटिंस होती है
37:54बड़े-बड़े मसले सुझा जाते हैं, सुझा जाते हैं
37:59लेकिन ये सनी
38:04और
38:10जब कभी भी लगता है
38:17कि आपको मुस्वाद करनी है
38:24आप सभी साथ ही
38:29आप जानते हैं कि मैं 24 सिंटों लब्द हूँ
38:35लेकिन जितने भी लोगों
38:38निमेरी वज़त से
38:42अपनी नौकरी या करियर
38:46जोकी में डाल दिया है
38:51जितना बन पड़ेगा
38:53मैं आपके साथ खड़ा हो करके
38:55उस मुश्वाद से आपको निकालने की हर समब कोशिश करूँगा
39:01आप सुर्य
39:03सुर्य
39:04सुर्य
39:08सुर्य
39:09सुर्य
39:11सुर्य
39:13सुर्य
39:14झाल
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