00:00अब खबर जिसे आज जिसने भी सुना या देखा वो पूछ रहा है कि जो बेटा पापा की जान था
00:06उसी ने पापा की जान बेरहमी से क्यूं ले लिए
00:08खबर लखनव से आई जहां अक्षत इकलोता बेटा है पिता की फामिसी से लेकर शराब तक की दुकाने हैं
00:15शहर के बड़े प्रतिष्ठित स्कूल से पिता ने बेटे को पढ़ाया लेकिन अपने ही पापा को बेटे ने गोली मार
00:21दी, शव को टुकडों टुकडों में काट दिया, कुछ हिस्सा एक नीले ड्रम में भरा, कुछ हिस्से पापा के शव
00:29के लेकर बेटा कार से दूर जाकर �
00:31असिड तक लेकाया ताकि तुकडे जला सके शरीर को, उस पिता के शरीर के तुकडे कर दिये जिस पिता ने
00:39बेटे को कलेजे का तुकडा माना था
00:55जिन बाहूं के घेरे ने दुनिया के हर डर को बेटे से दूर रखा होगा
00:59जिनके कंदे पर चड़कर आस्मान को छू लेने का गुमा होता होगा
01:05जिनकी उंगलियों को धाम कर बेटे ने रखा होगा पहला कदम
01:10जो माथे पर हाथ भेर देते होंगे तो हर दर्द दूर हो जाता होगा
01:18पापा की वही बाहें, वही कंदा, वही हाथ, वही उंगलियां
01:23पापा के वो पैर, कुछ इस ड्रम में, कुछ नदी की तलहटी दे
01:28आज रिष्टों के टुकड़ों की तरह दिखने पड़े मोंगे
01:33उसने जो है, राइफल से गोली मार दी है उनको, इसके बाद सब के कई टुकड़े करकर गे, इदर उदर
01:40फेका है
01:40और धड़ को सबसे नीचे वाले फिलोर में ले जा करके, एक नीले ड्रम में डाल के उसने रखा था
02:05हाँ, बापा को दर्द नहीं होता
02:07पर कनपटी पर बंडूप ताने बेटे की आँखों में उतरा खून देखकर कलेजा तो फटी गया होगा
02:14शायद उस गोली के चलने से पहले ही मर गए होंगे पापा
02:18शाव को साची मिठाने के करम में शाव के कुछ टुक्रे किये हैं और उसमें से जैसा उसने अभी बताया
02:25है
02:25कि हात और पैर को काट करते अब किसी जग़ा पे उसने फेक दिया है
02:29और जो बोडी का में धड़ है वो इनके ग्राउंट प्लोर से मिला है जिसकी उसने खुदी बता दिया है
02:35और आला कतल को भी उसने बरामत करा दिया है
02:40शुरू-शुरू में अच्छे तो लगते होंगे ना पापा जिन्दगी के पहले हीरो रहे होंगे पापा
02:46जिनके हाथ पकड़ते ही कोई छो भी नहीं सके, ऐसा लगता होगा
02:50फिर क्या हुआ, पापा का प्यार अच्छा और डाट बुरी
02:54इतनी बुरी कि पापा ही बुरे लगने लगे
02:57मार दिया और टुकडे टुकडे कर दिया
03:23यह कु excess अब है।
03:27नहीं पकड़ पाते हुँगे आँखुद ही उन्हें मार कर उन्हें ुप घूजने में समझ पाते हैं।
04:09जब कनपटी पर बंदूख रखकर उनके इतने करीब से
04:12गोली चलाई तो पापा की आँखों में तो देखा ही होगा
04:15जब आरी से पापा के हाथ पाओं काटे होंगे तो 21 साल का वो रिष्टा भी टुकड़े टुकड़े काटा होगा
04:22पापा ने कभी तो जिगर का टुकड़ा कहा होगा
04:27उन्हीं के शरीर के टुकडे करते वो बाते याद तो आई हूंगी
04:32एक एक दिल एक एक पल का साथ क्या याद नहीं आया
04:35जब तीन दिन तक इस बात को छुपाया होगा
04:39क्या कभी बुखार में माथे की पटी चोट का मरहम याद आया
04:43जब पापा के शरीर को गलाने के लिए आसिट खरीद कर लाया होगा
04:48पापा ने कभी तो लाड़ से अपनी गूदी में बेटे का सर रखा होगा
04:52क्या याद नहीं आया जब पापा का कटा सर कार में रखकर भूनते फिर रहे
04:57शायद याद आये होंगे पापा के साथ वो लोंग ड्राइब
05:01जब 21 किलोमीटर तक पापा के टुकड़े लिए गाड़ी चलाई होगी
05:06सब कुछ दिया तो था पापा ने
05:08शायद अपनी मेहनत का जिक्र करना भूल गए
05:11हर जित पूरी तो की होगी
05:13बड़े स्कूल में पढ़ाया होगा
05:16घुस्सा भी तो शांत हो जाया करता था पापा का
05:19अभी भी हो जाता और माफ कर देते पापा
05:22अगर वो टुकड़ों में न हो जाता
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